{"_id":"5a5905c24f1c1b62428b47ae","slug":"151578379810-yamuna-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक घंटे तक नहीं आए डाक्टर तो वापस लौट गए मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक घंटे तक नहीं आए डाक्टर तो वापस लौट गए मरीज
Updated Sat, 13 Jan 2018 12:34 AM IST
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तय समय बाद भी डॉक्टर नहीं आए तो लौटने लगे मरीज
यमुनानगर/छछरौली। जिले में सरकारी चिकित्सा सुविधाएं पहले ही पर्याप्त नहीं हैं। जो उपलब्ध हैं वे मरीजों के मर्ज को कम नहीं कर रही हैं। दरअसल सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर समय पर नहीं पहुंच रहे हैं। यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में काफी चिंताजनक है। अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को जिले के स्वास्थ्य केंद्रों का जायजा लिया।
छछरौली क्षेत्र के खारवन गांव में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सुबह 9 बजे से पहले कई मरीज डाक्टरों का इंतजार करते दिखे। कोई डॉक्टर 10 बजे अस्पताल में आए तो कोई डॉक्टर 10 बजे के बाद भी अस्पताल नहीं पहुुंचे थे। उनका काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी डाक्टर नहीं आए तो मरीज लौटने लगे। मुंसिबल से आए ऑटो मैकेनिक रवि ने बताया कि वह सुबह साढ़े आठ बजे अपने भाई के साथ अस्पताल आया था। उसे कई दिनों से बुखार था। वह इसलिए जल्दी आया था कि 9:30 बजे तक डाक्टर को दिखाकर अपनी वर्कशाप पर चला जाएगा। जब 10 बजे तक डॉक्टर नहीं आए तो रवि वापस चला गया। इसी तरह रामपुर खादर से अपनी बीमार पोती को लेकर आए सुरेश ने बताया कि वह सुबह 9 बजे अस्पताल आ गया था। उन्होंने भी 10 बजे तक इंतजार किया। जब डाक्टर नहीं आए तो वे भी लौट गए।
दादुपुर निवासी बैंक कर्मचारी नवीन को बुखार था। उनका बैंक 10 बजे खुलता है इसलिए वह 9 बजे अस्पताल आ गए ताकि 10 बजे तक चेकअप कराकर बैंक आ जाए। दस बजे तक इंतजार के बाद नवीन भी लौट गए।
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छछरौली : आधा घंटा देरी से आए डाक्टर
अमर उजाला ने छछरौली स्वास्थ्य केंद्र का दौरा किया गया तो वहां भी यही हालात नजर आए। अस्पताल के डाक्टर एक सुबह 9:30 बजे के बाद कमरे में आए, जबकि अस्पताल की ओपीडी का समय सुबह 9 बजे से है। हालांकि दूसरे रूम में सुबह 9 बजे अपने कमरे में आ गए थे। खारवन व छछरौली स्वास्थ्य केंद्र का चार्ज डॉ. वीके जैन के पास है। डाक्टरों केे लेट आने की बाबत पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से मना कर दिया और इसका जवाब सीएमओ से लेने को कहा।
फोटो-7, 8,9.10
खिजराबाद : एक घंटा देरी से पहुंची महिला रोग विशेषज्ञ
खिजराबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुबह 9 बजे से पहले ही मरीज पहुंच चुके थे। अस्पताल की महिला रोग विशेषज्ञ के रूम के बाहर मरीज उनका इंतजार कर रहे थे। डॉक्टर 1 घंटे बाद अपने रूम में आईं। अस्पताल की लैब टेक्निशियन भी 10 बजे के बाद कमरे में आई। हालांकि अस्पताल के अन्य डाक्टर नौ बजे तक अपने रूम में आ गए थे। अस्पताल में चिकित्सा सुविधाएं पूरी नहीं है। अस्पताल को अपग्रेड हुए तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन चिकित्सा सुविधाएं नहीं बढ़ी है। यहां एक्सरे की सुविधा है, जिस कारण मरीजों को एक्सरे के लिए प्राइवेट अस्पतालों में जाना पड़ता है। अस्पताल में डाक्टरों की अटेंडेंस के लिए बायोमीट्रिक मशीन लगाई गई है, लेकिन वह काफी समय से खराब पड़ी है। इस कारण डॉक्टर रजिस्टर में ही हाजिरी लगाते हैं।
1600 ओपीडी वाले सिविल अस्पताल में मात्र 20 डॉक्टर
-अस्पताल में डॉक्टरों की 42 पोस्ट, 20 डॉक्टरों के सहारे चल रहा काम
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। सिविल अस्पताल में सुबह 9 बजे से पहले ही मरीज पर्ची के लिए लाइन में खड़े नजर आए। सिविल अस्पताल व ट्रामा सेेंटर में 100 बेड हैं। सिविल अस्पताल में डॉक्टर सुबह 9 बजे ड्यूटी पर आने के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों का चेक करने के लिए राउंड पर जाते हैं। वहां से आने के बाद वे ओपीडी में मरीजों का चेकअप करते हैं। अस्पताल में साढे़ नौ बजे तक डाक्टर राउंड पर थे। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार यहां प्रतिदिन औसत 1600 मरीज आते हैं, लेकिन यहां मरीजों की संख्या के लिहाज से जरूरी डॉक्टर नहीं है। सिविल अस्पताल व ट्रामा सेंटर में डाक्टरों के 42 पोस्ट हैं। इनमें से 28 पर डॉक्टर नियुक्त हैं। इनमें से आठ डाक्टर पिछले छह महीने से अधिक समय से अनुपस्थित हैं। ऐसे में पूरे अस्पताल व ट्रामा सेंटर का जिम्मा 20 डाक्टर संभाल रहे हैं। डाक्टरों की कमी अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों पर भारी पड़ रही है। हालांकि मरीजों को दिक्कत न आए , इसलिए तीन बजे के बाद भी डॉक्टर मरीजों का चेकअप करते हैं। सिविल अस्पताल में प्रत्येक रोग के औसत तीन स्पेशलिस्ट डाक्टरों की जरूरत है, लेकिन सिर्फ एक स्पेशलिस्ट डाक्टर ही उपलब्ध है। डाक्टरों की ड्यूटी इमरजेंसी, पोस्टमार्टम, वीआईपी ड्यूटी व जिला जेल में भी लगती है, जिससे अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीज प्रभावित होते हैं।
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सिविल अस्पताल में जरूरत के लिहाज से लगभग आधी संख्या में ही डॉक्टर हैं। आठ डॉक्टर काफी समय से अस्पताल नहीं आ रहे हैं। इन डाक्टरों को विभाग की ओर से नोटिस भी दिया गया है। सुबह ओपीडी में आने से पहले डॉक्टर अस्पताल में भर्ती मरीजों का चेक करते हैं। ओपीडी में आने वाले मरीज सफर न करें इसलिए तीन बजे के बाद भी ओपीडी में मरीजों को चेक किया जाता है।
-डॉ. विजय दहिया, चिकित्सा अधिकारी, मुकंद लाल सामान्य अस्पताल
फोटो-17,18,19
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यमुनानगर/छछरौली। जिले में सरकारी चिकित्सा सुविधाएं पहले ही पर्याप्त नहीं हैं। जो उपलब्ध हैं वे मरीजों के मर्ज को कम नहीं कर रही हैं। दरअसल सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर समय पर नहीं पहुंच रहे हैं। यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में काफी चिंताजनक है। अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को जिले के स्वास्थ्य केंद्रों का जायजा लिया।
छछरौली क्षेत्र के खारवन गांव में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सुबह 9 बजे से पहले कई मरीज डाक्टरों का इंतजार करते दिखे। कोई डॉक्टर 10 बजे अस्पताल में आए तो कोई डॉक्टर 10 बजे के बाद भी अस्पताल नहीं पहुुंचे थे। उनका काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी डाक्टर नहीं आए तो मरीज लौटने लगे। मुंसिबल से आए ऑटो मैकेनिक रवि ने बताया कि वह सुबह साढ़े आठ बजे अपने भाई के साथ अस्पताल आया था। उसे कई दिनों से बुखार था। वह इसलिए जल्दी आया था कि 9:30 बजे तक डाक्टर को दिखाकर अपनी वर्कशाप पर चला जाएगा। जब 10 बजे तक डॉक्टर नहीं आए तो रवि वापस चला गया। इसी तरह रामपुर खादर से अपनी बीमार पोती को लेकर आए सुरेश ने बताया कि वह सुबह 9 बजे अस्पताल आ गया था। उन्होंने भी 10 बजे तक इंतजार किया। जब डाक्टर नहीं आए तो वे भी लौट गए।
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दादुपुर निवासी बैंक कर्मचारी नवीन को बुखार था। उनका बैंक 10 बजे खुलता है इसलिए वह 9 बजे अस्पताल आ गए ताकि 10 बजे तक चेकअप कराकर बैंक आ जाए। दस बजे तक इंतजार के बाद नवीन भी लौट गए।
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छछरौली : आधा घंटा देरी से आए डाक्टर
अमर उजाला ने छछरौली स्वास्थ्य केंद्र का दौरा किया गया तो वहां भी यही हालात नजर आए। अस्पताल के डाक्टर एक सुबह 9:30 बजे के बाद कमरे में आए, जबकि अस्पताल की ओपीडी का समय सुबह 9 बजे से है। हालांकि दूसरे रूम में सुबह 9 बजे अपने कमरे में आ गए थे। खारवन व छछरौली स्वास्थ्य केंद्र का चार्ज डॉ. वीके जैन के पास है। डाक्टरों केे लेट आने की बाबत पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से मना कर दिया और इसका जवाब सीएमओ से लेने को कहा।
फोटो-7, 8,9.10
खिजराबाद : एक घंटा देरी से पहुंची महिला रोग विशेषज्ञ
खिजराबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुबह 9 बजे से पहले ही मरीज पहुंच चुके थे। अस्पताल की महिला रोग विशेषज्ञ के रूम के बाहर मरीज उनका इंतजार कर रहे थे। डॉक्टर 1 घंटे बाद अपने रूम में आईं। अस्पताल की लैब टेक्निशियन भी 10 बजे के बाद कमरे में आई। हालांकि अस्पताल के अन्य डाक्टर नौ बजे तक अपने रूम में आ गए थे। अस्पताल में चिकित्सा सुविधाएं पूरी नहीं है। अस्पताल को अपग्रेड हुए तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन चिकित्सा सुविधाएं नहीं बढ़ी है। यहां एक्सरे की सुविधा है, जिस कारण मरीजों को एक्सरे के लिए प्राइवेट अस्पतालों में जाना पड़ता है। अस्पताल में डाक्टरों की अटेंडेंस के लिए बायोमीट्रिक मशीन लगाई गई है, लेकिन वह काफी समय से खराब पड़ी है। इस कारण डॉक्टर रजिस्टर में ही हाजिरी लगाते हैं।
1600 ओपीडी वाले सिविल अस्पताल में मात्र 20 डॉक्टर
-अस्पताल में डॉक्टरों की 42 पोस्ट, 20 डॉक्टरों के सहारे चल रहा काम
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। सिविल अस्पताल में सुबह 9 बजे से पहले ही मरीज पर्ची के लिए लाइन में खड़े नजर आए। सिविल अस्पताल व ट्रामा सेेंटर में 100 बेड हैं। सिविल अस्पताल में डॉक्टर सुबह 9 बजे ड्यूटी पर आने के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों का चेक करने के लिए राउंड पर जाते हैं। वहां से आने के बाद वे ओपीडी में मरीजों का चेकअप करते हैं। अस्पताल में साढे़ नौ बजे तक डाक्टर राउंड पर थे। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार यहां प्रतिदिन औसत 1600 मरीज आते हैं, लेकिन यहां मरीजों की संख्या के लिहाज से जरूरी डॉक्टर नहीं है। सिविल अस्पताल व ट्रामा सेंटर में डाक्टरों के 42 पोस्ट हैं। इनमें से 28 पर डॉक्टर नियुक्त हैं। इनमें से आठ डाक्टर पिछले छह महीने से अधिक समय से अनुपस्थित हैं। ऐसे में पूरे अस्पताल व ट्रामा सेंटर का जिम्मा 20 डाक्टर संभाल रहे हैं। डाक्टरों की कमी अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों पर भारी पड़ रही है। हालांकि मरीजों को दिक्कत न आए , इसलिए तीन बजे के बाद भी डॉक्टर मरीजों का चेकअप करते हैं। सिविल अस्पताल में प्रत्येक रोग के औसत तीन स्पेशलिस्ट डाक्टरों की जरूरत है, लेकिन सिर्फ एक स्पेशलिस्ट डाक्टर ही उपलब्ध है। डाक्टरों की ड्यूटी इमरजेंसी, पोस्टमार्टम, वीआईपी ड्यूटी व जिला जेल में भी लगती है, जिससे अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीज प्रभावित होते हैं।
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सिविल अस्पताल में जरूरत के लिहाज से लगभग आधी संख्या में ही डॉक्टर हैं। आठ डॉक्टर काफी समय से अस्पताल नहीं आ रहे हैं। इन डाक्टरों को विभाग की ओर से नोटिस भी दिया गया है। सुबह ओपीडी में आने से पहले डॉक्टर अस्पताल में भर्ती मरीजों का चेक करते हैं। ओपीडी में आने वाले मरीज सफर न करें इसलिए तीन बजे के बाद भी ओपीडी में मरीजों को चेक किया जाता है।
-डॉ. विजय दहिया, चिकित्सा अधिकारी, मुकंद लाल सामान्य अस्पताल
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