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प्रदेश के तीन हजार भट्ठों पर लटकी तलवार

Mon, 30 Sep 2013 11:17 PM IST
भिवानी/ब्यूरो
भिवानी/ब्यूरो Updated Mon, 30 Sep 2013 11:17 PM IST
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three thousand State kilns sword hangs
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से देशभर में पर्यावरण विभाग की अनुमति के बिना मिट्टी नहीं खोदने के आदेश के बाद प्रदेश के भट्ठा उद्योग पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
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हरियाणा में करीब तीन हजार ईंट भट्ठे काम कर रहे हैं। इस आदेश के बाद भट्ठा मालिकों में हड़कंप मच गया है। वहीं, इससे छह लाख मजदूरों पर रोजी-रोटी का भी संकट खड़ा हो जाएगा।
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दो दिन पहले एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के पिछले दिनों आए फैसले पर अमल करने के आदेश दिए हैं।

उत्तर प्रदेश में सर्वोच्च न्यायालय के  आदेशों के चलते ट्रिब्यूनल के समक्ष एक याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने सभी प्रदेश और केंद्र शासित सरकारों को मिट्टी निकालने संबंधी नियम सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
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गौरतलब है कि गत वर्ष सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जमीन से रेत और मिट्टी निकालने पर रोक लगा दी गई थी। न्यायालय ने निर्देश दिए थे कि पर्यावरण की अनुमति के बिना रेत निकालना गैर-कानूनी होगा।

प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर अमल करते हुए प्रदेश में रेत निकालने पर रोक लगा दी थी।

यहां तक कि सड़कों पर रेत डालने वाले कई डंपर भी जब्त कर लिए थे। सरकार क ी सख्ती के बाद प्रदेश भर में भट्ठा उद्योग ठप्प हो गया था, जिससे ईंटों की दाम भी आसमान छूने लगे थे।


प्रदेश सरकार ने हालात की गंभीरता को भंापते हुए नवंबर माह में नोटिफिकेशन जारी करके भट्ठों के संचालन पर लगी रोेक हटा ली थी।

बावजूद इसके  ईंटों के दाम कम नहीं हुए। अब एकबार फिर से ट्रिब्यूनल के फैसले ने भट्ठा उद्योग में अनिश्चितता पैदा कर दी है।

यह माना जा रहा है इससे निर्माण कार्य प्रभावित होंगे। उधर, अब तक 5500 रुपये में बिक रर्ही ईंट लगभग 1500 रुपये प्रति हजार महंगी हो जाएगी।

प्रक्रिया आसान करे सरकार
मानहेरू भट्ठा मार्केट के प्रधान वेद प्रकाश एवं भिवानी भट्टा एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सुंदर सिंह ने कहा कि ट्रिब्यूनल के फैसले से भट्ठा उद्योग पर विपरीत असर पडे़गा।

पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र वाले भट्ठे केंद्र के अधीन आते हैं। इसके अलावा एक से दूसरे ईंट भट्ठे के बीच की दूरी कम से कम 500 मीटर निर्धारित है।

हरियाणा सरकार हस्तक्षेप कर पांच एकड़ तक के भट्ठे अपने पास रखे और भट्ठों के बीच की दूरी भी कम की जाए।

इसके अलावा पर्यावरण विभाग की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि एनओसी लेते समय तीन से चार माह का समय लग जाता है। उसे सरल किया जाए।

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