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सभी जीवों के साथ रखना चाहिए मैत्री भाव : संजय शास्त्री
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फोटो 20- सोनीपत के गुड़ मंडी स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दश लक्षण महापर्व पर भगवा
सोनीपत। गुड़ मंडी स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण महापर्व का नौवां दिन उत्तम आकिंचन्य धर्म के रूप में मनाया गया। शांतिधारा करने का सौभाग्य सुरेश कुमार, आशीष, अर्हम जैन, मनोज जैन, राजीव जैन, शुभम जैन, शिवम जैन, आगम जैन के परिवार को मिला।
टीकमगढ़ से पंडित संजय शास्त्री ने कहा कि जिसका किसी के प्रति द्वेष नहीं, सभी जीवों के साथ मैत्री भाव है, वह जीवों के प्रति करुणा भाव रखता है। आशीष और सुरेश जैन ने कहा कि ममत्व के परित्याग को आकिंचन्य कहते हैं। आकिंचन्य का अर्थ होता है कि मैं, मेरा कुछ भी नहीं है। अपने कर्म एवं शरीर से भी निर्ममत्व होना ही उत्तम आकिंचन्य धर्म है।
विपिन जैन, मुकेश जैन ने कहा कि आकिंचन्य का मतलब खाली हो जाना। खाली होने से अभिप्राय है कि अंदर बाहर सब तरफ से त्याग करना। मैंने व मेरे का अंतर्मन से त्याग करना ही उत्तम आकिंचन्य धर्म है। कार्यक्रम में अंजू जैन, मधु, शशि, रोशनी, राखी, नूपुर, प्रेरणा, साक्षी, अन्नु, मंजू मौजूद रही।
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टीकमगढ़ से पंडित संजय शास्त्री ने कहा कि जिसका किसी के प्रति द्वेष नहीं, सभी जीवों के साथ मैत्री भाव है, वह जीवों के प्रति करुणा भाव रखता है। आशीष और सुरेश जैन ने कहा कि ममत्व के परित्याग को आकिंचन्य कहते हैं। आकिंचन्य का अर्थ होता है कि मैं, मेरा कुछ भी नहीं है। अपने कर्म एवं शरीर से भी निर्ममत्व होना ही उत्तम आकिंचन्य धर्म है।
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विपिन जैन, मुकेश जैन ने कहा कि आकिंचन्य का मतलब खाली हो जाना। खाली होने से अभिप्राय है कि अंदर बाहर सब तरफ से त्याग करना। मैंने व मेरे का अंतर्मन से त्याग करना ही उत्तम आकिंचन्य धर्म है। कार्यक्रम में अंजू जैन, मधु, शशि, रोशनी, राखी, नूपुर, प्रेरणा, साक्षी, अन्नु, मंजू मौजूद रही।
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