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धान की लागत बिगाड़ेगी प्रदेश के किसानों की दशा
Sonipat
Updated Wed, 20 Aug 2014 12:20 AM IST
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महंगाई की मार प्रदेश में धान उत्पादक किसानों पर पड़ने वाली है। कृषि विभाग का आंकलन है कि चालू वर्ष में धान की उत्पादन लागत पिछले वर्ष की तुलना में प्रति क्विंटल 129 रुपये अधिक आएगी।
खास बात है कि लागत किमत के आधार पर प्रदेश सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 2025 रुपये क्ंिवटल मांगा था, जो कि 1395 रुपये ही दिया है। खेती में प्रयुक्त होने वाली वस्तुओं के बढे़ दामों के साथ कमजोर मानसून ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
प्रदेश में सावन भले ही बीत गया हो, पर मानसून का अभी इंतजार है, बावजूद इसके किसान धान को तैयार करने के काम में जुट गए हैं। चालू फसली सीजन में प्रदेश में 12 लाख 35 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई का टारगेट कृषि विभाग ने रखा है। धान के रोपाई क्षेत्र में इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष करीब 10 हजार हेक्टेयर की कटौती की गई है। धान की रोपाई शुरू होने के साथ ही केंद्र सरकार ने इसका समर्थन मूल्य घोषित कर दिया है, वहीं प्रदेश सरकार ने प्रति क्विंटल लागत भी तय कर दी है। लागत व समर्थन मूल्य में 491 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर है। धान के समर्थन मूल्य की बजाय इस बार प्रदेश के किसानों के लिए चौंकाने की बात धान की उत्पादन लागत में जबरदस्त बढ़ोतरी है। प्रदेश में कृषि विभाग ने प्रति क्विंटल धान का जो उत्पादन मूल्य रखा हैे, वह इस बार 1886 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि पिछले वर्ष यह 1757 रुपये प्रति क्विंटल था। विभाग की मानें तो धान के उत्पादन में इस बार प्रति क्विंटल 129 रुपये का खर्च ज्यादा आने वाला है।
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कृषि विभाग के अनुसार पिछले दो साल के मुकाबले धान की लागत में कमी आई है, लेकिन किसान संगठन इसे स्वीकार नहीं रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2010 की तुलना में वर्ष 2011 में धान की उत्पादन लागत में मात्र 73 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ौतरी दर्शायी गई थी। पिछले एक दशक में धान के उत्पादन लागत में सबसे ज्यादा 329 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ौतरी वर्ष 2008 में दर्ज की गई थी। पिछले वर्ष लागत में बढ़ोतरी 191 रुपये थी, जबकि इस बार यह 129 रुपए आंकी गई है।
धान के समर्थन मूल्य में प्रदेश की अनेदखी
केंद्र सरकार फसलों का समर्थन मूल्य तय करते समय प्रदेश सरकार से भाव तो मांगती है, लेकिन प्रदेश सरकार की सलाह पर गौर कतई नहीं करती। धान का समर्थन मूल्य तय करते समय इस बार भी ऐसा ही हुआ है। प्रदेश सरकार ने चालू वर्ष में धान का प्रति क्विंटल लागत मूल्य 1886 रुपये बताते हुए केंद्र से ए ग्रेड की धान का भाव 2025 रुपये क्विंटल मांगा था, लेकिन मिला केवल 1395 रुपये। लागत व भाव में जबरदस्त अंतर से किसान तो चिंतित हैं ही साथ में सरकार की समझ में भी यह नहीं आ रहा है कि आखिर किसानेां को खुश करें तो कैसे। कृषि विभाग हालंाकि किसानों से अपील कर रहा है कि धान की बजय अन्य नकदी फसलों की बिजाई पर जोर दें, पर किसान साल दर साल विभाग की इस सलाह को दर किनार कर रहे हैं।
खास बात है कि लागत किमत के आधार पर प्रदेश सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 2025 रुपये क्ंिवटल मांगा था, जो कि 1395 रुपये ही दिया है। खेती में प्रयुक्त होने वाली वस्तुओं के बढे़ दामों के साथ कमजोर मानसून ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
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प्रदेश में सावन भले ही बीत गया हो, पर मानसून का अभी इंतजार है, बावजूद इसके किसान धान को तैयार करने के काम में जुट गए हैं। चालू फसली सीजन में प्रदेश में 12 लाख 35 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई का टारगेट कृषि विभाग ने रखा है। धान के रोपाई क्षेत्र में इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष करीब 10 हजार हेक्टेयर की कटौती की गई है। धान की रोपाई शुरू होने के साथ ही केंद्र सरकार ने इसका समर्थन मूल्य घोषित कर दिया है, वहीं प्रदेश सरकार ने प्रति क्विंटल लागत भी तय कर दी है। लागत व समर्थन मूल्य में 491 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर है। धान के समर्थन मूल्य की बजाय इस बार प्रदेश के किसानों के लिए चौंकाने की बात धान की उत्पादन लागत में जबरदस्त बढ़ोतरी है। प्रदेश में कृषि विभाग ने प्रति क्विंटल धान का जो उत्पादन मूल्य रखा हैे, वह इस बार 1886 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि पिछले वर्ष यह 1757 रुपये प्रति क्विंटल था। विभाग की मानें तो धान के उत्पादन में इस बार प्रति क्विंटल 129 रुपये का खर्च ज्यादा आने वाला है।
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कृषि विभाग के अनुसार पिछले दो साल के मुकाबले धान की लागत में कमी आई है, लेकिन किसान संगठन इसे स्वीकार नहीं रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2010 की तुलना में वर्ष 2011 में धान की उत्पादन लागत में मात्र 73 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ौतरी दर्शायी गई थी। पिछले एक दशक में धान के उत्पादन लागत में सबसे ज्यादा 329 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ौतरी वर्ष 2008 में दर्ज की गई थी। पिछले वर्ष लागत में बढ़ोतरी 191 रुपये थी, जबकि इस बार यह 129 रुपए आंकी गई है।
धान के समर्थन मूल्य में प्रदेश की अनेदखी
केंद्र सरकार फसलों का समर्थन मूल्य तय करते समय प्रदेश सरकार से भाव तो मांगती है, लेकिन प्रदेश सरकार की सलाह पर गौर कतई नहीं करती। धान का समर्थन मूल्य तय करते समय इस बार भी ऐसा ही हुआ है। प्रदेश सरकार ने चालू वर्ष में धान का प्रति क्विंटल लागत मूल्य 1886 रुपये बताते हुए केंद्र से ए ग्रेड की धान का भाव 2025 रुपये क्विंटल मांगा था, लेकिन मिला केवल 1395 रुपये। लागत व भाव में जबरदस्त अंतर से किसान तो चिंतित हैं ही साथ में सरकार की समझ में भी यह नहीं आ रहा है कि आखिर किसानेां को खुश करें तो कैसे। कृषि विभाग हालंाकि किसानों से अपील कर रहा है कि धान की बजय अन्य नकदी फसलों की बिजाई पर जोर दें, पर किसान साल दर साल विभाग की इस सलाह को दर किनार कर रहे हैं।