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हजारों लोग रोज पार करते हैं खतरे की ‘लाइन’
Updated Sat, 02 Sep 2017 12:40 AM IST
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हजारों लोग रोज पार करते हैं खतरे की ‘लाइन’
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। पुराना रादौर रोड स्थित रेलवे फाटक पर जान जोखिम में डालकर रोजाना हजारों लोग बंद क्रॉसिंग पार कर रहे हैं, मगर जिम्मेदार मौन है। न तो रेलवे महकमा और न तो पुलिस-प्रशासन इस पर गंभीर है। जनप्रतिनिधियों को तो जैसे इससे फर्क ही नहीं पड़ता। ये हाल तब है जब हर वर्ष क्रॉसिंग पर होने वाले हादसों में 8 से 10 लोगों की जान जा रही है। वहीं फाटक बंद रहने से अक्सर जाम भी लगा रहता है, जिससे लोग परेशान होते हैं। इससे निजात दिलाने के लिए व्यापारिक संगठन अरसे से एक ओवरब्रिज या अंडरब्रिज बनवाने की मांग कर रहे हैं, मगर कोई सुनने वाला नजर नहीं आ रहा है।
बता दें कि, शहर को रेलवे स्टेशन के पार के इलाके से जोड़ने के लिए पुराना रादौर रोड पर रेलवे फाटक क्रॉसिंग ही मुख्य मार्ग है। लाइन पार की दर्जनों कॉलोनियों और गांवों के लोग सहित औद्योगिक इकाइयों के वाहन रोजाना इसी मार्ग से शहर आते-जाते हैं। इंडस्ट्रियल एरिया में आने-जाने वाले भारी वाहन भी रेलवे फाटक से ही होकर गुजरते हैं। इस कारण फाटक बंद होते ही पुराना रादौर रोड बाजार, इंडस्ट्रियल एरिया और सहारनपुर रोड तक वाहनों की कतार लग जाती है और जाम की स्थिति बन जाती है। इस बीच स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थी और नौकरीपेशा लोग परेशान होते हैं। वहीं रेलवे पुलिस के मुताबिक रेलवे क्रासिंग के दौरान हर साल लगभग 8-10 लोग ट्रेन की चपेट में आकर अकाल मृत्यु हो जाती है। रेलवे कानूनों के मुताबिक बंद रेलवे फाटक के नीचे से गुजरना जुर्म है, लेकिन रेलवे प्रशासन भी कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई तक नहीं करता है।
सिरे नहीं चढ़ पाई पुल बनाने की कवायद
रादौर रोड रेलवे क्रासिंग के ऊपर फ्लाईओवर या फिर अंडरब्रिज बनाने के लिए करीब तीन साल पहले कवायद की गई थी, तब प्रदेश सरकार ने ब्रिज के निर्माण में दिलचस्पी दिखाई और इसके बाद पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से इसके निर्माण कार्य की संभावनाएं भी तलाशी गई, लेकिन पीडब्ल्यूडी ने अपनी रिपोर्ट में रादौर रोड बाजार के कारण ब्रिज के निर्माण को सिरे से नकार दिया। इस पर व्यापारिक संगठनों की ओर से इंडस्ट्रियल एरिया से सहारनपुर रोड तक पुल के निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन रेलवे और सरकार की ओर से फिलहाल कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया जा सका है।
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नागरिक समझ पर भी सवाल
बंद रेलवे फाटक पार करना जुर्म है, मगर कानून तोड़ना लोगों की आदत में शुमार होता जा रहा है। वे इसे सामान्य बात मानने लगे हैं, इसके लिए कानून का पालन कराने वाले एजेंसियां भी जिम्मेदार हैं, वे लोगों को इसके लिए ट्रेंड ही नहीं करती और कार्रवाई न होने से कानूनों का तोड़ा जाना आम होता जा रहा है। बंद रेल फाटक पार करने में जान का जोखिम रहता है, फिर भी लोग ऐसा करने से बाज नहीं आते। ये नागरिक समझ पर भी सवाल उठाता है, लोगों को इस संबंध में जागरूक करना जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी है, मगर वे अपनी भूमिका निभाते नजर नहीं आते। वहीं घंटों लगने वाले जाम से भी लोगों के सब्र का बांध टूटता रहता है, जल्दबाजी के फेर में रेलवे फाटक बंद होने के बावजूद राहगीर व बाइक, स्कूटर व रिक्शा सहित चालक उसके नीचे से निकलते हैं, जिससे हर समय दुर्घटना की संभावना बनी रहती है।
दुकानों और औद्योगिक इकाइयों को नुकसान पहुंचाए बिना हो पुल का निर्माण
रादौर रोड बाजार के दुकानदार भी चाहते हैं कि रेलवे फाटक पर फ्लाईओवर या अंडरब्रिज का निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि रेलवे और सरकार कुछ ऐसा रास्ता निकाले कि दुकानों, औद्योगिक इकाइयों को नुकसान पहुुंचाए बिना पुल का निर्माण हो जाए। जिससे रादौर रोड के रेलवे फाटक पर रोज की जाम की दिक्कत के साथ हादसों के ग्राफ पर भी अंकुश लग पाएगा।
व्यापारियों के सुझाव
हरियाणा उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेशाध्यक्ष और रादौर रोड बाजार के व्यापारी महेंद्र मित्तल का कहना है कि यदि रादौर रोड से ब्रिज के निर्माण में दिक्कत है, तो इंडस्ट्रियल एरिया की ओर से पुल का निर्माण किया जा सकता है।
व्यापारी प्रवीन वर्मा का कहना है कि रेलवे फाटक पर भारी वाहनों की वजह से जाम लगता है। अगर दिन के समय क्रॉसिंग से भारी वाहनों के गुजरने पर प्रतिबंध लगे तो जाम की समस्या दूर हो सकती है।
व्यापारी संजय मित्तल का कहना है कि रेलवे फाटक से लकड़ी और प्लाई पत्ता से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के आने-जाने से जाम लगता है और दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। रेलवे क्रॉसिंग से इनके आने-जाने पर रोक लगनी चाहिए।
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। पुराना रादौर रोड स्थित रेलवे फाटक पर जान जोखिम में डालकर रोजाना हजारों लोग बंद क्रॉसिंग पार कर रहे हैं, मगर जिम्मेदार मौन है। न तो रेलवे महकमा और न तो पुलिस-प्रशासन इस पर गंभीर है। जनप्रतिनिधियों को तो जैसे इससे फर्क ही नहीं पड़ता। ये हाल तब है जब हर वर्ष क्रॉसिंग पर होने वाले हादसों में 8 से 10 लोगों की जान जा रही है। वहीं फाटक बंद रहने से अक्सर जाम भी लगा रहता है, जिससे लोग परेशान होते हैं। इससे निजात दिलाने के लिए व्यापारिक संगठन अरसे से एक ओवरब्रिज या अंडरब्रिज बनवाने की मांग कर रहे हैं, मगर कोई सुनने वाला नजर नहीं आ रहा है।
बता दें कि, शहर को रेलवे स्टेशन के पार के इलाके से जोड़ने के लिए पुराना रादौर रोड पर रेलवे फाटक क्रॉसिंग ही मुख्य मार्ग है। लाइन पार की दर्जनों कॉलोनियों और गांवों के लोग सहित औद्योगिक इकाइयों के वाहन रोजाना इसी मार्ग से शहर आते-जाते हैं। इंडस्ट्रियल एरिया में आने-जाने वाले भारी वाहन भी रेलवे फाटक से ही होकर गुजरते हैं। इस कारण फाटक बंद होते ही पुराना रादौर रोड बाजार, इंडस्ट्रियल एरिया और सहारनपुर रोड तक वाहनों की कतार लग जाती है और जाम की स्थिति बन जाती है। इस बीच स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थी और नौकरीपेशा लोग परेशान होते हैं। वहीं रेलवे पुलिस के मुताबिक रेलवे क्रासिंग के दौरान हर साल लगभग 8-10 लोग ट्रेन की चपेट में आकर अकाल मृत्यु हो जाती है। रेलवे कानूनों के मुताबिक बंद रेलवे फाटक के नीचे से गुजरना जुर्म है, लेकिन रेलवे प्रशासन भी कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई तक नहीं करता है।
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सिरे नहीं चढ़ पाई पुल बनाने की कवायद
रादौर रोड रेलवे क्रासिंग के ऊपर फ्लाईओवर या फिर अंडरब्रिज बनाने के लिए करीब तीन साल पहले कवायद की गई थी, तब प्रदेश सरकार ने ब्रिज के निर्माण में दिलचस्पी दिखाई और इसके बाद पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से इसके निर्माण कार्य की संभावनाएं भी तलाशी गई, लेकिन पीडब्ल्यूडी ने अपनी रिपोर्ट में रादौर रोड बाजार के कारण ब्रिज के निर्माण को सिरे से नकार दिया। इस पर व्यापारिक संगठनों की ओर से इंडस्ट्रियल एरिया से सहारनपुर रोड तक पुल के निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन रेलवे और सरकार की ओर से फिलहाल कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया जा सका है।
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नागरिक समझ पर भी सवाल
बंद रेलवे फाटक पार करना जुर्म है, मगर कानून तोड़ना लोगों की आदत में शुमार होता जा रहा है। वे इसे सामान्य बात मानने लगे हैं, इसके लिए कानून का पालन कराने वाले एजेंसियां भी जिम्मेदार हैं, वे लोगों को इसके लिए ट्रेंड ही नहीं करती और कार्रवाई न होने से कानूनों का तोड़ा जाना आम होता जा रहा है। बंद रेल फाटक पार करने में जान का जोखिम रहता है, फिर भी लोग ऐसा करने से बाज नहीं आते। ये नागरिक समझ पर भी सवाल उठाता है, लोगों को इस संबंध में जागरूक करना जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी है, मगर वे अपनी भूमिका निभाते नजर नहीं आते। वहीं घंटों लगने वाले जाम से भी लोगों के सब्र का बांध टूटता रहता है, जल्दबाजी के फेर में रेलवे फाटक बंद होने के बावजूद राहगीर व बाइक, स्कूटर व रिक्शा सहित चालक उसके नीचे से निकलते हैं, जिससे हर समय दुर्घटना की संभावना बनी रहती है।
दुकानों और औद्योगिक इकाइयों को नुकसान पहुंचाए बिना हो पुल का निर्माण
रादौर रोड बाजार के दुकानदार भी चाहते हैं कि रेलवे फाटक पर फ्लाईओवर या अंडरब्रिज का निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि रेलवे और सरकार कुछ ऐसा रास्ता निकाले कि दुकानों, औद्योगिक इकाइयों को नुकसान पहुुंचाए बिना पुल का निर्माण हो जाए। जिससे रादौर रोड के रेलवे फाटक पर रोज की जाम की दिक्कत के साथ हादसों के ग्राफ पर भी अंकुश लग पाएगा।
व्यापारियों के सुझाव
हरियाणा उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेशाध्यक्ष और रादौर रोड बाजार के व्यापारी महेंद्र मित्तल का कहना है कि यदि रादौर रोड से ब्रिज के निर्माण में दिक्कत है, तो इंडस्ट्रियल एरिया की ओर से पुल का निर्माण किया जा सकता है।
व्यापारी प्रवीन वर्मा का कहना है कि रेलवे फाटक पर भारी वाहनों की वजह से जाम लगता है। अगर दिन के समय क्रॉसिंग से भारी वाहनों के गुजरने पर प्रतिबंध लगे तो जाम की समस्या दूर हो सकती है।
व्यापारी संजय मित्तल का कहना है कि रेलवे फाटक से लकड़ी और प्लाई पत्ता से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के आने-जाने से जाम लगता है और दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। रेलवे क्रॉसिंग से इनके आने-जाने पर रोक लगनी चाहिए।