नन माफिया की मनमानी पर रोक के लिए हरियाणा-यूपी की टास्क फोर्स करेगी यमुना की मॉनिटरिंग

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Fri, 28 Sep 2018 12:47 AM IST
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खनन माफिया की मनमानी पर रोक के लिए टास्क फोर्स करेगी मॉनिटरिंग
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-किसान बोले-एनजीटी को रिपोर्ट भेजने के लिए खानापूर्ति के लिए की जाती है टॉस्क फोर्स की मीटिंग
अमर उजाला ब्यूरो
खिजराबाद। यमुना में बड़े स्तर पर किए जा रहे खनन पर निगरानी के लिए एनजीटी के आदेशानुसार हरियाणा यूपी की टास्क फोर्स बनाई गई है। इसमें दोनों प्रदेशों के अधिकारियों को शामिल किया गया है। गुरुवार को हथिनीकुंड बैराज पर टास्क फोर्स के अधिकारियों की मीटिंग की गई।
बैठक की अध्यक्षता बिलासपुर के एसडीएम ने की। इसमें दोनों प्रदेशों के बीच तालमेल बनाए रखने और जरूरी सूचनाओं को लेकर विचार विमर्श किया गया। दरअसल माइनिंग माफिया यूपी में और हरियाणा में अपना एरिया बताकर खनन करते हैं और इसी बात को लेकर यमुना के सीमावर्ती एरिया में अवैध खनन को लेकर टकराव होता है। मीटिंग में जिला खनन अधिकारी गुरजीत सिंह, बेहट एसडीएम जेपी शर्मा आदि मौजूद रहे।

मशीन से हो रहा खनन
खानापूर्ति के लिए की गई इस बैठक में अधिकारियों ने ठेकेदारों द्वारा मशीनों से की जाने वाली माइनिंग को लेकर कोई चर्चा नहीं की गई। यमुना में रात-दिन मशीन से खनन हो रहा है। अवैध खनन व प्रशासन की लापरवाही के चलते ताजेवाला बैराज बह गया। स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो अब हथनी कुंड बैराज को खतरा है। इसका खामियाजा जिले के किसान देख चुके हैं, क्योंकि यमुना के पानी ने इस बार हरियाणा की सीमा में ज्यादा मार की, क्योंकि माफिया के साथ-साथ ठेकेदारों ने अंधाधुंध खुदाई कर दी है। इसके चलते हरियाणा क्षेत्र निचले स्तर पर पहुंच गया।

यमुना में बना दिए कुंड
खनन माफिया यमुना में मनमर्जी से खनन कर रहा है। उन्होंने अवैध तरीके से बांध तक बना दिए। जिनसे यमुना का प्राकृतिक स्वरूप ही बदल दिया है। यमुना में गहरे कुंड बना दिए गए हैं। इससे नदी का जल बहाव हरियाणा साइड हो गया है।

ये भी नुकसान हैं : यमुना बजरी, रेत व पानी का भंडार हैं। नदी में पत्थर होने से पानी की गुणवत्ता बढ़ती हैं। पत्थरों से पानी टकराने पर आक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती हैं। मानसून के समय में पानी रिचार्ज होकर गैर मानसूनी समय में पानी की आपूर्ति नदी को जीवित रखती हैं।

संतोषजनक नहीं हो रही कार्रवाई
वहीं क्षेत्र के किसानों का कहना है कि खनन माफिया को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। तभी यमुना नदी का स्वरूप बच सकता हैं। ऐसा होने से बाढ़ के प्रकोप से बच सकते हैं। उनका यह भी कहना है कि टास्क फोर्स भी संतोषजनक कार्रवाई नहीं कर रही है।
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