फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   tredition contineue mundeep joind armee

खानदान की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अब सोनीपत का मंदीप बना लेफ्टिनेंट

Tue, 23 Nov 2021 01:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 23 Nov 2021 01:27 AM IST
विज्ञापन
tredition contineue mundeep joind armee
सोनीपत। व्यक्ति कुछ कर गुजरने की ठान लें और लक्ष्य निर्धारित कर उसे पाने के लिए मेहनत करे तो बड़ी से बड़ी बाधा भी आपको मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। ऐसी ही उपलब्धि गोहाना के गांव गुमाणा फिलहाल सोनीपत के पटेल नगर निवासी मंदीप ने प्राप्त की है। कड़ी मेहनत से अपने बचपन के सपने को सच करते हुए सेना में कमीशन हासिल करते हुए वह सीधा लेफ्टिनेंट बन गया है। मंदीप ने लेफ्टिनेंट बनकर न सिर्फ अपने सपनों को पंख दिए, बल्कि अपने खानदान की सेना में जाने की परंपरा को भी आगे बढ़ाया है।
विज्ञापन

मंदीप के दादा रामधारी भी सेना में थे। उनके तीन ताऊ राजपाल, सुभाष व अशोक कुमार भी सेना में अपनी सेवाएं देकर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। यही नहीं मंदीप के पिता रामनिवास भी सेना में सेवाएं देने के बाद अब दिल्ली पुलिस में कार्यरत हैं। बेटे के लेफ्टिनेंट बनने के बाद पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। मंदीप के पिता रामनिवास ने कहा कि आर्मी में अपनी सेवाएं देने की परंपरा उनके खानदान में तीन पीढ़ी से चली आ रही है। मेरे पिता व भाई भी आर्मी में सिपाही पद पर भर्ती होकर सूबेदार पद तक पहुंचे। अब बेटे ने कमिशन लिया और सीधा लेफ्टिनेंट चयनित हुआ। बेटे ने मेरा सपना सच कर दिया। बेटे ने खुशी के जो पल दिए हैं, उनको शब्दों में बयां कर पाना बेहद मुश्किल है।
विज्ञापन

खेलकूद स्कूल राई से प्राप्त की प्रारंभिक शिक्षा
मंदीप के पिता रामनिवास ने बताया कि मंदीप का जन्म 20 सितंबर 1995 को हुआ था। वर्ष 1997 में वह सोनीपत के पटेल नगर की गली नंबर 4 में आकर रहने लगे थे। मंदीप ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मोतीलाल नेहरू खेलकूद स्कूल राई से प्राप्त की। उसके बाद दिल्ली के किरोड़ीमल महाविद्यालय से स्नातक की। आईआईएम कांशीपुर से की। जिसके बाद मंदीप को रिलेक्सो कंपनी में सहायक प्रबंधक की नौकरी मिल गई। वेतन अच्छा था, लेकिन मंदीप बचपन से ही खानदान की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आर्मी में भर्ती होना चाहता था। इसके लिए लगातार सेना की तैयारी में जुटा रहा। वर्ष 2020 में यूपीएसई की परीक्षा पास की। एसएसबी करने के बाद एक साल के लिए ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी चेन्नई गया। जहा 20 नवंबर को पॉसिंग आउट में कमीशन लिया। उन्होंने बताया कि मंदीप ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कभी कोई कोचिंग नहीं ली। मंदीप ने बचपन मेें जो सपना देखा था, उसे सच कर दिखाया।
विज्ञापन
विज्ञापन

खानपुर पीजीआई में नर्सिंग सिस्टर है मां
मंदीप के पिता रामनिवास जहां दिल्ली पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, वहीं उनकी मां कृष्णा खानपुर पीजीआई में नर्सिंग सिस्टर है। बेटे के लेफ्टिनेंट बनने के बाद पॉसिंग परेड का हिस्सा बने माता-पिता ने लाडले के कंधों पर स्टार लगाए। मंदीप की मां कृष्णा ने बताया कि मेरे दो बेटे हैं। मंदीप बड़ा है और संकेत छोटा, जो अभी दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ रहा है। मंदीप शुरू से ही होनहार रहा है। वह शुरू से ही आर्मी में जाना चाहता था। आज हमारा पूरा परिवार बेहद खुश है कि बेटे जो सोचा उसे सच कर दिखाया।

परंपरा के पीछे है कड़ा संघर्ष
मंदीप के पिता रामनिवास बताते हैं कि 1970 में वह कुछ महीने के थे, जब आर्मी से सेवानिवृत्त पिता रामधारी की हृदयाघात से मौत हो गई थी। पिता की मौत के बाद मां शांति देवी ने कड़ा संघर्ष कर हम चारों भाइयों का पालन पोषण किया। मां ने न सिर्फ अच्छी शिक्षा दी, बल्कि ऐसे गुण दिए कि हम अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए देश की सेवा कर सकें। मां की प्रेरणा से हम चारों भाई सेना में भर्ती हुए। उनकी इच्छा थी कि वे अपने पोते को भी आर्मी में देखे, लेकिन उससे पहले ही 31 मई 2021 को उनका देहांत हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed