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Sonipat News: मां ने दूध बेचकर पाला, बेटे ने गोला फेंककर देश के लिए जीता कांस्य
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-तीन साल की उम्र में हादसे में गंवाया हाथ, हौसले और मेहनत से एशियन पैरा गेम्स में बनाई पहचान
-गांव पांची जाटान लौटने पर प्रवीन बजाड़ का जोरदार स्वागत
-पिता के निधन के बाद मां शीला देवी ने दूध बेचकर संभाला परिवार, बेटे के खेल के सपने को टूटने नहीं दिया
फोटो :20: सोनीपत के गांव पांची जाटान में एशियन पैरा गेम्स में कांस्य लेकर लौटे प्रवीन बजाड़ का स्वागत करते विधायक देवेंद्र कादियान के भाई वीरेंद्र कादियान व अन्य। स्रोत प्रवक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
गन्नौर। मां ने दूध बेचकर बेटे के सपनों को सींचती रही। बेटे ने भी मैदान में पसीना बहाया और अंतरराष्ट्रीय मंच पर कांस्य पदक जीतकर मां के संघर्ष को सम्मान दिलाया। यह कहानी है गांव पांची जाटान के पैरा एथलीट प्रवीन बजाड़ की, जिन्होंने एशियन पैरा गेम्स में शॉटपुट (गोला फेंक) स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर गांव और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
मंगलवार को गांव लौटने पर प्रवीन का ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया। जाहरी चौक से वाहनों के काफिले के साथ उन्हें गांव लाया गया। बजाड़ वाली चौपाल में आयोजित सम्मान समारोह में विधायक देवेंद्र कादियान के अनुज एवं मन्नत ग्रुप ऑफ होटल्स के एमडी वीरेंद्र कादियान ने नोटों की माला पहनाकर उन्हें सम्मानित किया। ग्रामीणों ने फूलमालाएं पहनाकर उनका अभिनंदन किया।
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तीन साल की उम्र में हादसे में गंवाया हाथ, हौसले ने नहीं मानी हार
प्रवीन की जिंदगी में मुश्किलों का दौर बचपन में ही शुरू हो गया था। जब वह महज तीन साल के थे तब चारा काटने के गंडासे की चपेट में आने से उनका एक हाथ कट गया। इस हादसे ने उनके जीवन की राह कठिन कर दी। ऐसे में खेलों के प्रति उनका जुनून बढ़ने लगा। उम्र बढ़ी तो वह नियमित रूप से मैदान में दौड़ लगाने जाने लगे। उनकी लगन और खेल के प्रति समर्पण देखकर कोच योगेश कुमार ने उन्हें शॉटपुट खेलने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद प्रवीन ने अभ्यास शुरू किया और अपनी मेहनत को लक्ष्य हासिल करने का जरिया बना लिया।
सुविधाओं का अभाव भी नहीं रोक सका आगे बढ़ने की राह
खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रवीन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सुविधाओं के अभाव में उन्हें अभ्यास के लिए रोहतक के राजीव गांधी स्टेडियम जाना पड़ता था। इसके बावजूद उन्होंने अभ्यास में निरंतरता बनाए रखी। मेहनत, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और एशियन पैरा गेम्स में कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की।
पिता के निधन के बाद मां ने दूध बेचकर संभाला परिवार
प्रवीन के संघर्ष में उनकी मां शीला देवी का योगदान सबसे अहम रहा। वर्ष 2024 में पिता के निधन के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। मुश्किल परिस्थितियों में भी शीला देवी ने हिम्मत नहीं हारी। वह दूध बेचकर परिवार का पालन-पोषण करती रहीं और बेटे को खेल में आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित करती रहीं। मां के त्याग और विश्वास को ताकत बनाकर प्रवीन ने सुबह-शाम अभ्यास जारी रखा। पदक जीतकर घर लौटे बेटे का मां ने तिलक लगाकर स्वागत किया और उन्हें गले लगाया। यह पल परिवार के संघर्ष और वर्षों की मेहनत की सफलता का प्रतीक बन गया।
मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से हासिल की मंजिल
सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि वीरेंद्र कादियान ने कहा कि प्रवीन बजाड़ ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से साबित किया है कि चुनौतियां सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। एशियन पैरा गेम्स में कांस्य पदक जीतना उनके संघर्ष, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का परिणाम है। उनकी उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। गांव में आयोजित समारोह के दौरान ग्रामीणों ने प्रवीन का फूलमालाओं से स्वागत किया और उनकी उपलब्धि पर खुशी जताई। इस अवसर पर कोच रविंद्र पंद्याल, मौसम खत्री, मंगल, बबलू, बादल, अनुज बजाड़, सोनू, प्रविंद्र, कोच योगेश, प्रदीप पहलवान, यशपाल, चीना पहलवान, धर्मपाल और बेदा मौजूद रहे।
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-गांव पांची जाटान लौटने पर प्रवीन बजाड़ का जोरदार स्वागत
-पिता के निधन के बाद मां शीला देवी ने दूध बेचकर संभाला परिवार, बेटे के खेल के सपने को टूटने नहीं दिया
फोटो :20: सोनीपत के गांव पांची जाटान में एशियन पैरा गेम्स में कांस्य लेकर लौटे प्रवीन बजाड़ का स्वागत करते विधायक देवेंद्र कादियान के भाई वीरेंद्र कादियान व अन्य। स्रोत प्रवक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
गन्नौर। मां ने दूध बेचकर बेटे के सपनों को सींचती रही। बेटे ने भी मैदान में पसीना बहाया और अंतरराष्ट्रीय मंच पर कांस्य पदक जीतकर मां के संघर्ष को सम्मान दिलाया। यह कहानी है गांव पांची जाटान के पैरा एथलीट प्रवीन बजाड़ की, जिन्होंने एशियन पैरा गेम्स में शॉटपुट (गोला फेंक) स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर गांव और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
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मंगलवार को गांव लौटने पर प्रवीन का ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया। जाहरी चौक से वाहनों के काफिले के साथ उन्हें गांव लाया गया। बजाड़ वाली चौपाल में आयोजित सम्मान समारोह में विधायक देवेंद्र कादियान के अनुज एवं मन्नत ग्रुप ऑफ होटल्स के एमडी वीरेंद्र कादियान ने नोटों की माला पहनाकर उन्हें सम्मानित किया। ग्रामीणों ने फूलमालाएं पहनाकर उनका अभिनंदन किया।
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तीन साल की उम्र में हादसे में गंवाया हाथ, हौसले ने नहीं मानी हार
प्रवीन की जिंदगी में मुश्किलों का दौर बचपन में ही शुरू हो गया था। जब वह महज तीन साल के थे तब चारा काटने के गंडासे की चपेट में आने से उनका एक हाथ कट गया। इस हादसे ने उनके जीवन की राह कठिन कर दी। ऐसे में खेलों के प्रति उनका जुनून बढ़ने लगा। उम्र बढ़ी तो वह नियमित रूप से मैदान में दौड़ लगाने जाने लगे। उनकी लगन और खेल के प्रति समर्पण देखकर कोच योगेश कुमार ने उन्हें शॉटपुट खेलने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद प्रवीन ने अभ्यास शुरू किया और अपनी मेहनत को लक्ष्य हासिल करने का जरिया बना लिया।
सुविधाओं का अभाव भी नहीं रोक सका आगे बढ़ने की राह
खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रवीन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सुविधाओं के अभाव में उन्हें अभ्यास के लिए रोहतक के राजीव गांधी स्टेडियम जाना पड़ता था। इसके बावजूद उन्होंने अभ्यास में निरंतरता बनाए रखी। मेहनत, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और एशियन पैरा गेम्स में कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की।
पिता के निधन के बाद मां ने दूध बेचकर संभाला परिवार
प्रवीन के संघर्ष में उनकी मां शीला देवी का योगदान सबसे अहम रहा। वर्ष 2024 में पिता के निधन के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। मुश्किल परिस्थितियों में भी शीला देवी ने हिम्मत नहीं हारी। वह दूध बेचकर परिवार का पालन-पोषण करती रहीं और बेटे को खेल में आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित करती रहीं। मां के त्याग और विश्वास को ताकत बनाकर प्रवीन ने सुबह-शाम अभ्यास जारी रखा। पदक जीतकर घर लौटे बेटे का मां ने तिलक लगाकर स्वागत किया और उन्हें गले लगाया। यह पल परिवार के संघर्ष और वर्षों की मेहनत की सफलता का प्रतीक बन गया।
मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से हासिल की मंजिल
सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि वीरेंद्र कादियान ने कहा कि प्रवीन बजाड़ ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से साबित किया है कि चुनौतियां सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। एशियन पैरा गेम्स में कांस्य पदक जीतना उनके संघर्ष, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का परिणाम है। उनकी उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। गांव में आयोजित समारोह के दौरान ग्रामीणों ने प्रवीन का फूलमालाओं से स्वागत किया और उनकी उपलब्धि पर खुशी जताई। इस अवसर पर कोच रविंद्र पंद्याल, मौसम खत्री, मंगल, बबलू, बादल, अनुज बजाड़, सोनू, प्रविंद्र, कोच योगेश, प्रदीप पहलवान, यशपाल, चीना पहलवान, धर्मपाल और बेदा मौजूद रहे।