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नार्दन रेलवे इंजीनियर्स एसोसिएशन ने रेलवे कॉलोनी गेट पर किया प्रदर्शन
Updated Fri, 15 Dec 2017 10:45 PM IST
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नार्दन रेलवे इंजीनियर्स एसोसिएशन ने रेलवे कॉलोनी गेट पर किया प्रदर्शन
जगाधरी वर्कशाप। नार्दन रेलवे इंजीनियर्स एसोसिएशन द्वारा शुक्रवार को रेलवे वर्कशाप कालोनी गेट पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया। इस दौरान यूनियन पदाधिकारियों ने मुख्य कारखाना प्रबंधक को ज्ञापन भी दिया। यूनियन की मांग है कि यात्री दुर्घटना राहत एवं सरंक्षा के लिए जिम्मेदार रेल की रीढ की हड्डी माने जाने वाले इंजिनियरों के कैरियर के साथ हो रहा खिलावाड़ रोका जाए। एसोसिएशन के डिवीजनल सचिव इंजीनियर राजेश कुमार सैनी ने बताया कि राज्यपत्र सूचना 605 के अनुसार केंद्र सरकार के सभी विभागों में जेई को ग्रुप बी का दर्जा दिया गया है। जबकि रेलवे उन्हें इस दर्जे से महरूम किए हुए है। जेई को पूरे सेवाकाल में मात्र एक पदोन्नति है। यही दुर्दशा अन्य तकनीकी सीडीएमएस, डएमएस व एसई आई टी में भी है। उन्होंने बताया कि भारतीय रेल पूर्ण रूप से तकनीकी संस्था है। तकनीकी ज्ञाताओं की दुर्दशा करके रेलवे की प्रगति नहीं हो सकती। इससे सरंक्षा, सनुरक्षण वदुर्घटना राहत प्रभावित हो सकता है। रेलवे में समय के साथ-साथ ट्रैक भी बढे हैं। इसके साथ साथ कार्यभार भी बढा है। यात्री ट्रेनों व मालगाडिय़ों की संख्या कई गुणा बढी है, जिसके कारण अनुरक्षण व संरक्षा का भार भी कई गुणा बढा है। मगर शर्म की बात है कि अब जेई व एसएसई का वेतनमान जिस प्रकार से बढना चाहिए, वह नहीं बढा। डिवीजनल प्रजेडेंट रूपक गुप्ता ,डिवीजनल वर्क प्रेजीडेंट अरुण कुमार, फाईनांस सचिव मोहित कुमार व सभी पदाधिकारियों ने अपने विचार रखें।
फोटो-19
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जगाधरी वर्कशाप। नार्दन रेलवे इंजीनियर्स एसोसिएशन द्वारा शुक्रवार को रेलवे वर्कशाप कालोनी गेट पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया। इस दौरान यूनियन पदाधिकारियों ने मुख्य कारखाना प्रबंधक को ज्ञापन भी दिया। यूनियन की मांग है कि यात्री दुर्घटना राहत एवं सरंक्षा के लिए जिम्मेदार रेल की रीढ की हड्डी माने जाने वाले इंजिनियरों के कैरियर के साथ हो रहा खिलावाड़ रोका जाए। एसोसिएशन के डिवीजनल सचिव इंजीनियर राजेश कुमार सैनी ने बताया कि राज्यपत्र सूचना 605 के अनुसार केंद्र सरकार के सभी विभागों में जेई को ग्रुप बी का दर्जा दिया गया है। जबकि रेलवे उन्हें इस दर्जे से महरूम किए हुए है। जेई को पूरे सेवाकाल में मात्र एक पदोन्नति है। यही दुर्दशा अन्य तकनीकी सीडीएमएस, डएमएस व एसई आई टी में भी है। उन्होंने बताया कि भारतीय रेल पूर्ण रूप से तकनीकी संस्था है। तकनीकी ज्ञाताओं की दुर्दशा करके रेलवे की प्रगति नहीं हो सकती। इससे सरंक्षा, सनुरक्षण वदुर्घटना राहत प्रभावित हो सकता है। रेलवे में समय के साथ-साथ ट्रैक भी बढे हैं। इसके साथ साथ कार्यभार भी बढा है। यात्री ट्रेनों व मालगाडिय़ों की संख्या कई गुणा बढी है, जिसके कारण अनुरक्षण व संरक्षा का भार भी कई गुणा बढा है। मगर शर्म की बात है कि अब जेई व एसएसई का वेतनमान जिस प्रकार से बढना चाहिए, वह नहीं बढा। डिवीजनल प्रजेडेंट रूपक गुप्ता ,डिवीजनल वर्क प्रेजीडेंट अरुण कुमार, फाईनांस सचिव मोहित कुमार व सभी पदाधिकारियों ने अपने विचार रखें।
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