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Sonipat News: यमुना का जलस्तर बढ़ा, तीन गांवों के लोगों की धड़कनें
Sun, 31 Aug 2025 02:08 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 31 Aug 2025 02:08 AM IST
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फोटो : 31: सोनीपत में खेतों के बराबर चल यमुना का पानी। संवाद
- फोटो : mathura
मुरथल। यमुना का जलस्तर बढ़ने के बाद एक बार फिर नदी के किनारे के गांवों के किसानों की परेशानी बढ़ गई। दो दिन के भीतर हथिनी कुंड से 82 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने केे बाद यमुना उफान पर है। इसकी वजह से यमुना का जलस्तर भंडार में 6 फीट तक बढ़ गया है। पहले ही नदी के किनारे के गांवों में बाढ़ की वजह से फसल बर्बाद हो गई है। अब खेतों का कटान हो रहा है।
जिले में गन्नौर से दिल्ली बॉर्डर तक यमुना नदी के किराने करीब 30 गांव हैं। हर साल यमुना में आने वाली बाढ़ से किसानों को भारी नुकसान होता है। इस साल दूसरी बार यमुना का जलस्तर बढ़ा है। नदी के किनारे के खेतों में धान, सब्जी, पशुचारा, बाजरे की फसलें पूरी तरह से चौपट हो गईं।
सिंचाई विभाग के उपमंडल अभियंता दीपक शर्मा ने खतरे को लेकर आगाह करते हुए बताया कि शुक्रवार की रात 82 हजार क्यूसेक तक पानी पहुंच गया था। इसकी वजह से फसलें भी प्रभावित हुई हैं। हालांकि, अब पानी कम होने लगा है मगर नदी के किनारे के गांवों में सतर्कता बरतने की जरूरत है।
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प्रशासन की ओर से बाढ़ राहत कार्य को लेकर बाढ़ चौकियों का गठन किया गया है, जहां से पल पल की अपडेट कंट्रोल रूम को दर्ज करायी जा रही है। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि पानी घट रहा है। किसी भी गांवों में पानी घुसने की कोई संभावना नहीं है। गांव बख्तारवरपुर, गढ़ी, मंहदीपुर, जैनपुर, गड्डी, टिकौला के बाशिंदों का कहना है कि हर साल बाढ़ में उनकी फसलें चौपत हो जाती हैं,लेकिन इसके बाद भी प्रशासन ने ठोकरें नहीं बनवाई हैं। यही हालत रही तो उनके खेत यमुना में समा जाएंगे।
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जिले में गन्नौर से दिल्ली बॉर्डर तक यमुना नदी के किराने करीब 30 गांव हैं। हर साल यमुना में आने वाली बाढ़ से किसानों को भारी नुकसान होता है। इस साल दूसरी बार यमुना का जलस्तर बढ़ा है। नदी के किनारे के खेतों में धान, सब्जी, पशुचारा, बाजरे की फसलें पूरी तरह से चौपट हो गईं।
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सिंचाई विभाग के उपमंडल अभियंता दीपक शर्मा ने खतरे को लेकर आगाह करते हुए बताया कि शुक्रवार की रात 82 हजार क्यूसेक तक पानी पहुंच गया था। इसकी वजह से फसलें भी प्रभावित हुई हैं। हालांकि, अब पानी कम होने लगा है मगर नदी के किनारे के गांवों में सतर्कता बरतने की जरूरत है।
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प्रशासन की ओर से बाढ़ राहत कार्य को लेकर बाढ़ चौकियों का गठन किया गया है, जहां से पल पल की अपडेट कंट्रोल रूम को दर्ज करायी जा रही है। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि पानी घट रहा है। किसी भी गांवों में पानी घुसने की कोई संभावना नहीं है। गांव बख्तारवरपुर, गढ़ी, मंहदीपुर, जैनपुर, गड्डी, टिकौला के बाशिंदों का कहना है कि हर साल बाढ़ में उनकी फसलें चौपत हो जाती हैं,लेकिन इसके बाद भी प्रशासन ने ठोकरें नहीं बनवाई हैं। यही हालत रही तो उनके खेत यमुना में समा जाएंगे।

फोटो : 31: सोनीपत में खेतों के बराबर चल यमुना का पानी। संवाद- फोटो : mathura