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Sonipat News: भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाया
Sun, 06 Oct 2024 11:46 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 06 Oct 2024 11:46 PM IST
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फोटो 18- सोनीपत के खरखौदा की जयनारायण धर्मशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के संपन्न होने पर भग
खरखौदा। जयनारायण धर्मशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के संपन्न होने पर शहरभर में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा निकाली गई। जगन्नाथ रथयात्रा से शहर भक्तिमय हो उठा। इससे पहले कथा के अंतिम दिन कथावाचक श्रील भक्ति प्रसाद विष्णु गोस्वामी ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाया।
कथावाचक श्रील भक्ति प्रसाद विष्णु गोस्वामी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की बचपन की मित्रता थी। श्रीकृष्ण ने सुदामा को बचपन में ही कहा था कि मित्र कभी भी आपके ऊपर संकट आए तो वह अपने मित्र को अवश्य याद करें। जब सुदामा पर संकट आया तो सुदामा की पत्नी सुशीला बार-बार उन्हें श्रीकृष्ण से मदद लेने की बात कहती हैं। एक दिन सुदामा अपनी पत्नी की बात मानकर द्वारका पहुंचते हैं और द्वारपाल भगवान कृष्ण को बताते हैं कि सुदामा नाम का ब्राह्मण आया है। कृष्ण नंगे पैर दौड़ के आते हैं और सुदामा को गले से लगा लेते हैं। कृष्ण सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाते हैं और उन्हें कुबेर का धन देते हैं। सुदामा कुछ दिन वहीं ठहरकर कृष्ण से विदा होने की आज्ञा लेते हैं। भगवान कृष्ण पत्नी के साथ सुदामा को प्रेममय विदाई देते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा से भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, ज्ञानयोग, कर्मयोग, समाजधर्म, स्त्रीधर्म व राजनीति का ज्ञान होता है। तत्पश्चात श्रद्धालुओं ने हवन में आहुति डालकर शहर में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा निकाली। मार्ग में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
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कथावाचक श्रील भक्ति प्रसाद विष्णु गोस्वामी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की बचपन की मित्रता थी। श्रीकृष्ण ने सुदामा को बचपन में ही कहा था कि मित्र कभी भी आपके ऊपर संकट आए तो वह अपने मित्र को अवश्य याद करें। जब सुदामा पर संकट आया तो सुदामा की पत्नी सुशीला बार-बार उन्हें श्रीकृष्ण से मदद लेने की बात कहती हैं। एक दिन सुदामा अपनी पत्नी की बात मानकर द्वारका पहुंचते हैं और द्वारपाल भगवान कृष्ण को बताते हैं कि सुदामा नाम का ब्राह्मण आया है। कृष्ण नंगे पैर दौड़ के आते हैं और सुदामा को गले से लगा लेते हैं। कृष्ण सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाते हैं और उन्हें कुबेर का धन देते हैं। सुदामा कुछ दिन वहीं ठहरकर कृष्ण से विदा होने की आज्ञा लेते हैं। भगवान कृष्ण पत्नी के साथ सुदामा को प्रेममय विदाई देते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा से भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, ज्ञानयोग, कर्मयोग, समाजधर्म, स्त्रीधर्म व राजनीति का ज्ञान होता है। तत्पश्चात श्रद्धालुओं ने हवन में आहुति डालकर शहर में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा निकाली। मार्ग में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
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