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वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप : धर्मबीर नैन और एकता भ्याण ने जीते रजत, अमित सरोहा की मेहनत लाई रंग
Sun, 05 Oct 2025 09:30 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 05 Oct 2025 09:30 PM IST
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फोटो :35: एकता भ्याण के साथ ओलंपियन अमित सरोहा। स्रोत प्रशिक्षक
सोनीपत। वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में धर्मबीर नैन और एकता भ्याण ने बेहतर प्रदर्शन किया है। भारतीय खेल प्राधिकरण, बहालगढ़ में प्रशिक्षक अमित सरोहा के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया।
अमित के शिष्य गांव भदाना निवासी धर्मबीर नैन ने पुरुष वर्ग के क्लब थ्रो इवेंट में 29.71 मीटर का थ्रो कर रजत पदक अपने नाम किया। हालांकि मामूली अंतर से वह स्वर्ण से चूक गए। इसके बाद उनकी साथी और सरोहा की शिष्या एकता भ्याण ने भी महिलाओं के वर्ग में 19.80 मीटर का थ्रो कर रजत पदक जीतकर भारत की झोली में एक और पदक डाल दिया।
खिलाड़ियों ने जीत का श्रेय कोच को दिया
धर्मबीर नैन और एकता भ्याण दोनों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने प्रशिक्षक अमित सरोहा को दिया। उन्होंने कहा कि अमित सरोहा के मार्गदर्शन में हुए कड़े प्रशिक्षण, अनुशासन और सतत प्रोत्साहन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के लिए तैयार किया।
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प्रशिक्षक अमित सरोहा के लिए ऐतिहासिक पल
भारत में क्लब थ्रो के जनक कहे जाने वाले पैरालंपियन गांव बैंयापुर निवासी अमित सरोहा ने कहा कि यह उनके लिए गर्व का क्षण है। संभवत: यह पहला मौका है जब किसी प्रशिक्षक के दो शिष्यों ने एक ही विश्व चैंपियनशिप में पदक जीते हैं। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि से उन्हें आगे और मेहनत करने की प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा हमारी तैयारियां स्वर्ण पदक की दिशा में थीं। यह रजत पदक भी ऐतिहासिक है, लेकिन अब अगली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दोनों खिलाड़ी मेडल का रंग बदलने के लक्ष्य के साथ उतरेंगे।
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अमित के शिष्य गांव भदाना निवासी धर्मबीर नैन ने पुरुष वर्ग के क्लब थ्रो इवेंट में 29.71 मीटर का थ्रो कर रजत पदक अपने नाम किया। हालांकि मामूली अंतर से वह स्वर्ण से चूक गए। इसके बाद उनकी साथी और सरोहा की शिष्या एकता भ्याण ने भी महिलाओं के वर्ग में 19.80 मीटर का थ्रो कर रजत पदक जीतकर भारत की झोली में एक और पदक डाल दिया।
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खिलाड़ियों ने जीत का श्रेय कोच को दिया
धर्मबीर नैन और एकता भ्याण दोनों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने प्रशिक्षक अमित सरोहा को दिया। उन्होंने कहा कि अमित सरोहा के मार्गदर्शन में हुए कड़े प्रशिक्षण, अनुशासन और सतत प्रोत्साहन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के लिए तैयार किया।
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प्रशिक्षक अमित सरोहा के लिए ऐतिहासिक पल
भारत में क्लब थ्रो के जनक कहे जाने वाले पैरालंपियन गांव बैंयापुर निवासी अमित सरोहा ने कहा कि यह उनके लिए गर्व का क्षण है। संभवत: यह पहला मौका है जब किसी प्रशिक्षक के दो शिष्यों ने एक ही विश्व चैंपियनशिप में पदक जीते हैं। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि से उन्हें आगे और मेहनत करने की प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा हमारी तैयारियां स्वर्ण पदक की दिशा में थीं। यह रजत पदक भी ऐतिहासिक है, लेकिन अब अगली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दोनों खिलाड़ी मेडल का रंग बदलने के लक्ष्य के साथ उतरेंगे।