{"_id":"6ad149685551dc882e077cf6","slug":"emphasis-on-the-preservation-of-the-knowledge-tradition-sonipat-news-c-197-1-snp1003-162410-2026-10-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonipat News: ज्ञान परंपरा के संरक्षण पर जोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonipat News: ज्ञान परंपरा के संरक्षण पर जोर
Fri, 16 Oct 2026 03:15 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 16 Oct 2026 03:15 AM IST
विज्ञापन
फोटाे: सोनीपत के पाणिनि महाविद्यालय, रेवली में कार्यशाला के दौरान विद्वान, आचार्य, प्राध्यापक
सोनीपत। गांव रेवली स्थित पाणिनि महाविद्यालय में मीमांसा न्यायप्रकाश के पंक्ति अध्ययन पर सात दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला पाणिनि महाविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), दिल्ली की ओर से हुई। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जनकपुरी ने वित्तीय सहयोग किया।
कार्यशाला में करीब 40 से 50 विद्वानों, आचार्यों, प्राध्यापकों और शोधार्थियों ने भाग लिया। इसमें वेदों की प्रामाणिकता, विधि के विभिन्न भेद, भावना विचार और निषेध निरूपण सहित मीमांसा दर्शन के प्रमुख सिद्धांतों पर चर्चा हुई। विभिन्न सत्रों में देश के कई विश्वविद्यालयों के विद्वानों ने व्याख्यान दिए।
उद्घाटन सत्र में आचार्य डॉ. सुद्युम्न, प्रो. डॉ. ओमनाथ, प्रो. डॉ. सुधीर कुमार आर्य, प्रो. डॉ. वाचस्पति मिश्र और प्रो. डॉ. भारतेंदु पांडेय जैसे कई विद्वान शामिल हुए। अन्य सत्रों में जेएनयू के प्रो. डॉ. संतोष कुमार शुक्ल और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. काशीनाथ सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी विचार रखे। इन सत्रों ने प्रतिभागियों को गहन अध्ययन का अवसर प्रदान किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
कार्यशाला में करीब 40 से 50 विद्वानों, आचार्यों, प्राध्यापकों और शोधार्थियों ने भाग लिया। इसमें वेदों की प्रामाणिकता, विधि के विभिन्न भेद, भावना विचार और निषेध निरूपण सहित मीमांसा दर्शन के प्रमुख सिद्धांतों पर चर्चा हुई। विभिन्न सत्रों में देश के कई विश्वविद्यालयों के विद्वानों ने व्याख्यान दिए।
विज्ञापन
उद्घाटन सत्र में आचार्य डॉ. सुद्युम्न, प्रो. डॉ. ओमनाथ, प्रो. डॉ. सुधीर कुमार आर्य, प्रो. डॉ. वाचस्पति मिश्र और प्रो. डॉ. भारतेंदु पांडेय जैसे कई विद्वान शामिल हुए। अन्य सत्रों में जेएनयू के प्रो. डॉ. संतोष कुमार शुक्ल और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. काशीनाथ सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी विचार रखे। इन सत्रों ने प्रतिभागियों को गहन अध्ययन का अवसर प्रदान किया।
विज्ञापन