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Yamuna Nagar News: जिला अस्पताल में निजी एबुलेंस संचालकों का सिंडीकेट सक्रिय

Wed, 14 Oct 2026 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Wed, 14 Oct 2026 01:31 AM IST
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A syndicate of private ambulance operators is active at the district hospital
जिला नागरिक अस्पताल परिसर में खड़ी निजी एंबुलेंस। संवाद - फोटो : Administration
राजेश कुमार
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यमुनानगर। जिला नागरिक अस्पताल भले ही सरकारी है, लेकिन यहां इन दिनों निजी एंबुलेंस संचालकों का एक ऐसा सिंडिकेट सक्रिय है जो मरीजों और उनके तीमारदारों की मजबूरी का फायदा उठाकर खुली लूट कर रहा है। अस्पताल की इमरजेंसी और पोस्टमार्टम हाउस के बाहर निजी एंबुलेंस चालक डेरा डाले रहते हैं।
मामले का संज्ञान लेते हुए विजिलेंस ने स्वास्थ्य विभाग को इस सिंडिकेट को लेकर आगाह किया है। विजिलेंस की रिपोर्ट के आधार पर नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) ने सिविल सर्जन को पत्र भेजकर इस पर तुरंत लगाम लगाने के निर्देश दिए हैं। निजी एंबुलेंस चालकों ने स्वास्थ्य महकमे में अपनी पूरी पैठ बना ली है। अस्पताल के कुछ कर्मचारियों और चालकों की मिलीभगत है।
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इमरजेंसी वार्ड में पहुंचने वाले गंभीर मरीजों की पल-पल की जानकारी चुनिंदा एंबुलेंस चालकों तक पहुंचाई जाती है। इसके एवज में अस्पताल के स्टाफ का कमीशन पहले से तय होता है। सप्ताह के सातों दिन के लिए एंबुलेंस चालकों की बारी तय है कि किस दिन कौन सा चालक मरीज को ले जाएगा। आपसी तालमेल को मजबूत रखने के लिए समय-समय पर अस्पताल के कर्मचारियों की दावतें भी की जा रही हैं। संवाद
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पोस्टमार्टम हाउस तक फैला जाल
जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर भी हर समय दो से तीन निजी एंबुलेंस खड़ी रहती हैं। इनके चालक अंदर-बाहर मंडराते रहते हैं ताकि अपनों की मौत से सदमे में डूबे परिजनों को बातों में फंसाकर अधिक किराया वसूला जा सके। इमरजेंसी वार्ड के बाहर भी चालकों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। कुछ महीने पहले एक निजी एंबुलेंस चालक और डॉक्टर का ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें डॉक्टर ने चालक पर कमीशन न देने के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद भी व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं हो सका और खेल आज भी बदस्तूर जारी है।
आपात सेवाओं के कंट्रोल रूम तक पकड़
पड़ताल में यह भी सामने आया है कि निजी एंबुलेंस चालकों की पकड़ स्वास्थ्य विभाग के आपात सेवाओं के कंट्रोल रूम के 108 नंबर तक है। अस्पताल से जाने के लिए एंबुलेंस के लिए मरीज के परिजन 108 नंबर पर फोन करते हैं। सरकारी एंबुलेंस से मिलने से पहले ही निजी एंबुलेंस के चालक मरीज का माइंड वॉश कर देते हैं। उन्हें बताया जाता है कि सरकारी एंबुलेंस के भरोसे मत रहें। यह तो बीच में ही बंद हो जाती हैं। वह मरीज से ऐसे बात करते हैं जैसे अस्पताल का ही स्टाफ हो। मरीज की जान को खतरा न हो इसलिए मरीज सरकारी के बजाय निजी एंबुलेंस में चला जाता है।

निजी एंबुलेंस को लेकर विजिलेंस की तरफ से पत्र लिखकर आगाह किया गया है। कई बार निजी एंबुलेंस को अस्पताल से बाहर किया जा चुका है। इस बारे में अस्पताल के पीएमओ को अवगत करवा दिया है कि निजी एंबुलेंस के अस्पताल में आने पर प्रतिबंध लगाया जाए। - डॉ. सुशीला सैनी, नोडल ऑफिसर आपात सेवाएं।
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