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Sonipat News: एक हत्या से तबाह हुईं दो जिंदगियां...बेटे संग छिन गया दिव्यांग दंपती से एकमात्र सहारा
Fri, 16 Jan 2026 09:58 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 16 Jan 2026 09:58 PM IST
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फोटो :14: सोनू का फाइल फोटो
गन्नौर (सोनीपत)। गांव बेगा के युवक सोनू की हत्या ने परिवार को झकझोर कर रख दिया है। यह एक युवक की जान जाने का मामला नहीं, बल्कि दो दिव्यांग बुजुर्गों के जीवन का सहारा छीनने की दर्दनाक कहानी है। सोनू किसानी कर दिव्यांग माता-पिता की जिम्मेदारी संभाल रहा था और उनके लिए भोजन से दवा तक का प्रबंध कर रहा था।
सोनू उर्फ टीटा के पिता विनोद लकवाग्रस्त होने के कारण वर्ष 2024 से दिव्यांग अवस्था में हैं। वह चारपाई से उठने में भी असमर्थ हैं। किसान पिता की खेती को अब सोनू ही संभाल रहे थे। मां सीता देवी करीब दस साल से आंखों की बीमारी से पीडि़त हैं। उन्हें कम दिखाई देता है और दैनिक कामकाज में भी वह दूसरों पर निर्भर हैं। ऐसे हालात में सोनू ही उनके लिए आंख, हाथ और सहारा थे। वह खेती-बाड़ी कर घर का खर्च चलाते और माता-पिता के भोजन से लेकर दवाइयों तक की पूरी व्यवस्था करते थे।
परिवार सहित गन्नौर में रह रहे बड़े भाई
सोनू के बड़े भाई मोनू का विवाह हो चुका है और वह प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं। वह अपने परिवार के साथ गन्नौर में रह रहे हैं। गांव में माता-पिता के साथ रहने और उनकी देखभाल की पूरी जिम्मेदारी सोनू ने अपने कंधों पर उठा रखी थी। अब सोनू का शव यमुना किनारे बालू (रेत) में दबा मिला है। घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बूढ़े और असहाय माता-पिता सोनू को याद कर आंसू बहा रहे हैं। बार-बार कह रहे-मेरा तो सहारा ही छीन लिया। ऐसी भी क्या दुश्मनी थी। गांव में माहौल शोकपूर्ण बना हुआ है।
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माता-पिता की सेवा में समर्पित था सोनू
ग्रामीण बताते हैं कि सोनू रोजाना खुद भोजन बनाकर माता-पिता को खिलाता था। समय पर दवाइयां देना, डॉक्टर के पास ले जाना और हर जरूरत का ध्यान रखना उसकी दिनचर्या का हिस्सा था। वह खेतों से लौटने के बाद भी मां-बाप की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ता था। हत्या से गांव में आक्रोश है। ग्रामीणों ने सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की है।
रिश्ते की तैयारी से पहले उजड़ गया घर
परिजनों के अनुसार सोनू के रिश्ते की बातचीत भी चल रही थी। चाचा राजेश ने बताया कि सोनू के ताऊ अफ्रीका में रह रहे हैं। वह मार्च में गांव आने वाले थे। उसी दौरान सोनू का रिश्ता तय कर शादी की तैयारी की जानी थी। परिवार में खुशी का माहौल बनने वाला था, लेकिन उससे पहले ही यह दर्दनाक वारदात हो गई और सारे सपने चकनाचूर हो गए।
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सोनू उर्फ टीटा के पिता विनोद लकवाग्रस्त होने के कारण वर्ष 2024 से दिव्यांग अवस्था में हैं। वह चारपाई से उठने में भी असमर्थ हैं। किसान पिता की खेती को अब सोनू ही संभाल रहे थे। मां सीता देवी करीब दस साल से आंखों की बीमारी से पीडि़त हैं। उन्हें कम दिखाई देता है और दैनिक कामकाज में भी वह दूसरों पर निर्भर हैं। ऐसे हालात में सोनू ही उनके लिए आंख, हाथ और सहारा थे। वह खेती-बाड़ी कर घर का खर्च चलाते और माता-पिता के भोजन से लेकर दवाइयों तक की पूरी व्यवस्था करते थे।
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परिवार सहित गन्नौर में रह रहे बड़े भाई
सोनू के बड़े भाई मोनू का विवाह हो चुका है और वह प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं। वह अपने परिवार के साथ गन्नौर में रह रहे हैं। गांव में माता-पिता के साथ रहने और उनकी देखभाल की पूरी जिम्मेदारी सोनू ने अपने कंधों पर उठा रखी थी। अब सोनू का शव यमुना किनारे बालू (रेत) में दबा मिला है। घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बूढ़े और असहाय माता-पिता सोनू को याद कर आंसू बहा रहे हैं। बार-बार कह रहे-मेरा तो सहारा ही छीन लिया। ऐसी भी क्या दुश्मनी थी। गांव में माहौल शोकपूर्ण बना हुआ है।
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माता-पिता की सेवा में समर्पित था सोनू
ग्रामीण बताते हैं कि सोनू रोजाना खुद भोजन बनाकर माता-पिता को खिलाता था। समय पर दवाइयां देना, डॉक्टर के पास ले जाना और हर जरूरत का ध्यान रखना उसकी दिनचर्या का हिस्सा था। वह खेतों से लौटने के बाद भी मां-बाप की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ता था। हत्या से गांव में आक्रोश है। ग्रामीणों ने सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की है।
रिश्ते की तैयारी से पहले उजड़ गया घर
परिजनों के अनुसार सोनू के रिश्ते की बातचीत भी चल रही थी। चाचा राजेश ने बताया कि सोनू के ताऊ अफ्रीका में रह रहे हैं। वह मार्च में गांव आने वाले थे। उसी दौरान सोनू का रिश्ता तय कर शादी की तैयारी की जानी थी। परिवार में खुशी का माहौल बनने वाला था, लेकिन उससे पहले ही यह दर्दनाक वारदात हो गई और सारे सपने चकनाचूर हो गए।