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खतरों भरा हाइवे, सात किलोमीटर में सौ से अधिक गड्ढे
Updated Mon, 15 Jan 2018 12:21 AM IST
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खतरों भरा हाईवे, सात किलोमीटर में सौ से अधिक गड्ढे
-गड्ढों के कारण हो रही हादसे, गड्ढे भरने के लिए हाइवे अथारिटी कर रहा पैसा आने का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर/छछरौली। व्यस्त नेशनल हाईवे 73 ए का सफर खतरनाक बना हुआ है। तिकोनी मोड़ से छछरौली तक करीब सात किलोमीटर की दूरी पर सौ से अधिक गड्ढे हैं। इनमें एक दर्जन से अधिक काफी बड़े हैं। इस दूरी पर हादसों का लंबा रिकार्ड है। इस हाईवे से प्रतिदिन 20 हजार से अधिक बाहरी वाहन गुजरते हैं। इसके अलावा हाईवे से सटे एक दर्जन से अधिक गांवों के लोग भी प्रतिदिन से यहां से गुजरते हैं। हाल ही में यह नेशनल हाईवे अथॉरिटी के पास आया है।
तिकोनी मोड़ यानि एमएल वर्मा चौक से चंद कदमों की दूरी पर डिवाइडर करीब सौ मीटर तक टूटा हुआ है। डिवाइडर के टूटने का मेन कारण डिवाइडर के आगे कोई भी चमकदार पट्टी या सूचना पट नहीं लगा है। इसकी वजह से वाहन चालक रात के अंधेरे में या धुंध की वजह से वाहन डिवाइडर पर चढ जाते हैं। इसकी वजह स डिवाइडर अपनी जगह से बिल्कुल खत्म हो गया है। इस डिवाइडर पर रोजाना रात को अंधेरे में कोई ना कोई वाहन चढ़ जाता है और वाहन का नुकसान हो जाता है। पिछले पांच सालों में इस मोड़ पर 100 से अधिक जानलेवा हादसे हुए हैं। चौक से आगे हाइवे पर गड्ढे शुरू हो जाते हैं जो कि छछरौली तक हैं। हाइवे पर बने गड्ढों से बचने के लिए चालक अपने वाहन को इधर-उधर मोड़ते हैं, जिससे वे सामने या पीछे से आ रहे वाहन की चपेट में आ जाते हैं। रात के समय गड्ढा नजर न आने के कारण कई बार दुपहिया वाहन गड्ढे के कारण अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। चौक से करीब तीन किलोमीटर दूरी पर हाइवे से सटा हुआ मुंडा खेड़ा गांव है। गांव के निवासी संदीप, पंजेटो निवासी अमित, बृजमोहन ने बताया कि हाइवे पर पिछले काफी समय से गड्ढे बने हुए हैं। जब हाइवे एनएच के पास था तो उस समय भी हाइवे की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा था। अब यह नेशनल हाइवे अथारिटी के पास आ गया है। इसके बावजूद हाइवे के गड्ढों की मरम्मत नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि मुंडाखेडा के पास सड़क में बहुत ही बड़ा गड्ढा बन रहा है। जिसकी वजह से यहां आए दिन कोई ना कोई हादसा होता रहता है।
यहां गड्ढों की वजह से हो रहे हादसे
सबसे ज्यादा खतरनाक गड्ढे मानकपुर गांव के पास, मानकपुर इंडस्ट्रियल एरिया के सामने, मुंडाखेड़ा मोड़ के पास, शिवालिक के सामने, पंजेटो गांव के सामने, बलाचौर मोड़ के पास, बिजली बोर्ड दफ्तर के सामने, बीडीपीओ कार्यालय के सामने व बालकुंज के सामने हैं। इन गड्ढों की वजह से कार व ट्रक अपना संतुलन खो बैठते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं
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कब-कब हुए जानलेवा हादसे
दो माह पहले एम एल वर्मा चौक के पास यूपी के दो ट्रकों की भिड़ंत में यूपी के बागपत निवासी ट्रक चालक की मौत हो गई थी।
-कुछ महीने पहले बिजली बोर्ड कार्यालय के सामने गड्ढा होने से यूपी के खैरी गांव के एक युवक की बाइक बस से टकरा गई थी, जिससे उसकी मौत हो गई।
-छह महीने पहले बलाचौर मोड़ के पास दो बाइकों की भिड़ंत में जगाधरी निवासी एक गर्भवती महिला की मौके पर ही मौत हो गई थी।
-वर्ष 2011 में मुंडाखेड़ा मोड़ के नजदीक श्रीराम कॉलेज की बस व ट्रक में भीषण टक्कर हुई थी। इस हादसे में 15 विद्यार्थियों व स्टाफ सदस्यों की मौत हो गई थी।
एस्टीमेट भेजा गया है, पैसा आते ही दूर करेेंगे कमियां : प्रोजेक्ट डायरेक्टर
हाइवे पर बने गड्ढों को बंद करने के लिए इस्टीमेट बनाकर हायर अथॉरिटी के पास भेजा गया है। पैसा आते हाइवे की रिपेयर व सूचना बोर्ड भी लगवाए जाएंगे। साथ ही अन्य कमियों को दूर किया जाएगा।
-जसविंद्र सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, नेशनल हाइवे अथारिटी
फोटो-27,28
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-गड्ढों के कारण हो रही हादसे, गड्ढे भरने के लिए हाइवे अथारिटी कर रहा पैसा आने का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर/छछरौली। व्यस्त नेशनल हाईवे 73 ए का सफर खतरनाक बना हुआ है। तिकोनी मोड़ से छछरौली तक करीब सात किलोमीटर की दूरी पर सौ से अधिक गड्ढे हैं। इनमें एक दर्जन से अधिक काफी बड़े हैं। इस दूरी पर हादसों का लंबा रिकार्ड है। इस हाईवे से प्रतिदिन 20 हजार से अधिक बाहरी वाहन गुजरते हैं। इसके अलावा हाईवे से सटे एक दर्जन से अधिक गांवों के लोग भी प्रतिदिन से यहां से गुजरते हैं। हाल ही में यह नेशनल हाईवे अथॉरिटी के पास आया है।
तिकोनी मोड़ यानि एमएल वर्मा चौक से चंद कदमों की दूरी पर डिवाइडर करीब सौ मीटर तक टूटा हुआ है। डिवाइडर के टूटने का मेन कारण डिवाइडर के आगे कोई भी चमकदार पट्टी या सूचना पट नहीं लगा है। इसकी वजह से वाहन चालक रात के अंधेरे में या धुंध की वजह से वाहन डिवाइडर पर चढ जाते हैं। इसकी वजह स डिवाइडर अपनी जगह से बिल्कुल खत्म हो गया है। इस डिवाइडर पर रोजाना रात को अंधेरे में कोई ना कोई वाहन चढ़ जाता है और वाहन का नुकसान हो जाता है। पिछले पांच सालों में इस मोड़ पर 100 से अधिक जानलेवा हादसे हुए हैं। चौक से आगे हाइवे पर गड्ढे शुरू हो जाते हैं जो कि छछरौली तक हैं। हाइवे पर बने गड्ढों से बचने के लिए चालक अपने वाहन को इधर-उधर मोड़ते हैं, जिससे वे सामने या पीछे से आ रहे वाहन की चपेट में आ जाते हैं। रात के समय गड्ढा नजर न आने के कारण कई बार दुपहिया वाहन गड्ढे के कारण अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। चौक से करीब तीन किलोमीटर दूरी पर हाइवे से सटा हुआ मुंडा खेड़ा गांव है। गांव के निवासी संदीप, पंजेटो निवासी अमित, बृजमोहन ने बताया कि हाइवे पर पिछले काफी समय से गड्ढे बने हुए हैं। जब हाइवे एनएच के पास था तो उस समय भी हाइवे की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा था। अब यह नेशनल हाइवे अथारिटी के पास आ गया है। इसके बावजूद हाइवे के गड्ढों की मरम्मत नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि मुंडाखेडा के पास सड़क में बहुत ही बड़ा गड्ढा बन रहा है। जिसकी वजह से यहां आए दिन कोई ना कोई हादसा होता रहता है।
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यहां गड्ढों की वजह से हो रहे हादसे
सबसे ज्यादा खतरनाक गड्ढे मानकपुर गांव के पास, मानकपुर इंडस्ट्रियल एरिया के सामने, मुंडाखेड़ा मोड़ के पास, शिवालिक के सामने, पंजेटो गांव के सामने, बलाचौर मोड़ के पास, बिजली बोर्ड दफ्तर के सामने, बीडीपीओ कार्यालय के सामने व बालकुंज के सामने हैं। इन गड्ढों की वजह से कार व ट्रक अपना संतुलन खो बैठते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं
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कब-कब हुए जानलेवा हादसे
दो माह पहले एम एल वर्मा चौक के पास यूपी के दो ट्रकों की भिड़ंत में यूपी के बागपत निवासी ट्रक चालक की मौत हो गई थी।
-कुछ महीने पहले बिजली बोर्ड कार्यालय के सामने गड्ढा होने से यूपी के खैरी गांव के एक युवक की बाइक बस से टकरा गई थी, जिससे उसकी मौत हो गई।
-छह महीने पहले बलाचौर मोड़ के पास दो बाइकों की भिड़ंत में जगाधरी निवासी एक गर्भवती महिला की मौके पर ही मौत हो गई थी।
-वर्ष 2011 में मुंडाखेड़ा मोड़ के नजदीक श्रीराम कॉलेज की बस व ट्रक में भीषण टक्कर हुई थी। इस हादसे में 15 विद्यार्थियों व स्टाफ सदस्यों की मौत हो गई थी।
एस्टीमेट भेजा गया है, पैसा आते ही दूर करेेंगे कमियां : प्रोजेक्ट डायरेक्टर
हाइवे पर बने गड्ढों को बंद करने के लिए इस्टीमेट बनाकर हायर अथॉरिटी के पास भेजा गया है। पैसा आते हाइवे की रिपेयर व सूचना बोर्ड भी लगवाए जाएंगे। साथ ही अन्य कमियों को दूर किया जाएगा।
-जसविंद्र सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, नेशनल हाइवे अथारिटी
फोटो-27,28