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विश्व भ्रमण कर अहिंसा व मानव प्रेम की अलख जगा रहे हैं देवाशीष डे

Sat, 04 Jan 2014 09:16 PM IST
रेवाड़ी/ब्यूरो।
रेवाड़ी/ब्यूरो। Updated Sat, 04 Jan 2014 09:16 PM IST
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World Travel alakh wake of the violence and human love are Debashish Dey
रेवाड़ी में तिब्बती भिक्षु का चोला पहने 53 वर्षीय देवाशीष डे पिछले 23 सालों से दुनिया भर में मानव प्रेम व अहिंसा की अलख जगाते घूम रहे हैं। 1991 से लेकर अब तक 151 देशों का भ्रमण कर चुके डे ने कहा कि विदेशों में भारतीय अध्यात्म व पुरातन संस्कृति का जलवा है।
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भारत की छवि बहुत अच्छी है। वे तिब्बत के प्रति लोगों का समर्थन जुटाने और विश्व को अहिंसा व मानव प्रेम का संदेश देने निकले हैं। उनका सपना है कि वे तिब्बत को आजाद देखकर ही इस दुनिया से विदा लें। उन्होंने मूल्यों की राजनीति समाप्त होने और टीवी व इंटरनेट से भावी पीढ़ी को होने वाले नुकसान पर भी चिंता जताई।
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भ्रमण के दौरान देर शाम राजस्थान से रेवाड़ी के रास्ते दिल्ली की ओर जा रहे डे रेवाड़ी स्टेशन पर उतरकर लायंस क्लब के प्रधान रजनीकांत सैनी से मिले और उनसे अमर उजाला से बातचीत करने की इच्छा जताई। अमर उजाला के प्रति खासा प्रेम रखने वाले डे ने संवाददाता को बताया कि विश्व भ्रमण के 21 साल पूरे होने पर अमर उजाला ने ही उन्हें रोमानिया निवासी उनकी पत्नी के साथ शिमला में सम्मानित किया था।
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मई 2013 में भारत लौटे डे ने बताया कि 1991 से 95 तक उन्होंने देश भर का भ्रमण करने के बाद 1995 से 2003 तक विश्व के अनेक देशों में प्रेम व अहिंसा का संदेश देते हुए तिब्ब्त के प्रति समर्थन जुटाया। एक वर्ष देश में रहने के बाद फिर 2004 में विश्व भ्रमण के लिए निकले और इन दिनों भारत के विभिन्न स्थानों का दौरा कर रहे हैं। स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी व मदर टेरेसा उनके प्रेरणास्त्रोत रहे हैं।

1962 में कोलकाता में जन्मे डे ने कहा कि 151 देशों ने उन्हें वीजा दिया और वे अपना संदेश देने में सफल रहे, यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। उनके परिवार में रोमानियन पत्नी फौरनटीना लीझू के अलावा कोई नहीं है। उनकी पत्नी भी रोमानिया में रहकर 110 अपंग बच्चों को पाल रही है।

इस दंपति का लक्ष्य सभी को मानव प्रेम का संदेश देना है। युवा पीढ़ी भारतीय मूल्यों को अपनाए तो भारत तेजी से शक्तिशाली देश बन सकता है। स्वर्गीय इंदिरा गांधी, पूर्व उप राष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी व पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी में उन्हें देश के प्रति कुछ करने की ललक दिखी।


जब उनसे मोदी के बारे में पूछा गया तो, उन्होंने कहा कि उनकी नजर में मोदी का विजन स्पष्ट नहीं है। अरविंद केजरीवाल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी उन्हें अपने आप को साबित करना होगा।  

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