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Sonipat News: चिंताजनक...66 फीसदी महिलाओं में खून की कमी
Sat, 24 Jan 2026 02:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 24 Jan 2026 02:04 AM IST
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फोटो 04: सोनीपत में लगाए गए स्वास्थ्य जांच शिविर में हीमोग्लोबिन जांच कराने पहुंची महिलाएं। स्
सोनीपत। पौष्टिक खुराक न मिलने के कारण जिले में 66 फीसदी महिलाओं में खून की कमी पाई गई है। यह खुलासा एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत की गई हीमोग्लोबिन जांच में हुआ है। यह गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
ऐसी महिलाओं को डॉक्टर प्रोटीन युक्त भोजन लेने और समय पर उपचार कराने की सलाह दे रहे हैं। क्योंकि एनीमिया ग्रसित महिलाओं से जन्मे बच्चे भी स्वस्थ नहीं होते। प्रसव के दौरान मां और नवजात की जान पर भी बन आती है।
गर्भवती महिलाओं में खून की कमी स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती है। इससे समय से पहले बच्चों का जन्म हो रहा है। जिस गर्भवती में रक्त की मात्रा आठ ग्राम से भी कम होती है तो समय से पहले बच्चा पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है।
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महिलाओं को किया जाता है जागरूक
एनीमिया के खिलाफ जागरूक करने के लिए हर माह नौ तारीख को प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी व पीएचसी में कैंप लगाए जाते हैं। प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वस्थ नारी स्वस्थ परिवार के तहत 17 सितंबर 2025 से हीमोग्लोबिन जांच शुरु हुई थी। 15 दिन तक चले एनीमिया मुक्त अभियान को स्वास्थ्य विभाग 10 दिसंबर 2025 तक बढ़ाया गया। इस अभियान के तहत प्रदेश में सबसे ज्यादा 49,017 लोगों की जांच हुई थी। इसमें गर्भवती की संख्या 7276 रही और 0-6 माह के बच्चों को स्तनपान कराने वाली महिलाओं की संख्या 3576 रही है। विभाग की ओर से महिलाओं को खून बढ़ाने के लिए आयरन की टेबलेट उपलब्ध कराई जा रही हैं।
एनीमिया की भयावह तस्वीर
विभाग की रिपोर्ट अनुसार जिले में 20-49 वर्ष आयु वर्ग की कुल 66.2 फीसदी महिलाएं खून की कमी से जूझ रहीं हैं। इसी आयु वर्ग की 49.5 फीसदी गर्भवती महिलाएं और 68.2 फीसदी स्तनपान कराने वाली महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं। बात अगर बच्चों की करें तो जिले में छह से 59 माह के 27.3 फीसदी बच्चे इस समस्या से जूझ रहे हैं।
जागरूकता की कमी से बढ़ी समस्या
एनीमिया की प्रमुख वजह जागरूकता का अभाव है। लोगों को पता ही नहीं होता कि उनको किस विटामिन की जरूरत है। इस कारण लोग संतुलित भोजन नहीं लेते और खून की कमी से ग्रसित हो जाते हैं। बच्चों और महिलाओं में खून की कमी का सबसे बड़ा कारण अव्यवस्थित दिनचर्या और असंतुलित खानपान है। इसके अलावा गंदगी के कारण बच्चों के पेट में कीड़े हो जाते हैं, जिससे उनके अंदर खून की कमी हो जाती है।
एनीमिया दूर करने वाले आहार
चुकंदर, सलाद, हरी सब्जी, ब्रोकोली, पत्तागोभी, गोभी, शलजम और शकरकंद जैसी सब्जियां और खजूर, तरबूज, सेब, अंगूर, और अनार आदि फल सेहत के लिए अच्छी होते हैं। इसके अलावा सूखे मेवे खजूर, गुड़, चना, साबुत दाल, फोर्टिफाइड आटा, तेल, बादाम और किशमिश, अखरोट आदि का सेवन करना चाहिए।
भोजन में पोषक तत्वों की कमी महिलाओं को एनीमिक बना देती है। महिलाओं में हिमोग्लोबिन 12 ग्राम होना चाहिए जबकि पुरुषों में 13.5 ग्राम होना चाहिए। गर्भावस्था में महिलाओं को आयरन, विटामिन, मिनरल की जरूरत होती है। गर्भावस्था के दौरान खून की कमी से समय से पहले प्रसव दर्द, शिशु का कम वजन या कभी कभार मौत भी हो जाती है।
- डॉ. पुष्पा पूनिया, प्रसूति रोग विशेषज्ञ
सरकार की ओर से जारी सूची के मुताबिक जिले की 66 फीसदी महिलाओं में खून की कमी मिली है। सबसे बड़ा कारण महिलाएं प्रसव के बाद आयरन की गोलियां खाना बंद कर देती हैं। प्रसव के बाद भी महिलाओं को छह माह तक आयरन की गोलियां लेनी चाहिए।
- डॉ. जितेंद्र, नोडल अधिकारी, मातृत्व स्वास्थ्य अभियान
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ऐसी महिलाओं को डॉक्टर प्रोटीन युक्त भोजन लेने और समय पर उपचार कराने की सलाह दे रहे हैं। क्योंकि एनीमिया ग्रसित महिलाओं से जन्मे बच्चे भी स्वस्थ नहीं होते। प्रसव के दौरान मां और नवजात की जान पर भी बन आती है।
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गर्भवती महिलाओं में खून की कमी स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती है। इससे समय से पहले बच्चों का जन्म हो रहा है। जिस गर्भवती में रक्त की मात्रा आठ ग्राम से भी कम होती है तो समय से पहले बच्चा पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है।
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महिलाओं को किया जाता है जागरूक
एनीमिया के खिलाफ जागरूक करने के लिए हर माह नौ तारीख को प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी व पीएचसी में कैंप लगाए जाते हैं। प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वस्थ नारी स्वस्थ परिवार के तहत 17 सितंबर 2025 से हीमोग्लोबिन जांच शुरु हुई थी। 15 दिन तक चले एनीमिया मुक्त अभियान को स्वास्थ्य विभाग 10 दिसंबर 2025 तक बढ़ाया गया। इस अभियान के तहत प्रदेश में सबसे ज्यादा 49,017 लोगों की जांच हुई थी। इसमें गर्भवती की संख्या 7276 रही और 0-6 माह के बच्चों को स्तनपान कराने वाली महिलाओं की संख्या 3576 रही है। विभाग की ओर से महिलाओं को खून बढ़ाने के लिए आयरन की टेबलेट उपलब्ध कराई जा रही हैं।
एनीमिया की भयावह तस्वीर
विभाग की रिपोर्ट अनुसार जिले में 20-49 वर्ष आयु वर्ग की कुल 66.2 फीसदी महिलाएं खून की कमी से जूझ रहीं हैं। इसी आयु वर्ग की 49.5 फीसदी गर्भवती महिलाएं और 68.2 फीसदी स्तनपान कराने वाली महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं। बात अगर बच्चों की करें तो जिले में छह से 59 माह के 27.3 फीसदी बच्चे इस समस्या से जूझ रहे हैं।
जागरूकता की कमी से बढ़ी समस्या
एनीमिया की प्रमुख वजह जागरूकता का अभाव है। लोगों को पता ही नहीं होता कि उनको किस विटामिन की जरूरत है। इस कारण लोग संतुलित भोजन नहीं लेते और खून की कमी से ग्रसित हो जाते हैं। बच्चों और महिलाओं में खून की कमी का सबसे बड़ा कारण अव्यवस्थित दिनचर्या और असंतुलित खानपान है। इसके अलावा गंदगी के कारण बच्चों के पेट में कीड़े हो जाते हैं, जिससे उनके अंदर खून की कमी हो जाती है।
एनीमिया दूर करने वाले आहार
चुकंदर, सलाद, हरी सब्जी, ब्रोकोली, पत्तागोभी, गोभी, शलजम और शकरकंद जैसी सब्जियां और खजूर, तरबूज, सेब, अंगूर, और अनार आदि फल सेहत के लिए अच्छी होते हैं। इसके अलावा सूखे मेवे खजूर, गुड़, चना, साबुत दाल, फोर्टिफाइड आटा, तेल, बादाम और किशमिश, अखरोट आदि का सेवन करना चाहिए।
भोजन में पोषक तत्वों की कमी महिलाओं को एनीमिक बना देती है। महिलाओं में हिमोग्लोबिन 12 ग्राम होना चाहिए जबकि पुरुषों में 13.5 ग्राम होना चाहिए। गर्भावस्था में महिलाओं को आयरन, विटामिन, मिनरल की जरूरत होती है। गर्भावस्था के दौरान खून की कमी से समय से पहले प्रसव दर्द, शिशु का कम वजन या कभी कभार मौत भी हो जाती है।
- डॉ. पुष्पा पूनिया, प्रसूति रोग विशेषज्ञ
सरकार की ओर से जारी सूची के मुताबिक जिले की 66 फीसदी महिलाओं में खून की कमी मिली है। सबसे बड़ा कारण महिलाएं प्रसव के बाद आयरन की गोलियां खाना बंद कर देती हैं। प्रसव के बाद भी महिलाओं को छह माह तक आयरन की गोलियां लेनी चाहिए।
- डॉ. जितेंद्र, नोडल अधिकारी, मातृत्व स्वास्थ्य अभियान