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Sonipat News: कवियों ने रचनाओं से महर्षि के जीवन और कृतित्व को किया प्रस्तुत
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- अखिल भारतीय साहित्य परिषद की सोनीपत इकाई ने महर्षि वाल्मीकि जयंती पर काव्य संध्या आयोजित
-डॉ. पूर्णमल गौड़ ने रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने का प्रसंग सुनाया
फोटो 11: सोनीपत के सेक्टर-14 में आयोजित काव्य संध्या के दौरान मौजूद अखिल भारतीय साहित्य परिषद की सोनीपत इकाई के पदाधिकारी। स्रोत: परिषद
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। सेक्टर-14 में महर्षि वाल्मीकि जयंती पर काव्य संध्या में साहित्यकारों और कवियों ने महर्षि के जीवन, रामायण की रचना और उनके साहित्यिक योगदान को प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि हरियाणा साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ. पूर्णमल गौड़ ने रत्नाकर के जीवन परिवर्तन का प्रसंग सुनाया।
इकाई की महामंत्री किरण गुप्ता ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की और महर्षि वाल्मीकि के जीवन तथा साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला। डॉ. पूर्णमल गौड़ ने बताया कि नारद ऋषि के संपर्क में आने के बाद रत्नाकर ने अपने कर्मों पर विचार किया और तपस्या के मार्ग पर चल पड़े। आगे चलकर वे महर्षि वाल्मीकि के रूप में प्रसिद्ध हुए और उन्होंने रामायण की रचना की।
उन्होंने क्रौंच पक्षी के वध से व्यथित होकर महर्षि के मुख से निकले प्रथम श्लोक के प्रसंग का उल्लेख करते हुए रामायण को भारतीय संस्कृति, मर्यादा और मानवीय मूल्यों का महत्वपूर्ण ग्रंथ बताया। मुख्य वक्ता रामधन शर्मा ने भज मन राम चरण सुखदाई भजन प्रस्तुत किया। अध्यक्षता कर रहीं डॉ. कमलेश मलिक ने क्रौंच पक्षी की पीड़ा और उससे उपजी काव्य संवेदना को प्रस्तुत किया। परिषद के प्रांतीय संगठन मंत्री डॉ. धर्मवीर मलिक योगी ने रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने की यात्रा पर विचार रखे। कोषाध्यक्ष गीता सैनी ने राम वंदना प्रस्तुत की। इकाई के संरक्षक डॉ. जेसी बत्रा ने वाल्मीकि जयंती के महत्व पर प्रकाश डाला। इकाई अध्यक्ष नरेश आकाश, परिषद के प्रांतीय उपाध्यक्ष रामधन शर्मा, कवयित्री डॉ. कमलेश मलिक और डॉ. जेसी बत्रा उपस्थित रहे।
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-डॉ. पूर्णमल गौड़ ने रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने का प्रसंग सुनाया
फोटो 11: सोनीपत के सेक्टर-14 में आयोजित काव्य संध्या के दौरान मौजूद अखिल भारतीय साहित्य परिषद की सोनीपत इकाई के पदाधिकारी। स्रोत: परिषद
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। सेक्टर-14 में महर्षि वाल्मीकि जयंती पर काव्य संध्या में साहित्यकारों और कवियों ने महर्षि के जीवन, रामायण की रचना और उनके साहित्यिक योगदान को प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि हरियाणा साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ. पूर्णमल गौड़ ने रत्नाकर के जीवन परिवर्तन का प्रसंग सुनाया।
इकाई की महामंत्री किरण गुप्ता ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की और महर्षि वाल्मीकि के जीवन तथा साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला। डॉ. पूर्णमल गौड़ ने बताया कि नारद ऋषि के संपर्क में आने के बाद रत्नाकर ने अपने कर्मों पर विचार किया और तपस्या के मार्ग पर चल पड़े। आगे चलकर वे महर्षि वाल्मीकि के रूप में प्रसिद्ध हुए और उन्होंने रामायण की रचना की।
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उन्होंने क्रौंच पक्षी के वध से व्यथित होकर महर्षि के मुख से निकले प्रथम श्लोक के प्रसंग का उल्लेख करते हुए रामायण को भारतीय संस्कृति, मर्यादा और मानवीय मूल्यों का महत्वपूर्ण ग्रंथ बताया। मुख्य वक्ता रामधन शर्मा ने भज मन राम चरण सुखदाई भजन प्रस्तुत किया। अध्यक्षता कर रहीं डॉ. कमलेश मलिक ने क्रौंच पक्षी की पीड़ा और उससे उपजी काव्य संवेदना को प्रस्तुत किया। परिषद के प्रांतीय संगठन मंत्री डॉ. धर्मवीर मलिक योगी ने रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने की यात्रा पर विचार रखे। कोषाध्यक्ष गीता सैनी ने राम वंदना प्रस्तुत की। इकाई के संरक्षक डॉ. जेसी बत्रा ने वाल्मीकि जयंती के महत्व पर प्रकाश डाला। इकाई अध्यक्ष नरेश आकाश, परिषद के प्रांतीय उपाध्यक्ष रामधन शर्मा, कवयित्री डॉ. कमलेश मलिक और डॉ. जेसी बत्रा उपस्थित रहे।
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