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Sonipat News: अदालत से मिला स्टे सर्वोच्च न्यायालय ने किया निरस्त, 17 दुकानों पर कभी भी चल सकता है बुलडोजर
Sun, 12 Jan 2025 06:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 12 Jan 2025 06:28 AM IST
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सोनीपत। सुभाष चौक पर कस्टोडियन विभाग की जमीन पर बनी विवादित 17 दुकानों पर अब कभी प्रशासन का डंडा चल सकता है। दुकानदारों को अदालत से मिला स्टे सर्वोच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया है। नगर निगम इस जमीन पर पार्किंग क्षेत्र बनाना चाहता है। ऐसे में कई बार दुकानों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की गई, लेकिन दुकानों के संचालक अदालत में चले गए थे, जिसके बाद अदालत ने उनकी सुनवाई करते हुए कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
करीब तीन दशक पहले तत्कालीन नगरपालिका ने पार्किंग और ग्रीन बेल्ट के लिए आरक्षित स्थान पर दुकानों का निर्माण कर उन्हें किराये पर दिया था। जब इस गलती का संज्ञान लिया गया तो इसे हटाने के लिए उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। वर्ष 2009 में उच्च न्यायालय ने अवैध निर्माण हटाने का आदेश दिया, जिसके तहत 27 अक्टूबर 2009 को एक तरफ की 11 दुकानें तोड़ दी गईं थी, लेकिन एटलस रोड की ओर बनी दुकानों के दुकानदारों ने हाई कोर्ट से स्टे ले लिया था। यह मामला कई साल तक लंबित रहा। 19 जुलाई 2023 को हाईकोर्ट के न्यायाधीश अनिल क्षेत्रपाल ने स्टे निरस्त किया था। इसके बाद 16 अगस्त 2023 को प्रशासन ने 17 दुकानदारों को दुकानें खाली करने के लिए नोटिस जारी किया था। 22 अगस्त को दुकानदारों ने अपना सामान निकाल लिया और प्रशासन ने बिजली काटने के बाद कार्यवाही शुरू की, लेकिन दुकानदारों ने सुप्रीम कोर्ट से फिर से स्टेटस को (यथास्थिति) ले लिया, जिससे कार्रवाई रुक गई थी।
नगर निगम ने दायर किए थे शपथ पत्र
यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चला, जहां नगर निगम ने अपने पक्ष में शपथ पत्र दायर कर स्पष्ट किया कि 2009 से इन दुकानों से किराया लेना बंद कर दिया गया था और इनका निर्माण अवैध है। तथ्यों को जानने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिसंबर 2024 को स्टे निरस्त कर दिया और दुकानों को हटाने के आदेश दिए।
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करीब तीन दशक पहले तत्कालीन नगरपालिका ने पार्किंग और ग्रीन बेल्ट के लिए आरक्षित स्थान पर दुकानों का निर्माण कर उन्हें किराये पर दिया था। जब इस गलती का संज्ञान लिया गया तो इसे हटाने के लिए उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। वर्ष 2009 में उच्च न्यायालय ने अवैध निर्माण हटाने का आदेश दिया, जिसके तहत 27 अक्टूबर 2009 को एक तरफ की 11 दुकानें तोड़ दी गईं थी, लेकिन एटलस रोड की ओर बनी दुकानों के दुकानदारों ने हाई कोर्ट से स्टे ले लिया था। यह मामला कई साल तक लंबित रहा। 19 जुलाई 2023 को हाईकोर्ट के न्यायाधीश अनिल क्षेत्रपाल ने स्टे निरस्त किया था। इसके बाद 16 अगस्त 2023 को प्रशासन ने 17 दुकानदारों को दुकानें खाली करने के लिए नोटिस जारी किया था। 22 अगस्त को दुकानदारों ने अपना सामान निकाल लिया और प्रशासन ने बिजली काटने के बाद कार्यवाही शुरू की, लेकिन दुकानदारों ने सुप्रीम कोर्ट से फिर से स्टेटस को (यथास्थिति) ले लिया, जिससे कार्रवाई रुक गई थी।
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नगर निगम ने दायर किए थे शपथ पत्र
यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चला, जहां नगर निगम ने अपने पक्ष में शपथ पत्र दायर कर स्पष्ट किया कि 2009 से इन दुकानों से किराया लेना बंद कर दिया गया था और इनका निर्माण अवैध है। तथ्यों को जानने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिसंबर 2024 को स्टे निरस्त कर दिया और दुकानों को हटाने के आदेश दिए।
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