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ओलंपिक में मानसिक दबाव दूर करने के लिए खिलाड़ियों का अलग से सेशन चला रहे कोच
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टोक्यो में प्रैक्टिस करते भारतीय बॉक्सर
- फोटो : Sonipat
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अंकित चौहान
सोनीपत। ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतने के लिए खिलाड़ी खूब प्रैक्टिस करके पसीना बहा रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही खिलाड़ियों पर मानसिक दबाव भी बना हुआ है, जो उनके खेल को प्रभावित कर सकता है। इसलिए मानसिक दबाव दूर करने को प्रैक्टिस के साथ खिलाड़ियों का करीब एक घंटे का कोच अलग से सेशन चला रहे हैं। इसमें उन्हें अपना सामान्य खेल खेलकर बेहतर प्रदर्शन करने की सलाह दी जा रही है। वहीं हर मैच के लिए अलग से रणनीति भी तैयार की जा रही है। इस तरह खिलाड़ियों को खेल व मानसिक दोनों तरह से मजबूत बनाकर खेलने के लिए उतारा जाएगा।
ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों से लोगों को पदक की बड़ी उम्मीद है और उसके लिए ही खिलाड़ी पूरा जोर लगा रहे हैं। जहां टोक्यो पहुंचने के बाद खिलाड़ी प्रैक्टिस में जुटे हुए हैं तो वहां नहीं जाने वाले खिलाड़ी अभी कैंप में पसीना बहा रहे हैं, लेकिन ओलंपिक को लेकर खिलाड़ी मानसिक दबाव भी झेल रहे हैं और इनमें भी व्यक्तिगत खेल खेलने वाले खिलाड़ी ज्यादा दबाव मान रहे हैं। इनमें पहलवान, बॉक्सर समेत अन्य खिलाड़ी शामिल हैं।
अलग से सेशन लगा यह किया जा रहा जागरूक
अब कोच ने खिलाड़ियों को प्रैक्टिस कराने के बाद मानसिक दबाव दूर करने के लिए करीब एक घंटे का अलग से सेशन शुरू कर दिया है। इसमें खिलाड़ियों को यह बताया जा रहा है कि उनको केवल यह सोचकर खेलना है कि वे अपने देश में खेल रहे हैं और उनको अपना सामान्य खेल खेलना है। अगर वे अपना सामान्य खेल खेलते हैं तो वे बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं और उनके पदक जीतने की उम्मीद ज्यादा रहेगी। इसके साथ ही खिलाड़ियों का मानसिक दबाव दूर करने के लिए बताया जा रहा है कि अधिकतर जिन खिलाड़ियों से उनके मैच होने हैं, उनको वे पहले भी हरा चुके हैं। इसलिए ओलंपिक में कुछ अलग नहीं है और यहां भी अन्य चैंपियनशिप की तरह ही प्रदर्शन करने पर जीत मिल सकती है।
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जहां प्रैक्टिस कर रहे खिलाड़ी, उसी जगह चल रहा सेशन
ओलंपिक के लिए बॉक्सर टोक्यो में पहुंच चुके हैं और वे वहां प्रैक्टिस कर रहे हैं। उनके लिए यह सेशन वहां प्रैक्टिस के बाद चलाया जा रहा है। इस तरह ही पुरुष पहलवान रसिया में प्रैक्टिस कर रहे और महिला पहलवान सोनीपत के बहालगढ़ में प्रैक्टिस कर रही हैं। इनके लिए भी प्रैक्टिस के बाद यह सेशन चलाया जा रहा है और यह माना जा रहा है कि यह काफी कारगर भी साबित होगा।
वर्जन
खिलाड़ियों पर ओलंपिक का मानसिक दबाव रहता है और जब कोई खिलाड़ी मानसिक रूप से दबाव में होता है तो उसके प्रदर्शन पर उसका असर पड़ता है। इसलिए ही खिलाड़ियों को प्रैक्टिस के बाद मानसिक दबाव दूर करने के लिए सेशन शुरू किया गया है। उनको कहा जा रहा है कि वह ओलंपिक में यह सोचकर अपना सामान्य खेल खेलें कि वे अपने देश में खेल रहे हैं।
- कुलदीप मलिक, चीफ कोच भारतीय महिला कुश्ती
वर्जन
खिलाड़ी मानसिक दबाव में रहते हैं और उनको खेल की तकनीक सिखाने के साथ ही उनका दबाव दूर करना सबसे जरूरी है। खिलाड़ियों को बताया जा रहा है कि जिनके साथ उनके मैच होंगे, उनमें से अधिकतर को वह पहले हरा चुके हैं। इसलिए अपना सामान्य खेल खेलकर भी वह उनको हरा सकते हैं। खिलाड़ियों को केवल अपने खेल पर फोकस रखने की सलाह दी जा रही है।
- राजीव तोमर, ओलंपियन पहलवान व कोच
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सोनीपत। ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतने के लिए खिलाड़ी खूब प्रैक्टिस करके पसीना बहा रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही खिलाड़ियों पर मानसिक दबाव भी बना हुआ है, जो उनके खेल को प्रभावित कर सकता है। इसलिए मानसिक दबाव दूर करने को प्रैक्टिस के साथ खिलाड़ियों का करीब एक घंटे का कोच अलग से सेशन चला रहे हैं। इसमें उन्हें अपना सामान्य खेल खेलकर बेहतर प्रदर्शन करने की सलाह दी जा रही है। वहीं हर मैच के लिए अलग से रणनीति भी तैयार की जा रही है। इस तरह खिलाड़ियों को खेल व मानसिक दोनों तरह से मजबूत बनाकर खेलने के लिए उतारा जाएगा।
ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों से लोगों को पदक की बड़ी उम्मीद है और उसके लिए ही खिलाड़ी पूरा जोर लगा रहे हैं। जहां टोक्यो पहुंचने के बाद खिलाड़ी प्रैक्टिस में जुटे हुए हैं तो वहां नहीं जाने वाले खिलाड़ी अभी कैंप में पसीना बहा रहे हैं, लेकिन ओलंपिक को लेकर खिलाड़ी मानसिक दबाव भी झेल रहे हैं और इनमें भी व्यक्तिगत खेल खेलने वाले खिलाड़ी ज्यादा दबाव मान रहे हैं। इनमें पहलवान, बॉक्सर समेत अन्य खिलाड़ी शामिल हैं।
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अलग से सेशन लगा यह किया जा रहा जागरूक
अब कोच ने खिलाड़ियों को प्रैक्टिस कराने के बाद मानसिक दबाव दूर करने के लिए करीब एक घंटे का अलग से सेशन शुरू कर दिया है। इसमें खिलाड़ियों को यह बताया जा रहा है कि उनको केवल यह सोचकर खेलना है कि वे अपने देश में खेल रहे हैं और उनको अपना सामान्य खेल खेलना है। अगर वे अपना सामान्य खेल खेलते हैं तो वे बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं और उनके पदक जीतने की उम्मीद ज्यादा रहेगी। इसके साथ ही खिलाड़ियों का मानसिक दबाव दूर करने के लिए बताया जा रहा है कि अधिकतर जिन खिलाड़ियों से उनके मैच होने हैं, उनको वे पहले भी हरा चुके हैं। इसलिए ओलंपिक में कुछ अलग नहीं है और यहां भी अन्य चैंपियनशिप की तरह ही प्रदर्शन करने पर जीत मिल सकती है।
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जहां प्रैक्टिस कर रहे खिलाड़ी, उसी जगह चल रहा सेशन
ओलंपिक के लिए बॉक्सर टोक्यो में पहुंच चुके हैं और वे वहां प्रैक्टिस कर रहे हैं। उनके लिए यह सेशन वहां प्रैक्टिस के बाद चलाया जा रहा है। इस तरह ही पुरुष पहलवान रसिया में प्रैक्टिस कर रहे और महिला पहलवान सोनीपत के बहालगढ़ में प्रैक्टिस कर रही हैं। इनके लिए भी प्रैक्टिस के बाद यह सेशन चलाया जा रहा है और यह माना जा रहा है कि यह काफी कारगर भी साबित होगा।
वर्जन
खिलाड़ियों पर ओलंपिक का मानसिक दबाव रहता है और जब कोई खिलाड़ी मानसिक रूप से दबाव में होता है तो उसके प्रदर्शन पर उसका असर पड़ता है। इसलिए ही खिलाड़ियों को प्रैक्टिस के बाद मानसिक दबाव दूर करने के लिए सेशन शुरू किया गया है। उनको कहा जा रहा है कि वह ओलंपिक में यह सोचकर अपना सामान्य खेल खेलें कि वे अपने देश में खेल रहे हैं।
- कुलदीप मलिक, चीफ कोच भारतीय महिला कुश्ती
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खिलाड़ी मानसिक दबाव में रहते हैं और उनको खेल की तकनीक सिखाने के साथ ही उनका दबाव दूर करना सबसे जरूरी है। खिलाड़ियों को बताया जा रहा है कि जिनके साथ उनके मैच होंगे, उनमें से अधिकतर को वह पहले हरा चुके हैं। इसलिए अपना सामान्य खेल खेलकर भी वह उनको हरा सकते हैं। खिलाड़ियों को केवल अपने खेल पर फोकस रखने की सलाह दी जा रही है।
- राजीव तोमर, ओलंपियन पहलवान व कोच