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Sonipat News: जो बोले सो निहाल, सतश्री अकाल का किया उद्घोष
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फोटो 44. सोनीपत शहर में निकाले गए नगर कीर्तन के दौरान पंज प्यारों का फूल बरसाकर स्वागत करते गुर
सोनीपत। बैसाखी पर्व और खालसा पंथ साजना दिवस की उपलक्ष्य में वीरवार को नगर कीर्तन निकाला गया। नगर कीर्तन की शुरुआत गुरुद्वारा गुरु कलगीधर सिंह सभा मॉडल टाउन से की गई। इस दौरान समूचा क्षेत्र ‘जो बोले सो निहाल, सतश्री अकाल के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। नगर कीर्तन गुरुद्वारा साहिब गीता भवन, गुरुद्वारा साहिब हेम नगर से गुरुद्वारा साहिब सेक्टर-15, विवेकानंद चौक, ओल्ड डीसी रोड, जीवन नगर से होते हुए वापस गुरुद्वारा साहिब पहुंचा।
नगर कीर्तन के साथ चल रही गतका पार्टी ने अपने करतब दिखाए। गुरुग्रंथ साहिब के पाठ के बाद पंज प्यारों के साथ गुरुद्वारे तक कीर्तन निकाला। शहर में लोगों ने रास्ते भर पुष्प वर्षा कर पंज प्यारों को सरोपे भेंटकर स्वागत किया। साथ ही गुरु ग्रंथ साहिब के सामने सभी ने माथा टेक कर आशीर्वाद लिया। नगर कीर्तन में सभी गुरुद्वारा साहिब की प्रबंधन कमेटी और साध संगत ने हिस्सा लिया और खालसा की महिमा का गुणगान किया। प्रबंधन कमेटी के पदाधिकारियों ने संगत को बैसाखी पर्व की बधाई देते हुए गुरु के बताए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
प्रभमीत सिंह ने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह ने वर्ष 1699 में पंजप्यारों को अमृतपान करवाया। इसके बाद खुद पंज प्यारों से अमृतपान किया और इस तरह खालसा का जन्म हुआ। इस दौरान प्रबंधक कमेटी के सदस्य मंजीत सिंह, हरदीप सिंह सूरी, जगमोहन बरारा, अजीत सिंह भाटिया, तरसेम सिंह, प्रभमीत सिंह, चरणजीत सिंह भी मौजूद रहे।
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नगर कीर्तन के साथ चल रही गतका पार्टी ने अपने करतब दिखाए। गुरुग्रंथ साहिब के पाठ के बाद पंज प्यारों के साथ गुरुद्वारे तक कीर्तन निकाला। शहर में लोगों ने रास्ते भर पुष्प वर्षा कर पंज प्यारों को सरोपे भेंटकर स्वागत किया। साथ ही गुरु ग्रंथ साहिब के सामने सभी ने माथा टेक कर आशीर्वाद लिया। नगर कीर्तन में सभी गुरुद्वारा साहिब की प्रबंधन कमेटी और साध संगत ने हिस्सा लिया और खालसा की महिमा का गुणगान किया। प्रबंधन कमेटी के पदाधिकारियों ने संगत को बैसाखी पर्व की बधाई देते हुए गुरु के बताए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
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प्रभमीत सिंह ने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह ने वर्ष 1699 में पंजप्यारों को अमृतपान करवाया। इसके बाद खुद पंज प्यारों से अमृतपान किया और इस तरह खालसा का जन्म हुआ। इस दौरान प्रबंधक कमेटी के सदस्य मंजीत सिंह, हरदीप सिंह सूरी, जगमोहन बरारा, अजीत सिंह भाटिया, तरसेम सिंह, प्रभमीत सिंह, चरणजीत सिंह भी मौजूद रहे।
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