{"_id":"5ab008284f1c1bac758b643a","slug":"15214861148-yamuna-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक करोड़ तीन लाख रुपये आया फैक्ट्री का बिल, उद्योगपति के उड़े होश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक करोड़ तीन लाख रुपये आया फैक्ट्री का बिल, उद्योगपति के उड़े होश
Updated Tue, 20 Mar 2018 12:27 AM IST
विज्ञापन
रीडिंग के हिसाब से फैक्ट्री का बिल 42 हजार, भेजा एक करोड़ तीन लाख रुपये का
ससौली रोड का रहने वाले पीड़ित उद्योगपति ने रीडिंग करने पर वालों पर उठाया सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। ससौली रोड पर लोहे का कारोबार करने वाले उद्योगपति गुरमीत सिंह की फैक्ट्री का बिजली बिल एक करोड़ तीन लाख 95 हजार 318 रुपये आया है। 40 से 45 हजार रुपये बिल के बदले एक करोड़ रुपये का बिल देखते ही उद्योगपति चौंक उठा। उद्योगपति ने रीडिंग लेने वाले कर्मियों व सवाल उठाए हैं।
उद्योगपति गुरमीत सिंह ने बताया कि तीन दिन पहले उन्हें सात फरवरी से लेकर सात मार्च तक का बिल मिला। औसतन यह बिल 40 से 45 हजार रुपये आता था। लेकिन इस बार यह बिल एक करोड़ तीन लाख 95 हजार 318 रुपये का आया। इतना बिल देखकर वे चौंक गए हैं। वह बिल लेकर संबंधित विभाग के पास गए थे। उन्होंने इसकी जांच करवाई तो बिल रीडिंग के हिसाब से 42 हजार रुपये बनता है। ऐसे न जाने कितने उपभोक्ता होंगे जो बिजली निगम की गलती की वजह से हर रोज सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है कि जिस भी स्तर पर लापरवाही हुई है, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। यूएचबीवीएन के एसई एके गर्ग का कहना है कि डिजिट की गड़बड़ी की वजह से ऐसा हो सकता है। फिर भी एक्सईएन से इस मामले को चेक करवाएंगे। प्रयास रहेगा कि इस तरह की दिक्कत दोबारा न आए।
फोटो : 34
विज्ञापन
ससौली रोड का रहने वाले पीड़ित उद्योगपति ने रीडिंग करने पर वालों पर उठाया सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। ससौली रोड पर लोहे का कारोबार करने वाले उद्योगपति गुरमीत सिंह की फैक्ट्री का बिजली बिल एक करोड़ तीन लाख 95 हजार 318 रुपये आया है। 40 से 45 हजार रुपये बिल के बदले एक करोड़ रुपये का बिल देखते ही उद्योगपति चौंक उठा। उद्योगपति ने रीडिंग लेने वाले कर्मियों व सवाल उठाए हैं।
उद्योगपति गुरमीत सिंह ने बताया कि तीन दिन पहले उन्हें सात फरवरी से लेकर सात मार्च तक का बिल मिला। औसतन यह बिल 40 से 45 हजार रुपये आता था। लेकिन इस बार यह बिल एक करोड़ तीन लाख 95 हजार 318 रुपये का आया। इतना बिल देखकर वे चौंक गए हैं। वह बिल लेकर संबंधित विभाग के पास गए थे। उन्होंने इसकी जांच करवाई तो बिल रीडिंग के हिसाब से 42 हजार रुपये बनता है। ऐसे न जाने कितने उपभोक्ता होंगे जो बिजली निगम की गलती की वजह से हर रोज सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है कि जिस भी स्तर पर लापरवाही हुई है, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। यूएचबीवीएन के एसई एके गर्ग का कहना है कि डिजिट की गड़बड़ी की वजह से ऐसा हो सकता है। फिर भी एक्सईएन से इस मामले को चेक करवाएंगे। प्रयास रहेगा कि इस तरह की दिक्कत दोबारा न आए।
विज्ञापन
फोटो : 34