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विश्व हीमोफीलिया दिवस: जिला नागरिक अस्पताल में पांच माह से फैक्टर 8 खत्म

Thu, 17 Apr 2025 01:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Thu, 17 Apr 2025 01:24 AM IST
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World Hemophilia Day: Factor 8 out of stock in district civil hospital since last five monthsWorld Hemophilia Day: Factor 8 out of stock in district civil hospital since last five months
फोटो 13: सोनीपत के बहालगढ़ रोड ​स्थित जिला नागरिक अस्पताल। संवाद
सोनीपत। जिला नागरिक अस्पताल में पांच माह से फैक्टर-8 खत्म है। इसकी वजह से फैक्टर-8 लगवाने के लिए हीमोफीलिया के मरीजों को रोहतक, चंडीगढ़ व दिल्ली के अस्पतालों में भागदौड़ करनी पड़ रही है। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीज को फैक्टर 8-9 इंजेक्शन बेहद जरूरी होता है। क्योंकि मरीज को चोट लग जाए तो रक्त स्राव रोकना मुश्किल होता है। इसके लिए इन मरीजों को फैक्टर 8, 9 के इंजेक्शन लगाए जाते हैं।
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हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें खुद रक्त बहना शुरू हो जाता है। हीमोफीलिया के मरीजों को जिला नागरिक अस्पताल के आपातकालीन में इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। सप्ताह में लगभग एक से दो बार जाना पड़ता है। रक्त बहने पर आपातकालीन विभाग में ही हीमोफीलिया के रोगियों को जीवनरक्षक टीका यानी फैक्टर इंजेक्शन लगाया जाता है। पांच माह से अस्पताल में फैक्टर-8 न होने के कारण मरीजों को परेशानी हो रही है। फैक्टर न मिलने से मरीजों को दर्द सहन नहीं हो रहा।
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जिला में हीमोफीलिया के 54 मरीज पंजीकृत हैं। इसमें 90 फीसदी से ज्यादा मरीज फैक्टर-8 के हैं। उन्हें समय-समय पर अस्पताल पहुंचकर हीमोफीलिया की दवा लेने के साथ ही इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। मेडिकल हिस्ट्री के मुताबिक उन्हें डोज दी जाती है। सरकारी स्तर पर यह इंजेक्शन मरीजों को मुफ्त लगाए जाते हैं। अगर बाजार से यह इंजेक्शन लगाए जाएं तो बहुत महंगे पड़ते हैं। बाजार में इंजेक्शन की एक डोज लगभग 12 हजार रुपये में उपलब्ध है। एक डोज में चार इंजेक्शन होते हैं। इससे एक सप्ताह का काम चल जाता है। जिला अस्पताल में फैक्टर की कमी है। इलाज के लिए पहुंच रहे पीड़ितों को रेफर करना पड़ रहा है। आशंका जताई कि अगर कोई पीड़ित गंभीर हादसे का शिकार हो जाए तो उसकी जान बचाना मुश्किल होगा।
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अस्पताल में हीमोफीलिया के फैक्टर की खरीद करने के लिए डिमांड भेजी गई है। मुख्यालय से मंंजूरी मिलने के बाद फैक्टर की खरीद की जाएगी। उसके बाद हीमोफीलिया के मरीजों को फैक्टर लगाने शुरू कर दिए जाएंगे।

- डाॅ. नीरज यादव, उप सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग
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