{"_id":"5b22b6784f1c1b315d8b50d8","slug":"15290015952-yamuna-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तथ्य छिपाकर नौकरी कर रहे महाराजा अग्रसेन कॉलेज के प्रिंसिपल की सेवाएं वापस ली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तथ्य छिपाकर नौकरी कर रहे महाराजा अग्रसेन कॉलेज के प्रिंसिपल की सेवाएं वापस ली
Updated Fri, 15 Jun 2018 12:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महाराजा अग्रसेन कॉलेज के प्रिंसिपल की सेवाएं वापस लेने का दावा
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। उच्चतर शिक्षा निदेशालय की ओर से जगाधरी स्थित महाराजा अग्रसेन कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. पीके वाजपेयी की सेवाएं वापस लेने का दावा किया गया है। एडवोकेट जीडी गुप्ता ने बताया कि उन्होंने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में एक लोकहित याचिका दायर करके प्रिंसिपल पद पर नियुक्ति रद्द करने की प्रार्थना की थी। इस पर निदेशक उच्चतर शिक्षा विभाग ने जांच करवाई तो उन पर पुराना आपराधिक रिकॉर्ड छिपाकर प्रिंसिपल पद पर नियुक्ति लेने का आरोप ठीक पाया गया।
उन्होंने बताया कि पीके वाजपेयी महाराजा अग्रसेन कॉलेज में प्रिंसिपल पद पर नियुक्त होने से पहले उदयपुर में एक शिक्षा संस्थान में प्राध्यापक के पद पर नियुक्त थे और वहां वह यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किए गए थे। वह मुकदमा उसके खिलाफ अदालत में चल रहा है। इन्होंने अपने पुराने केसों के तथ्य छिपा कर यहां नौकरी प्राप्त कर ली थी। उसने आरोप लगाया कि बाद में मामले का पता लगने के बावजूद कॉलेज की प्रबंध समिति ने कोई कार्रवाई नहीं की और सही तथ्य न बताकर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से व उच्चतर शिक्षा विभाग से इनकी नियुक्ति मंजूर करवा ली थी। इस पर उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी। आरोप ठीक पाए जाने पर कॉलेज की प्रबंध समिति को उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने को कहा था, लेकिन प्रबंध समिति ने दिखावे की जांच करके प्रिंसिपल को निर्दोष करार के दिया। अब कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने उच्चतर शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के आधार पर प्रिंसिपल पद पर साल 2011 में दी गई मंजूरी को वापस ले लिया।
इस बारे में जब प्रिंसिपल डॉ. पीके वाजपेयी से बात की गई तो उन्होंने शिकायतकर्ता को ब्लैकमेलर बताया और कहा कि वह काफी समय से परेशान कर रहा है। उसके सारे आरोप झूठे हैं। मुझे अभी यूनिवर्सिटी की तरफ से सेवा वापस लेने संबंधी कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। वह पहले भी इस तरह के झूठे आरोप लगाता रहा है। उन्होंने कहा कि मैं भी कोर्ट की शरण में हूं और मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। उच्चतर शिक्षा निदेशालय की ओर से जगाधरी स्थित महाराजा अग्रसेन कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. पीके वाजपेयी की सेवाएं वापस लेने का दावा किया गया है। एडवोकेट जीडी गुप्ता ने बताया कि उन्होंने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में एक लोकहित याचिका दायर करके प्रिंसिपल पद पर नियुक्ति रद्द करने की प्रार्थना की थी। इस पर निदेशक उच्चतर शिक्षा विभाग ने जांच करवाई तो उन पर पुराना आपराधिक रिकॉर्ड छिपाकर प्रिंसिपल पद पर नियुक्ति लेने का आरोप ठीक पाया गया।
उन्होंने बताया कि पीके वाजपेयी महाराजा अग्रसेन कॉलेज में प्रिंसिपल पद पर नियुक्त होने से पहले उदयपुर में एक शिक्षा संस्थान में प्राध्यापक के पद पर नियुक्त थे और वहां वह यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किए गए थे। वह मुकदमा उसके खिलाफ अदालत में चल रहा है। इन्होंने अपने पुराने केसों के तथ्य छिपा कर यहां नौकरी प्राप्त कर ली थी। उसने आरोप लगाया कि बाद में मामले का पता लगने के बावजूद कॉलेज की प्रबंध समिति ने कोई कार्रवाई नहीं की और सही तथ्य न बताकर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से व उच्चतर शिक्षा विभाग से इनकी नियुक्ति मंजूर करवा ली थी। इस पर उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी। आरोप ठीक पाए जाने पर कॉलेज की प्रबंध समिति को उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने को कहा था, लेकिन प्रबंध समिति ने दिखावे की जांच करके प्रिंसिपल को निर्दोष करार के दिया। अब कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने उच्चतर शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के आधार पर प्रिंसिपल पद पर साल 2011 में दी गई मंजूरी को वापस ले लिया।
विज्ञापन
इस बारे में जब प्रिंसिपल डॉ. पीके वाजपेयी से बात की गई तो उन्होंने शिकायतकर्ता को ब्लैकमेलर बताया और कहा कि वह काफी समय से परेशान कर रहा है। उसके सारे आरोप झूठे हैं। मुझे अभी यूनिवर्सिटी की तरफ से सेवा वापस लेने संबंधी कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। वह पहले भी इस तरह के झूठे आरोप लगाता रहा है। उन्होंने कहा कि मैं भी कोर्ट की शरण में हूं और मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
विज्ञापन