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मन की शुद्धि के लिए श्रीमद्भागवत कथा से बढ़कर कोई साधन नहीं : आचार्य
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सोनीपत। कामी रोड स्थित श्री चंडी मां महाकाली प्राचीन मंदिर सिद्धपीठ में मंदिर समिति की ओर से 22वें वार्षिक महोत्सव पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का पांचवां दिन रहा। बरसाना से कथावाचक आचार्य डॉ. रोहिताश भारद्वाज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाललीला, गिरिराज पूजन के प्रसंग का वर्णन किया।
यजमान के रूप में प्रभात सिंघल व प्रदीप गोयल ने भागवत पूजन कर कथा की शुरुआत की। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में श्री बालाजी सेवा समिति के प्रधान रघुनंदन व्यास, राकेश बंसल, राकेश बिंदल व प्रदीप खत्री ने दीप प्रज्वलित किया।
कथावाचक ने कहा कि मन की शुद्धि के लिए श्रीमद्भागवत कथा से बढ़कर कोई साधन नहीं है। भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज वासियों को गिरिराज की पूजा-अर्चना करने के लिए कहा तो इंद्रदेव क्रोधित हो गए, उन्होंने ब्रज में बारिश की। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को सात दिनों तक अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाकर ब्रज वासियों की रक्षा की थी। तब इंद्र देवता को ज्ञात हुआ कि श्रीकृष्ण स्वयं साक्षात परमेश्वर हैं, इसलिए भगवान कृष्ण को गिरिधर नाम से भी जाना जाता है।
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कार्यक्रम में समिति के प्रधान प्रमोद गुप्ता, उप प्रधान देवेंद्र कुच्छल, महासचिव सुनील कुमार गुप्ता, कोषाध्यक्ष विनोद कुमार कुच्छल व सचिव पवन जिंदल आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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यजमान के रूप में प्रभात सिंघल व प्रदीप गोयल ने भागवत पूजन कर कथा की शुरुआत की। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में श्री बालाजी सेवा समिति के प्रधान रघुनंदन व्यास, राकेश बंसल, राकेश बिंदल व प्रदीप खत्री ने दीप प्रज्वलित किया।
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कथावाचक ने कहा कि मन की शुद्धि के लिए श्रीमद्भागवत कथा से बढ़कर कोई साधन नहीं है। भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज वासियों को गिरिराज की पूजा-अर्चना करने के लिए कहा तो इंद्रदेव क्रोधित हो गए, उन्होंने ब्रज में बारिश की। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को सात दिनों तक अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाकर ब्रज वासियों की रक्षा की थी। तब इंद्र देवता को ज्ञात हुआ कि श्रीकृष्ण स्वयं साक्षात परमेश्वर हैं, इसलिए भगवान कृष्ण को गिरिधर नाम से भी जाना जाता है।
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कार्यक्रम में समिति के प्रधान प्रमोद गुप्ता, उप प्रधान देवेंद्र कुच्छल, महासचिव सुनील कुमार गुप्ता, कोषाध्यक्ष विनोद कुमार कुच्छल व सचिव पवन जिंदल आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।