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ढाई किलोमीटर में एक दर्जन सूखे पेड़ों को चार साल में भी नहीं काट पाया प्रशासन, क्या यहां भी हादसे का इंतजार?
Updated Thu, 01 Mar 2018 12:24 AM IST
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पांच साल में तीन स्थानों पर सूखे पेड़ों ने ली तीन की जान
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जिले में पांच साल में अलग-अलग तीन स्थानों पर सूखे पेड़ों के गिरने से तीन की मौत हो चुकी है। बावजूद इसके जिले में एनएच-73, 73ए व कुरुक्षेत्र-सहारनपुर स्टेट हाईवे समेत कई शहरी मार्गों पर भी सूखे पेड़ हादसे को दावत देते खड़े हैं। ये मुद्दा जिला रोड सेफ्टी कमेटी की हर बैठक में उठाया गया। बीते चार साल से सूखे पेड़ों की लिस्ट जरूर बढ़ी, किंतु सूखे पेड़ हटाने की कार्रवाई को प्रशासन ढाई कोस भी नहीं चल पाया। इसका अंदाजा एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) पर डीसी निवास व जिला सचिवालय के सामने खड़े सूखे पेड़ों को देखकर लगाया जा सकता है। अमर उजाला ने इसी मार्ग का जायजा लेने पर ढाई किलोमीटर के दायरे में एक दर्जन सूखे पेड़ खेड़े पाए। वहीं, दो दर्जन ऐसे हैं, जिनकी टहनियां हाईवे की ओर व हाईटेंशन तार पर झुकी हैं, जो कभी भी हादसे की वजह बन सकती हैं।
खतरा नंबर एक-
एनएच-73 पर कमानी चौक पर कृष्णा रिसोर्ट के पास एक सूखा पेड़ सड़क पर झुका हुआ है। पेड़ गिरा तो सड़क से गुजरने वाले वाहन और राहगीर इसकी चपेट में आ सकते हैं।
खतरा नंबर दो-
एनएच-73 पर को-ऑपरेटिव बैंक के सामने एक सूखा पेड़ सड़क की ओर झुका हुआ है। चोपड़ा गार्डन आने-जाने वाली सड़क के किनारे लगे इस पेड़ की हालत देखकर कॉलोनी के लोग भी सहमे रहते हैं।
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खतरा नंबर तीन-
एनएच-73 पर को-आपरेटिव बैंक के पास ही एक और सूखा पेड़ गिरने की कगार पर है। यह सीधे सड़क पर गिरेगा तो इसकी चपेट में कोई भी आ सकता है।
खतरा नंबर चार-
एनएच-73 पर कन्हैया साहिब चौक के पास एक सूखा पेड़ हाईटेंशन तारों की ओर झुका है। हाईटेंशन तार हाईवे के ऊपर से गुजर रही है। पेड़ गिरने पर तार टूटना तय है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है।
खतरा नंबर पांच-
एनएच-73 पर संत निश्चल सिंह पब्लिक स्कूल के पास हाईटेंशन तार से ऊंचा सूखा हुआ पेड़ है। इसके नीचे कूड़ा डालकर उसमें आग लगा दी जाती है, जिससे पेड़ भी काफी हद तक जलकर कमजोर हो गया है और कभी भी हाईटेंशन तार पर गिर सकता है।
खतरा नंबर छह-
एनएच-73 पर डीसी निवास व जिला सचिवालय के ठीक सामने दो सूखा पेड़ हैं। यहां से लघु सचिवालय से रोज प्रशासनिक अधिकारी भी आते-जाते हैं। यहां आए दिन धरना-प्रदर्शन भी होते रहते हैं। ऐसे में पेड़ गिरने पर बड़ा हादसा हो सकता है।
बाक्स
मार्च-अप्रैल में आंधी-तूफान से गिरने की आशंका अधिक:
अमर उजाला की टीम ने एनएच-73 पर कमानी चौक से हुडा चौकी मोड़ तक करीब ढाई किलोमीटर तक सड़क किनारे लगे सूखे पेड़ों का जायजा दिया। इस दौरान सात सूखे पेड़ नजर आए, जो गिरने की कगार पर है। इनके मार्च-अप्रैल में आंधी-तुफान से गिरने की आशंका अधिक रहती है। संत निश्चल सिंह स्कूल के पास सूखे पेड़ हाईटेंशन तार की ओर झुके हैं, जो बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। वहीं, दो दर्जन से अधिक सफेदे के पेड़ों की टहनियां सड़क की ओर झुकी हैं। ऐसे में सड़क से गुजरने वालों की सुरक्षा को टहनियों को काटना जरूरी है।
बाक्स-
-सूखे पेड़ों की रिपोर्ट तैयार करने में लग जाते हैं महीनों-
डिस्ट्रिक रोड सेफ्टी कमेटी की बैठकों में चार साल से सड़क किनारे लगे सूखे पेड़ों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाता रहा है। प्रोजक्टर के माध्यम से इन पेड़ों को अधिकारियों को दिखाया गया। हर बार संबंधित विभाग के अधिकारियों को इन पेड़ों को कटवाने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन हालात यह है कि पेड़ कटवाने में विभाग की कार्रवाई इतनी सुस्त होती है कि जब तक वे पेड़ काटे जाते हैं, तब तक दर्जनों अन्य पेड़ सूख चुके होते हैं। ऐसे मेें विभागीय कार्रवाई फिर नए सिरे से शुरू होती है, यानि सूखे पेड़ों की पहचान कर उनकी रिपोर्ट तैयार की जाती है। फिर फाइल को अधिकारियों तक पहुंचाया जाता है। अधिकारी की मंजूरी मिलने के बाद पेड़ों को कटवाने की कार्रवाई आरंभ की जाती है। अमर उजाला ने जिन सूखे पेड़ों को हाईलाइट किया, उनमें अधिकतर को संबंधित विभाग रिपोर्ट तैयार कर चुका है, लेकिन कई माह बीत जाने के बाद भी इन्हें काटा नहीं गया है।
बाक्स-
-सूखे पेड़ों ने चार साल मेें ली तीन की जान-
जुलाई 2012 में औरंगाबाद के नजदीक एक सूखा पेड़ मोटरसाइकिल सवार पब्लिक हेल्थ विभाग के एक आपरेटर के ऊपर गिर गया था, जिससे उसकी मौत हो गई। वर्ष 2012 में ही सरनी चौक के नजदीक भगत सिंह पार्क में लगा एक पेड़ देर शाम आई आंधी में सड़क पर गिर गया। छोटा माडल टाउन निवासी एक ठेकेदार पेड़ के नीचे दब गया, जिससे उसकी मौत हो गई। करीब ढाई साल पहले एनएच-73 ए पर गांव पीपली माजरा के नजदीक एक सूखे पेड़ की मोटी टहनी एक स्कूटर सवार पर गिर गई थी, जिससे उसकी मौत हो गई।
वर्जन
सूखे पेड़ों को काटने में कहां देरी हो रही है। इस बारे में संबंधित विभाग से जवाब मांगा जाएगा।
रोहतास सिंह खर्ब, डीसी, यमुनानगर।
वर्जन-
सूखे पेड़ों को चिहं्ित कर इसकी रिपोर्ट प्रोडेक्शन विंग को भेज दी गई है। सूखे पेड़ों को काटने के लिए कई पहलुओं का ध्यान रखना होता है। यदि पेड़ काटने पर इसके बिजली की तारों पर गिरने का खतरा होता है तो बिजली निगम से इसके लिए एक दिन का बिजली कट लगाने को कहा जाता है। बिजली कट होने पर ही सूखे पेड़ काट सकते हैं। मार्च माह के अंत तक सूखे पेड़ों को कटवा दिया जाएगा।
निवेदिता, डीएफओ
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। जिले में पांच साल में अलग-अलग तीन स्थानों पर सूखे पेड़ों के गिरने से तीन की मौत हो चुकी है। बावजूद इसके जिले में एनएच-73, 73ए व कुरुक्षेत्र-सहारनपुर स्टेट हाईवे समेत कई शहरी मार्गों पर भी सूखे पेड़ हादसे को दावत देते खड़े हैं। ये मुद्दा जिला रोड सेफ्टी कमेटी की हर बैठक में उठाया गया। बीते चार साल से सूखे पेड़ों की लिस्ट जरूर बढ़ी, किंतु सूखे पेड़ हटाने की कार्रवाई को प्रशासन ढाई कोस भी नहीं चल पाया। इसका अंदाजा एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) पर डीसी निवास व जिला सचिवालय के सामने खड़े सूखे पेड़ों को देखकर लगाया जा सकता है। अमर उजाला ने इसी मार्ग का जायजा लेने पर ढाई किलोमीटर के दायरे में एक दर्जन सूखे पेड़ खेड़े पाए। वहीं, दो दर्जन ऐसे हैं, जिनकी टहनियां हाईवे की ओर व हाईटेंशन तार पर झुकी हैं, जो कभी भी हादसे की वजह बन सकती हैं।
खतरा नंबर एक-
एनएच-73 पर कमानी चौक पर कृष्णा रिसोर्ट के पास एक सूखा पेड़ सड़क पर झुका हुआ है। पेड़ गिरा तो सड़क से गुजरने वाले वाहन और राहगीर इसकी चपेट में आ सकते हैं।
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खतरा नंबर दो-
एनएच-73 पर को-ऑपरेटिव बैंक के सामने एक सूखा पेड़ सड़क की ओर झुका हुआ है। चोपड़ा गार्डन आने-जाने वाली सड़क के किनारे लगे इस पेड़ की हालत देखकर कॉलोनी के लोग भी सहमे रहते हैं।
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खतरा नंबर तीन-
एनएच-73 पर को-आपरेटिव बैंक के पास ही एक और सूखा पेड़ गिरने की कगार पर है। यह सीधे सड़क पर गिरेगा तो इसकी चपेट में कोई भी आ सकता है।
खतरा नंबर चार-
एनएच-73 पर कन्हैया साहिब चौक के पास एक सूखा पेड़ हाईटेंशन तारों की ओर झुका है। हाईटेंशन तार हाईवे के ऊपर से गुजर रही है। पेड़ गिरने पर तार टूटना तय है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है।
खतरा नंबर पांच-
एनएच-73 पर संत निश्चल सिंह पब्लिक स्कूल के पास हाईटेंशन तार से ऊंचा सूखा हुआ पेड़ है। इसके नीचे कूड़ा डालकर उसमें आग लगा दी जाती है, जिससे पेड़ भी काफी हद तक जलकर कमजोर हो गया है और कभी भी हाईटेंशन तार पर गिर सकता है।
खतरा नंबर छह-
एनएच-73 पर डीसी निवास व जिला सचिवालय के ठीक सामने दो सूखा पेड़ हैं। यहां से लघु सचिवालय से रोज प्रशासनिक अधिकारी भी आते-जाते हैं। यहां आए दिन धरना-प्रदर्शन भी होते रहते हैं। ऐसे में पेड़ गिरने पर बड़ा हादसा हो सकता है।
बाक्स
मार्च-अप्रैल में आंधी-तूफान से गिरने की आशंका अधिक:
अमर उजाला की टीम ने एनएच-73 पर कमानी चौक से हुडा चौकी मोड़ तक करीब ढाई किलोमीटर तक सड़क किनारे लगे सूखे पेड़ों का जायजा दिया। इस दौरान सात सूखे पेड़ नजर आए, जो गिरने की कगार पर है। इनके मार्च-अप्रैल में आंधी-तुफान से गिरने की आशंका अधिक रहती है। संत निश्चल सिंह स्कूल के पास सूखे पेड़ हाईटेंशन तार की ओर झुके हैं, जो बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। वहीं, दो दर्जन से अधिक सफेदे के पेड़ों की टहनियां सड़क की ओर झुकी हैं। ऐसे में सड़क से गुजरने वालों की सुरक्षा को टहनियों को काटना जरूरी है।
बाक्स-
-सूखे पेड़ों की रिपोर्ट तैयार करने में लग जाते हैं महीनों-
डिस्ट्रिक रोड सेफ्टी कमेटी की बैठकों में चार साल से सड़क किनारे लगे सूखे पेड़ों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाता रहा है। प्रोजक्टर के माध्यम से इन पेड़ों को अधिकारियों को दिखाया गया। हर बार संबंधित विभाग के अधिकारियों को इन पेड़ों को कटवाने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन हालात यह है कि पेड़ कटवाने में विभाग की कार्रवाई इतनी सुस्त होती है कि जब तक वे पेड़ काटे जाते हैं, तब तक दर्जनों अन्य पेड़ सूख चुके होते हैं। ऐसे मेें विभागीय कार्रवाई फिर नए सिरे से शुरू होती है, यानि सूखे पेड़ों की पहचान कर उनकी रिपोर्ट तैयार की जाती है। फिर फाइल को अधिकारियों तक पहुंचाया जाता है। अधिकारी की मंजूरी मिलने के बाद पेड़ों को कटवाने की कार्रवाई आरंभ की जाती है। अमर उजाला ने जिन सूखे पेड़ों को हाईलाइट किया, उनमें अधिकतर को संबंधित विभाग रिपोर्ट तैयार कर चुका है, लेकिन कई माह बीत जाने के बाद भी इन्हें काटा नहीं गया है।
बाक्स-
-सूखे पेड़ों ने चार साल मेें ली तीन की जान-
जुलाई 2012 में औरंगाबाद के नजदीक एक सूखा पेड़ मोटरसाइकिल सवार पब्लिक हेल्थ विभाग के एक आपरेटर के ऊपर गिर गया था, जिससे उसकी मौत हो गई। वर्ष 2012 में ही सरनी चौक के नजदीक भगत सिंह पार्क में लगा एक पेड़ देर शाम आई आंधी में सड़क पर गिर गया। छोटा माडल टाउन निवासी एक ठेकेदार पेड़ के नीचे दब गया, जिससे उसकी मौत हो गई। करीब ढाई साल पहले एनएच-73 ए पर गांव पीपली माजरा के नजदीक एक सूखे पेड़ की मोटी टहनी एक स्कूटर सवार पर गिर गई थी, जिससे उसकी मौत हो गई।
वर्जन
सूखे पेड़ों को काटने में कहां देरी हो रही है। इस बारे में संबंधित विभाग से जवाब मांगा जाएगा।
रोहतास सिंह खर्ब, डीसी, यमुनानगर।
वर्जन-
सूखे पेड़ों को चिहं्ित कर इसकी रिपोर्ट प्रोडेक्शन विंग को भेज दी गई है। सूखे पेड़ों को काटने के लिए कई पहलुओं का ध्यान रखना होता है। यदि पेड़ काटने पर इसके बिजली की तारों पर गिरने का खतरा होता है तो बिजली निगम से इसके लिए एक दिन का बिजली कट लगाने को कहा जाता है। बिजली कट होने पर ही सूखे पेड़ काट सकते हैं। मार्च माह के अंत तक सूखे पेड़ों को कटवा दिया जाएगा।
निवेदिता, डीएफओ