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Yamuna Nagar News: सिद्ध शक्तिपीठ में 59 वर्षों से जल रहीं 11 अखंड ज्योत

Wed, 14 Oct 2026 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Wed, 14 Oct 2026 12:37 AM IST
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11 eternal flames have been burning at the revered Shaktipeeth for 59 years
शक्तिपीठ श्री मूर्ति देवी मंदिर में अखंड ज्योत को ठीक करते पुजारी। संवाद - फोटो : सांकेतिक
अशोक कुमार
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यमुनानगर। रेलवे स्टेशन के पास प्राचीन सिद्ध शक्तिपीठ श्री मूर्ति देवी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर में पिछले 59 वर्षों से 11 अखंड ज्योत प्रज्वलित हैं। शहर के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और अंबाला व सहारनपुर जिलों से भी श्रद्धालु मां भगवती के दर्शन करने पहुंचते हैं।
चैत्र और शारदीय नवरात्र पर मंदिर में भक्तों की काफी भीड़ रहती है। मंदिर के पुजारी पंडित रामकुमार और इंद्रदीप अखंड ज्योत की नियमित सेवा करते हैं। श्रद्धालुओं के सहयोग और पुजारियों की देखरेख में ज्योत में देसी घी डाला जाता है। मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि जो श्रद्धालु लगातार 40 दिन तक यहां घी का दीपक जलाकर मां भगवती की आराधना करता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है।
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मंदिर परिसर में गायत्री मां, गोगोपाल, लक्ष्मी नारायण, भगवान शंकर दरबार और राम दरबार सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर पहुंचीं रजनी, सीमा और रश्मि ने बताया कि वे लंबे समय से यहां दर्शन करने आ रही हैं। नवरात्र में व्रत रखकर मां की पूजा-अर्चना करना और 11 अखंड ज्योत के दर्शन करना उनकी आस्था का हिस्सा है।
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श्री मूर्ति देवी मंदिर एवं श्री दुर्गा भवन धर्मशाला समिति के प्रधान कैलाश चंद ने बताया कि नवरात्र पर शहर के अलावा आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसे देखते हुए मंदिर में व्यवस्था की गई है। पूरे नवरात्र सुबह और शाम मां भगवती की विशेष पूजा-अर्चना और आरती होगी। शाम चार से छह बजे तक सुंदरकांड महिला समिति की ओर से दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। संवाद
वर्ष 1925 में कराया गया था मंदिर का जीर्णोद्धार
श्री मूर्ति देवी मंदिर और यहां स्थापित मां की मूर्ति की स्थापना कब हुई, इसकी सटीक जानकारी किसी के पास नहीं है। मंदिर समिति के पदाधिकारियों के अनुसार मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है। वर्ष 1925 में जगाधरी निवासी लाला श्याम लाल ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। बुजुर्गों के अनुसार उस समय मंदिर के आसपास सुनसान जंगल हुआ करता था और यमुनानगर को अब्दुल्लापुर के नाम से जाना जाता था। समय के साथ शहर का विस्तार हुआ, लेकिन मंदिर के प्रति लोगों की आस्था बनी रही।

पंडित जीवानंद ने प्रज्वलित की थी अखंड ज्योत
मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार करीब 59 वर्ष पहले पंडित जीवानंद ने यहां अखंड ज्योत प्रज्वलित की थी। तब से ये ज्योत निरंतर जल रही हैं। मंदिर समिति के पदाधिकारियों और आसपास के बुजुर्गों के अनुसार ज्योत प्रज्वलित करने के समय पंडित जीवानंद को मां ने कन्या के रूप में दर्शन दिए थे। इस धार्मिक प्रसंग को मंदिर से जुड़ी आस्था और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
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