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Sonipat News: रामलीला मंचन में सीता स्वयंवर और राम वन गमन की लीला दिखाई
Fri, 16 Oct 2026 02:41 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 16 Oct 2026 02:41 AM IST
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सोनीपत के गांव राई में रामलीला मंचन के दौरान प्रीतम कौशिक को सम्मानित करते आयोजक।
सोनीपत। गांव राई में श्रीरामायण ट्रस्ट की तरफ से रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। रामलीला मंचन का उद्घाटन ग्रामीण प्रीतम कौशिक ने किया।
प्रधान विक्की कौशिक व निदेशक अधिवक्ता मोहन ने रामलीला आयोजकों की ओर से प्रीतम कौशिक को सम्मानित किया गया। रामलीला के दौरान कलाकारों ने सीता स्वयंवर और राम वन गमन के प्रसंगों का मंचन कर दर्शकों को भावविभोर किया।
कलाकारों ने सीता स्वयंवर के प्रसंग में भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष तोड़ने और माता सीता के साथ विवाह का दृश्य प्रस्तुत किया। रामलीला में दिखाया गया कि गुरु विश्वामित्र के साथ प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण पुष्प वाटिका में पूजा के लिए फूल लेने पहुंचते हैं। इसी दौरान माता सीता अपनी सखियों के साथ पार्वती की पूजा के लिए वहां फूल लेने आती हैं। प्रभु श्रीराम के दर्शन कर माता सीता को नारद मुनि के वचन याद आते हैं।
इसके बाद राजा जनक की ओर से सीता स्वयंवर की घोषणा की जाती है। शर्त रखी जाती है कि जो भी भगवान शिव का धनुष तोड़ेगा, उसी के साथ सीता का विवाह होगा। अनेक राजा धनुष को हिला तक नहीं पाते। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से प्रभु श्रीराम धनुष उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाते हैं कि धनुष टूट जाता है।
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इसके बाद क्रोधित हो परशुराम पहुंचते हैं। परशुराम और लक्ष्मण के बीच गंभीर संवाद होता है। प्रभु श्रीराम विनम्रता से परशुराम को शांत कराते हैं। अंत में परशुराम को श्रीराम के अवतार होने का ज्ञान होता है।
रामलीला के अगले प्रसंग में राम वन गमन के प्रसंग में भगवान श्रीराम के वन जाने की लीला का मंचन किया गया। मंथरा कैकेयी को राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगने के लिए उकसाती है। कैकेयी कोप भवन में चली जाती है और राम के लिए 14 वर्ष का वनवास और भरत के लिए राजतिलक मांगने का निर्णय लेती है।
वहीं, मंचन के दौरान दर्शकों ने धार्मिक प्रसंगों का आनंद लिया। इस दौरान खेलकूद स्कूल के पूर्व प्राचार्य रामधारी शर्मा, बलबीर कौशिक, रमेश कौशिक, कृष्ण, सुरजीत, डॉ. महाबीर, राजेश कौशिक, रामप्रकाश बिल्लू आदि ग्रामीण मौजूद रहे।
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प्रधान विक्की कौशिक व निदेशक अधिवक्ता मोहन ने रामलीला आयोजकों की ओर से प्रीतम कौशिक को सम्मानित किया गया। रामलीला के दौरान कलाकारों ने सीता स्वयंवर और राम वन गमन के प्रसंगों का मंचन कर दर्शकों को भावविभोर किया।
कलाकारों ने सीता स्वयंवर के प्रसंग में भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष तोड़ने और माता सीता के साथ विवाह का दृश्य प्रस्तुत किया। रामलीला में दिखाया गया कि गुरु विश्वामित्र के साथ प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण पुष्प वाटिका में पूजा के लिए फूल लेने पहुंचते हैं। इसी दौरान माता सीता अपनी सखियों के साथ पार्वती की पूजा के लिए वहां फूल लेने आती हैं। प्रभु श्रीराम के दर्शन कर माता सीता को नारद मुनि के वचन याद आते हैं।
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इसके बाद राजा जनक की ओर से सीता स्वयंवर की घोषणा की जाती है। शर्त रखी जाती है कि जो भी भगवान शिव का धनुष तोड़ेगा, उसी के साथ सीता का विवाह होगा। अनेक राजा धनुष को हिला तक नहीं पाते। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से प्रभु श्रीराम धनुष उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाते हैं कि धनुष टूट जाता है।
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इसके बाद क्रोधित हो परशुराम पहुंचते हैं। परशुराम और लक्ष्मण के बीच गंभीर संवाद होता है। प्रभु श्रीराम विनम्रता से परशुराम को शांत कराते हैं। अंत में परशुराम को श्रीराम के अवतार होने का ज्ञान होता है।
रामलीला के अगले प्रसंग में राम वन गमन के प्रसंग में भगवान श्रीराम के वन जाने की लीला का मंचन किया गया। मंथरा कैकेयी को राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगने के लिए उकसाती है। कैकेयी कोप भवन में चली जाती है और राम के लिए 14 वर्ष का वनवास और भरत के लिए राजतिलक मांगने का निर्णय लेती है।
वहीं, मंचन के दौरान दर्शकों ने धार्मिक प्रसंगों का आनंद लिया। इस दौरान खेलकूद स्कूल के पूर्व प्राचार्य रामधारी शर्मा, बलबीर कौशिक, रमेश कौशिक, कृष्ण, सुरजीत, डॉ. महाबीर, राजेश कौशिक, रामप्रकाश बिल्लू आदि ग्रामीण मौजूद रहे।