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Yamuna Nagar News: रोशनदान की ग्रिल में फंसा 11 फीट लंबा अजगर
Wed, 14 Oct 2026 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 14 Oct 2026 01:17 AM IST
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रोशनदान में फंसे अजगर को रेस्क्यू करती विभाग की टीम। संवाद
- फोटो : 1
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। साढौरा क्षेत्र के गांव रसूलपुर में खेतों के बीच बने एक बंद कमरे के रोशनदान में 11 फीट लंबा और करीब 45 किलो वजनी अजगर लगभग 10 दिन तक फंसा रहा। बाहर निकलने की कोशिश में रोशनदान की लोहे की ग्रिल उसके पेट में तीन-तीन इंच तक धंस गई। वन्यजीव विभाग की टीम ने पांच घंटे से अधिक तक रेस्क्यू अभियान चलाकर उसे सुरक्षित बाहर निकाला।
खेत मालिक गुरदीप हरियाणा पुलिस में सेवारत हैं। कई दिनों बाद जब वह अपने खेतों में पहुंचे तो कमरे के दरवाजे के ऊपर बने रोशनदान में विशाल अजगर फंसा दिखाई दिया। अजगर की हालत देखकर उन्होंने तुरंत वन्यजीव विभाग को सूचना दी। इसके बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। रेस्क्यू अभियान में शामिल विभागीय कर्मचारी मोहित ने बताया कि अजगर ग्रिल के बीचोंबीच फंसा हुआ था। उसे बाहर निकालते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना था कि उसके शरीर को और चोट न पहुंचे। टीम ने पहले छेनी और हथौड़े की मदद से रोशनदान के आसपास का हिस्सा तोड़कर ग्रिल को बाहर निकाला।
जांच में पता चला कि ग्रिल के दो नुकीले हिस्से अजगर के शरीर और पेट में करीब तीन-तीन इंच तक धंसे हुए थे। करीब 10 दिनों तक फंसे रहने के कारण अजगर बेहद कमजोर हो चुका था। टीम ने ब्लेड की मदद से धीरे-धीरे ग्रिल को काटना शुरू किया। शरीर में धंसे लोहे को निकालना चुनौतीपूर्ण था।
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पांच घंटे से अधिक की मशक्कत के बाद अजगर को ग्रिल से मुक्त कराया गया। वन्य प्राणी विभाग के जिला निरीक्षक लीलू राम ने बताया कि उपचार के बाद अजगर को कलेसर के जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
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यमुनानगर। साढौरा क्षेत्र के गांव रसूलपुर में खेतों के बीच बने एक बंद कमरे के रोशनदान में 11 फीट लंबा और करीब 45 किलो वजनी अजगर लगभग 10 दिन तक फंसा रहा। बाहर निकलने की कोशिश में रोशनदान की लोहे की ग्रिल उसके पेट में तीन-तीन इंच तक धंस गई। वन्यजीव विभाग की टीम ने पांच घंटे से अधिक तक रेस्क्यू अभियान चलाकर उसे सुरक्षित बाहर निकाला।
खेत मालिक गुरदीप हरियाणा पुलिस में सेवारत हैं। कई दिनों बाद जब वह अपने खेतों में पहुंचे तो कमरे के दरवाजे के ऊपर बने रोशनदान में विशाल अजगर फंसा दिखाई दिया। अजगर की हालत देखकर उन्होंने तुरंत वन्यजीव विभाग को सूचना दी। इसके बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। रेस्क्यू अभियान में शामिल विभागीय कर्मचारी मोहित ने बताया कि अजगर ग्रिल के बीचोंबीच फंसा हुआ था। उसे बाहर निकालते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना था कि उसके शरीर को और चोट न पहुंचे। टीम ने पहले छेनी और हथौड़े की मदद से रोशनदान के आसपास का हिस्सा तोड़कर ग्रिल को बाहर निकाला।
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जांच में पता चला कि ग्रिल के दो नुकीले हिस्से अजगर के शरीर और पेट में करीब तीन-तीन इंच तक धंसे हुए थे। करीब 10 दिनों तक फंसे रहने के कारण अजगर बेहद कमजोर हो चुका था। टीम ने ब्लेड की मदद से धीरे-धीरे ग्रिल को काटना शुरू किया। शरीर में धंसे लोहे को निकालना चुनौतीपूर्ण था।
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पांच घंटे से अधिक की मशक्कत के बाद अजगर को ग्रिल से मुक्त कराया गया। वन्य प्राणी विभाग के जिला निरीक्षक लीलू राम ने बताया कि उपचार के बाद अजगर को कलेसर के जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया।