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हरियाणा व यूपी को जोड़ने को पुल निर्माण के लिए प्रक्रिया शुरू

Thu, 26 Jul 2018 01:16 AM IST
Updated Thu, 26 Jul 2018 01:16 AM IST
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हरियाणा व यूपी को जोड़ने को पुल निर्माण के लिए प्रक्रिया शुरू
हरियाणा व यूपी को जोड़ने को पुल निर्माण के लिए प्रक्रिया शुरू
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60 एकड़ भूमि का किया जाएगा अधिग्रहण
अमर उजाला ब्यूरो
रादौर। यमुनानदी के नगली घाट पर यूपी व हरियाणा को जोड़ने के लिए बनाए जाने वाले लगभग आधा किलोमीटर के पुल निर्माण के लिए 60 एकड़ भूमि को अधिग्रहण करने की पीडब्ल्यूडी विभाग ने प्रक्रिया मंगलवार से शुरू कर दी है। योजना के तहत पीडब्ल्यूडी विभाग पुल बनाने के लिए चार गांव गुमथला, संधाला, नगली व प्रहलादपुर, के 66 किसानों से निशुल्क भूमि अधिग्रहण कर रहा है। इसी कड़ी में 20 किसानों ने मंगलवार को तहसील रादौर व पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस यमुनानगर में विभाग के जेई जोगिंद्र सिंह को उनकी भूमि पुल बनाने के लिए दिए जाने को लेकर अपने अष्टाम दिए।
जेई ने बताया कि नगली घाट पर बनाया जाने वाला पुल 576 मीटर यानी 1890 फुट का होगा। जो आधा किलोमीटर से कुछ ज्यादा होगा। जिस पर 15 पीलर बनाकर पुल खड़ा किया जाएगा। विभाग संबंधित किसानों से निशुल्क उनकी भूमि लेकर ही पुल का निर्माण करेगा। जिस भूमि को अधिग्रहण किया जाना है, उसके लगभग मुस्तरखा खाते के तहत लगभग 400 मालिक बताए जा रहे हैं। जब तक सभी लोग अपनी भूमि को निशुल्क सरकार के नाम रजिस्ट्री नहीं करवाते, तब तक पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं होगा। प्रशासन के अधिकारियों के आदेशानुसार पुल के लिए भूमि देने वाले किसानों को तहसील में जाकर रजिस्ट्री करवानी होगी। जिसका इंतकाल सरकार के नाम जाएगा।
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आसान नहीं होगा पुल के लिए जमीन हासिल करना - क्षेत्र के लोगों की मांग पर प्रदेश सरकार हरियाणा व यूपी को जोड़ने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर पुल का निर्माण करने की घोषणा कर चुकी है। लेकिन इसकी एवज में सरकार चाहती है कि पुल के लिए संबंधित किसान सरकार को निशुल्क भूमि उपलब्ध करवाए। 60 एकड़ भूमि अधिग्रहण की जानी है। जिसके लगभग 400 से अधिक हिस्सेदार बताए जा रहे हैं। जब तक सभी हिस्सेदार अपने हिस्से की भूमि को निशुल्क सरकार को नहीं देते, तब तक पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं होगा। ऐसे में 400 हिस्सेदारों से निशुल्क भूमि अधिग्रहण करना सरकार के लिए टेडी खीर साबित होगा। मंगलवार को पहले दिन केवल 20 किसानों ने अपनी भूमि सरकार को पुल बनाने के लिए निशुल्क देने के लिए अष्टाम दिए हैं। किसानों में निशुल्क भूमि देने को लेकर कोई विशेष उत्साह नहीं दिख रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि 400 हिस्सेदारों से सरकार पुल बनाने के लिए कैसे भूमि हासिल करेगी। इसके लिए लंबा समय लग सकता है और पुल बनाने में भी देरी होगी।
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