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प्रशासन प्लॉट पर प्लॉट बेचे जा रहा है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर का पता नहीं
Sonipat
Updated Thu, 14 Jul 2016 12:09 AM IST
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उद्योगपतियों की शिकायतें सुनते हुए एचएसआईडीसी के अधिकारी
- फोटो : amar ujala
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कुंडली के उद्योगपतियों ने बिजली विभाग से परेशान होकर आखिर मोर्चा खोल दिया और विभाग के आला अधिकारियों के सामने जमकर भड़ास निकाली। उद्योगपतियों ने कहा कि अगर ऐसे ही चलता रहा तो उन्हें अपना बोरिया बिस्तर समेटकर इस क्षेत्र से जाना होगा या फिर धरना देना होगा। एचएसआईडीसी के हाल में सभी उद्योगपति बिजली और एचएसआईडीसी के अधिकारियों से रूबरू हो रहे थे।
प्रधान सुभाष गुप्ता ने बताया कि प्रशासन प्लॉट तो बेच रहा है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर है नहीं। सप्लाई की मांग ज्यादा है मगर विभाग बिजली उपलब्ध कराने में नाकाम रहा है। उन्होंने बताया कि 132 केवीए का सबस्टेशन 1991 में मंजूर हुआ था, जो 2013 में चालू हुआ। यह भी ओवरलोड हो चुका है। इसी के चलते उद्योग विभाग को लगभग दो से ढाई घंटे का कट झेलना पड़ना रहा है। सभी उद्योगपति इससे परेशान हैं ।
बिजली लोड चार्ज कम करे विभाग
उद्योगपतियों ने मांग की कि अगर उनको कट झेलना है तो बिजली विभाग उनसे वसूले जा रहे एक सौ पचास रुपये प्रतिकिलो वाट की दर को कम करें, क्योंकि इस परेशानी के चलते उनके मजदूर खाली बैठे रहते हैं और आर्थिक हानि उठानी पड़ती है। पदाधिकारियों हरीश नरसरिया, धीरज चौधरी, गौरव जैन आदि ने बताया कि हमारा लक्ष्य कुुंडली को जनरेटर फ्री जोन बनाना है, मगर अधिकारियों के रवैये के चलते शायद यह नामुमकिन है। हरियाणा में बिजली होने के बावजूद भी बिजली नहीं मिल रही है। सभी तरह का ढांचा देने की जिम्मेदारी एचएसआईडीसी की है। इसके बाद भी विभाग उदासीन है अगर यही हाल रहा तो उद्योगपतियों को संघर्ष के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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क्या कहते हैं इस बारे में अधिकारी
एचएसआईडीसी के एक्सईएन असीम टंडन ने बताया कि में इस समस्या को अपने उच्च अधिकारियों को सामने रखूंगा और अपने स्तर पर भी समस्या का जल्द से जल्द से समाधान करूंगा उद्योगपतियों को कोई भी दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
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प्रधान सुभाष गुप्ता ने बताया कि प्रशासन प्लॉट तो बेच रहा है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर है नहीं। सप्लाई की मांग ज्यादा है मगर विभाग बिजली उपलब्ध कराने में नाकाम रहा है। उन्होंने बताया कि 132 केवीए का सबस्टेशन 1991 में मंजूर हुआ था, जो 2013 में चालू हुआ। यह भी ओवरलोड हो चुका है। इसी के चलते उद्योग विभाग को लगभग दो से ढाई घंटे का कट झेलना पड़ना रहा है। सभी उद्योगपति इससे परेशान हैं ।
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बिजली लोड चार्ज कम करे विभाग
उद्योगपतियों ने मांग की कि अगर उनको कट झेलना है तो बिजली विभाग उनसे वसूले जा रहे एक सौ पचास रुपये प्रतिकिलो वाट की दर को कम करें, क्योंकि इस परेशानी के चलते उनके मजदूर खाली बैठे रहते हैं और आर्थिक हानि उठानी पड़ती है। पदाधिकारियों हरीश नरसरिया, धीरज चौधरी, गौरव जैन आदि ने बताया कि हमारा लक्ष्य कुुंडली को जनरेटर फ्री जोन बनाना है, मगर अधिकारियों के रवैये के चलते शायद यह नामुमकिन है। हरियाणा में बिजली होने के बावजूद भी बिजली नहीं मिल रही है। सभी तरह का ढांचा देने की जिम्मेदारी एचएसआईडीसी की है। इसके बाद भी विभाग उदासीन है अगर यही हाल रहा तो उद्योगपतियों को संघर्ष के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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क्या कहते हैं इस बारे में अधिकारी
एचएसआईडीसी के एक्सईएन असीम टंडन ने बताया कि में इस समस्या को अपने उच्च अधिकारियों को सामने रखूंगा और अपने स्तर पर भी समस्या का जल्द से जल्द से समाधान करूंगा उद्योगपतियों को कोई भी दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।