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जल्द पहुंचने के चक्कर में युवकों ने गंवाई जान

Sun, 29 Aug 2021 01:29 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 29 Aug 2021 01:29 AM IST
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Youths lost their lives in the process of reaching early
मां के आंचल तले, हिम्मत के दीये जले... मुरथल के पास बहालगढ़ फ्लाईओवर पर हुए सड़क हादसे में विकास नाम - फोटो : Sonipat
रविंद्र कौशिक
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बहालगढ़ फ्लाईओवर पर जान गंवाने वाले दोनों दोस्त अपने साथियों के साथ मुरथल पराठे खाने के लिए निकले थे, लेकिन जल्द पहुंचने के चक्कर में उनकी कार अनियंत्रित हो डिवाइडर से टकराकर पलट गई। उन्हें क्या पता था कि मुरथल के सुखदेव ढाबे पर पहुंचने से पहले ही हादसे में उनकी जिंदगी ही चली जाएगी।
नेशनल हाईवे पर मुरथल क्षेत्र में बने ढाबे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में मशहूर हैं। यही वजह है कि यहां प्रतिदिन 40 हजार से अधिक लोग खाना खाने के लिए पहुंचते हैं। इनमें दिल्ली के युवाओं की संख्या सबसे अधिक हैं।
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दिल्ली से सिर्फ 30 किलोमीटर दूर स्थित मुरथल के ढाबे दिल्ली वालों के बीच काफी मशहूर हैं। यही वजह है कि यहां प्रतिदिन 50 हजार से अधिक लोग खाना खाने के लिए पहुंचते हैं। दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर मुरथल के ढाबे अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।
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12 तरह के पराठों के लिए मशहूर हैं मुरथल के ढाबे
दिल्ली से घंटाभर की ड्राइव कर यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां के ढाबे 12 तरह के पराठों के लिए मशहूर हैं। हालांकि यहां दर्जनों प्रकार की अन्य डिश भी तैयार की जाती हैं। जिसके चलते अकसर देर रात या वीकेंड पर दिल्ली और एनसीआर के लोग ढाबे पर किफायती दाम में दाल-पराठे खाने के लिए आते हैं।
1960 में हुई थी मुरथल के ढाबों की शुरुआत
मुरथल के ढाबों की शुरुआत वर्ष 1960 में हुई थी। ट्रेडिशनल ढाबों के रूप में शुरू हुए ये ढाबे अब अलग ही पहचान बना चुके हैं। ढाबे पर रोजाना गाड़ियों की लंबी लाइन लगी रहती है। यहां खाना खाने की चाहत में दिल्ली के लोग रात को ही यहां के लिए निकलते हैं। ऐसे में कई बार वे हादसों का शिकार हो जाते हैं।
रात को पार्टी करने के बाद मुरथल पराठे खाने आ रहे सात साथी
बहालगढ़ फ्लाईओवर पर हादसे का शिकार हुए सभी सातों साथी रात को एक साथ थे। बबलू व अन्य साथी डीजे का काम करते थे। रात को उनका दोस्त नवीन भी अपनी कार लेकर उनके साथ आ गया था। देर रात तक पार्टी करने के बाद तड़के उन्होंने मुरथल स्थित सुखदेव ढाबे पर आकर पराठे खाने का कार्यक्रम बनाया था। हालांकि इससे पहले कि वे मुरथल पहुंचकर पराठे खा पाते, हादसे ने दो साथियों की जिंदगी को ही लील लिया। दो अन्य की हालत भी गंभीर बनी हुई है।
मुरथल के ढाबों पर आने के लिए पहले हो चुके ये हादसे
23 अगस्त, 2020 मुरथल के पास कार डिवाइडर से टकराने के चलते दिल्ली के रोहिणी निवासी तुषार गुप्ता, जीटीके डिपो की मेघा खत्री, रोहिणी का वैभव व शुभम शर्मा काल का ग्रास बने थे।
4 जुलाई, 2020 को दिल्ली के रोहिणी से मुरथल ढाबे पर जाते समय बहालगढ़ के पास दिल्ली के रिठाला के रहने वाले राजीव, तुषार और रिया की मौत हो गई थी, जबकि ललित घायल हो गया था। सभी ढाबे पर खाना खाने आ रहे थे।

7 जनवरी, 2018 को दिल्ली से मुरथल आ रहे चार दोस्तों की सिंघु बॉर्डर के पास हुए हादसे में जान चली गई थी।
1 जनवरी, 2018 को नए वर्ष की शुरुआत में मुरथल जश्न मनाने आए नई दिल्ली की कैलाशपुरी कॉलोनी निवासी नितेश और रिंकेश की जान चली गई थी। इसी दिन देर रात कुंडली के पास दिल्ली स्थित पालम कॉलोनी निवासी सुदीप (31) की हादसे में मौत हो गई थी। वह भी मुरथल के ढाबे पर खाना खाने के बाद अपने घर लौट रहा था। संवाद
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