सफलता का मंत्र: यूपीएससी में 76वीं रैंक पाने वाले राहुल देव बूरा ने साझा किए अनुभव, कहा- प्रतिबद्धता ने बनाया आईएएस
हिसार के गांव घिराय निवासी 23 वर्षीय राहुल अमर उजाला कार्यालय पहुंचे और आईएएस के सपने को पूरा करने के बीच आई चुनौतियों और अपने अनुभव के बारे में विस्तार से बातचीत की।
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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की लिखित परीक्षाओं में ज्ञान को परखा जाता है, लेकिन साक्षात्कार ज्ञान का नहीं, व्यक्तित्व का होता है। पिछली बार जब मैं साक्षात्कार में गया था, तब हीरोपंती दिखाई। इस बार ईमानदारी, सच्चाई और प्रतिबद्धता ने मुझे आईएएस बनाया। यह कहना है यूपीएससी परीक्षा परिणाम में देशभर में 76वीं रैंक हासिल करने वाले हिसार के जवाहर नगर निवासी राहुल देव बूरा का। मूलत: हिसार के गांव घिराय निवासी 23 वर्षीय राहुल अमर उजाला कार्यालय पहुंचे और आईएएस के सपने को पूरा करने के बीच आई चुनौतियों और अपने अनुभव के बारे में विस्तार से बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
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सवाल : पिछली बार भी आप साक्षात्कार तक पहुंचे थे, लेकिन सफलता नहीं मिली थी। क्या कारण रहे?
उत्तर : पिछली बार मैं ज्ञान के साथ साक्षात्कार में गया था। करेंट अफेयर पढ़ा था, लेकिन असल साक्षात्कार व्यक्तित्व का था। मैं कॉलेज से पासआउट ही हुआ था। तब साक्षात्कार में पूछा गया कि आपने कौन सी किताबें पढ़ी हैं। मैंने हीरोपंती दिखाते हुए कहा कि सिलेबस के अलावा पुस्तकें पढ़ने का समय नहीं होता। तब उन्होंने मुझसे कहा कि यूट्यूब, व्हाट्सएप के लिए समय होता है और पुस्तकों के लिए नहीं। उन्हें पता चल गया था कि मैं बहाने बना रहा हूं।
सवाल : साक्षात्कार में इस बार सफलता मिली, आपने पिछली बार की अपेक्षा क्या बदलाव किए?
उत्तर : पहली बार के साक्षात्कार से पता चल गया था कि केवल किताबी ज्ञान काम नहीं आता। आपका व्यावहारिक ज्ञान, विवेचनात्मक व विश्लेषणात्मक ज्ञान और वैचारिक क्षमता का बेहतर होना जरूरी है। मैंने इसी पर फोकस किया। मैं सच्चाई और स्पष्टता को व्यवहार में लाया। मैंने हर जवाब बिना झिझक के बड़ी साफगोई से दिया। मेरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा ने मुझे सफलता दिलाई। मैंने खुद से बहुत सारे सवाल बनाए थे, उन्हीं के अनुसार तैयारी की।
सवाल : कौन से विशेष सवाल और आपके जवाब थे, जो प्रभावशाली रहे?
उत्तर : मुझसे पूछा गया कि फ्रांस गए थे तो वहां की कोई यादगार बात बताओ। मुझे जो वहां अच्छा लगा वह था वहां की सोसायटी और संस्कृति। स्कूली शिक्षा से लेकर उच्चतर शिक्षा तक अपने ही फ्रेंच समाज, संस्कृति, भाषा को बढ़ावा दिया जाता है। डांस, एजूकेशन, फूड, टूर हर जगह वहां का कल्चर दिखता है। जबकि भारत में फ्रांस से अधिक विविधता है, लेकिन हम बंटे हुए हैं। भारत को फ्रांस से सीखना होगा। दूसरा, वहां लोग मूल कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। पार्टी करने जाएंगे तो कचरा डालने के लिए बैग साथ लेकर जाएंगे। 30 सेकंड से अधिक बस लेट नहीं होती। हमारे भारत में सिविक वेल्यू केवल किताबों में है, इसे व्यवहार में लाना होगा।
सवाल : फ्रांस से सीखकर यहां आकर क्या किया, इस सवाल पर आपका क्या जवाब रहा?
उत्तर : मैंने स्पष्टता से जवाब दिया कि मैंने कुछ बड़ा नहीं किया। हां, भाई के साथ चर्चा जरूर करता था कि हमारे यहां बदलाव की जरूरत है और कैसे-कैसे किए जा सकते हैं। मुझसे मेरे गांव के बारे में पूछा गया कि क्या खास है गांव में। मैंने स्कूलों और खेल सुविधाओं का जिक्र और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का जिक्र किया। वे प्रभावित हुए और पूछा कि आपका गांव आदर्श गांव है। मैंने कहा कि बहुत सारी त्रुटियां हैं, जो दूर करने की जरूरत है। कोई गांव आदर्श नहीं हो सकता।
सवाल : हरियाणा में सेवा देने का मौका मिला तो पहले 3 काम कौन से करेंगे?
उत्तर : सबसे पहले पर्यावरण। अधिक से अधिक पौधरोपण करने और जल बचाने की आवश्यता है। दूसरा, महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देना। हालांकि खेल व शिक्षा में कुछ रोल मॉडल निकल रही हैं, लेकिन अमीर लोग ही बेटियों व महिलाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। समाज बदले और महिलाओं को आगे बढ़ाए। दहेज प्रथा खत्म हो। लड़की ही क्यों लड़कों को भी खाना पकाना सिखाया जाए। तीसरा है कृषि। कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्द्धन करने की आवश्यकता है, ताकि किसानों की आय बढ़े। संस्थानों की तकनीक किसानों तक नहीं पहुंच रही।
सवाल : आप खिलाड़ी हैं, खेल का साक्षात्कार में क्या वेटेज मिला?
उत्तर : खेल कटु संबंधों को समाप्त करता है। नेतृत्व क्षमता, टीम वर्क, आत्मविश्वास, क्रेजी नेचर खेल से सीखी जाती हैं। ये चीजें साक्षात्कार में काम आईं।
सवाल : युवा यूपीएससी की तैयारी कैसे करें?
उत्तर : 10 अक्तूबर को प्री-एग्जाम है। जितना हो सके शॉर्ट नोट को रिवाइज करें। परीक्षा में पहले राउंड में वह सवाल करें जो आते हैं। दूसरे राउंड में आपका दिमाग तेज चलेगा और आप तेजी से सोच पाओगे। मेन्स एग्जाम में समय की दिक्कत होती है। 3 घंटे में 20 सवालों का जवाब 50 पेजों की शीट पर लिखना होता है। यह चुनौतीपूर्ण है। हमें कई बार पहले अभ्यास करना होगा। महत्वपूर्ण प्वाइंट बनाएं और अंडरलाइन करें।
सवाल : आईएएस बनकर कैसा महसूस हो रहा है। क्या यह आपका सपना था?
जवाब : पावर तो बिलकुल नहीं। मुझे जिम्मेदारी का अहसास हो रहा है, जो मुझे अच्छी लगती है। मुश्किल कार्यों को करने में मजा आता है। आईएएस का सपना मेरे पिता और दादा का था। मैंने 2019 में बीटेक अंतिम वर्ष में ही इस सपने को पूरा करने की प्रतिबद्धता ली थी और 2021 में इसे पूरा कर दिखाया।
सवाल : आपके रोल मॉडल कौन हैं?
उत्तर : एक नहीं, बहुत सारे हैं। पिता, जिन्होंने महिला शिक्षा को बढ़ावा दिया। मेरी मां को पढ़ाया और वह आज संस्कृत अध्यापिका हैं। मेरे दादा का समर्पण, जो पढ़ने के लिए दूर-दूर तक जाते थे। जब शिक्षा को महत्व नहीं दिया जाता था, उन्होंने दूरदर्शिता दिखाई और मेरे पिता को पढ़ाया। मेरी सफलता मेरी दादी को समर्पित है, जो पहली बार के साक्षात्कार के दौरान गुजर गई थीं।