फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   एंकर- ....विश्व गौरया दिवस पर विशेष (20 मार्च को है दिवस).....

एंकर- ....विश्व गौरया दिवस पर विशेष (20 मार्च को है दिवस).....

Wed, 21 Mar 2018 12:19 AM IST
Updated Wed, 21 Mar 2018 12:19 AM IST
विज्ञापन
एंकर- ....विश्व गौरया दिवस पर विशेष (20  मार्च को है दिवस).....
गौरैया को लुप्त होने से बचाने में जुटे मोहम्मद नईम
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जगाधरी के मोहम्मद नईम पिछले 26 सालों से लुप्त हो रही गौरैया को बचाने में जुटे हैं। सात साल पहले तक उनके घर में लगी कंटीली बेल में 150-200 गौरैया रहती थी, जिनकी संख्या अब 15-20 ही रह गई है। साल दर साल गौरैया की संख्या घटने के बावजूद नईम ने हार नहीं मानी। पिछले साल उनके घर में 4-5 गौरैया ही रह गई थी, लेकिन नईम के प्रयासों से इस साल गौरैया की संख्या बढ़कर 15 तक पहुंच गई है।
जगाधरी के विशाल नगर निवासी मोहम्मद नईम ने वर्ष 1992 में अपने घर में बैंगन बलिया की बेल लगाई थी। इसके दो साल बाद ही बेल पर 15-20 गौरैया आकर बैठने लगी। नईम ने पूरे आंगन में बेल लगा दी, ताकि और अधिक गौरैया यहां आए। उन्होंने अपने आंगन में गौरैया के लिए बाजरा, रोटी, चावल और पानी रखना शुरू कर दिया। कुछ महीनों में ही बेल बढ़ी और साथ ही साथ गौरैया की संख्या भी बढ़ने लगी। मोहम्मद नईम बताते हैं कि वर्ष 1994 से वह प्रतिदिन अपने आंगन में गौरैया के लिए दाना और पानी रख रहे हैं। जब वह घर में नहीं होते हैं तो परिवार के अन्य सदस्य यह जिम्मेदारी उठाते हैं। नईम प्रतिदिन तीन वक्त गौरैया को दाना डालतेे हैं। नईम बताते है कि अल सुबह ही गौरैया उनके आंगन में चहचहाना शुरू कर देती हैं। ऐसा लगता है कि मानो वे दाना मांग रही हो। सुबह खा-पीकर गौरैया चली जाती है और दोपहर को बेल पर आकर बैठ जाती है। नईम के आंगन में दाना डालते ही गौरैया नीचे उतरकर दाना चुगने लगती हैं। इसी प्रकार शाम को नईम फिर दाना डालते हैं। बैगन बलिया की बेल काफी घनी और कंटीली होती है, जिसमें नन्ही गौरैया शिकारी पक्षियों से पूरी तरह महफूज रहती है।
विज्ञापन


रंग लाया गौरैया को बचाने में पड़ोसियों का सहयोग
नईम बताते हैं कि दीवाली में फोड़े जाने वाले पटाखों से उनके आंगन में चहकने वाली गौरैया की संख्या लगातार कम हुई है। पटाखों की तेज आवाज से गौरैया हार्ट अटैक से मरने लगती हैं या फिर घबराकर घोंसले से उड़ जाती है। अंधेरा होने के कारण वे बिजली की तारों से टकराकर मर जाती हैं या शिकारी पक्षी उन्हें दबोच लेते हैं। पहले सिर्फ दीवाली पर आतिशबाजी चलती थी, लेकिन अब शादी और अन्य त्योहारों पर भी आतिशबाजी चलाई जाती है, जो गौरैया के लिए जानलेवा साबित हो रही है। पिछले साल मोहम्मद नईम ने अपने आस-पड़ोस के लोगों को गौरैया की दुहाई देकर तेज आवाज वाले पटाखे न बजाने का अनुरोध किया। पड़ोसियों ने भी नईम का साथ दिया और दीवाली पर तेज आवाज वाले पटाखे नहीं बजाए। इसके चलते पिछले साल उनकी बेल पर रहने वाली गौरैया नहीं मरीं और इस साल उनकी संख्या 20 तक पहुंच गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

फोटो-22,25
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed