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Sonipat News: दुश्मन 20 किमी अंदर तक घुस आए थे, पहाड़ पर जाकर दुश्मन को एलओसी के उस पर भगाया

Fri, 25 Jul 2025 11:02 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 25 Jul 2025 11:02 PM IST
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The enemy had penetrated 20 km inside, we went to the mountain and chased them away to the other side of the LOC
कपिल शर्मा
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गन्नौर(सोनीपत)। 17 जाट रेजिमेंट में हवलदार रहे खुबड़ू गांव के योद्धा चांद राम धनखड़ 10वीं पास करने के बाद 1978 में 18 वर्ष की उम्र में सेना में भर्ती हो गए थे। उनके घर में उनके चाचा महा सिंह सेना में थे और चांद राम के दोनों बड़े भाई भीम सिंह और सतपाल भी सेना में थे। उन्हें देखकर वह सेना में जाने के लिए प्रेरित हुए।
कारगिल में 7 जुलाई 1999 को वे घायल हो गए थे जबकि उनके साथी अनुज शहीद हो गए थे। घायल होने के बाद भी वे लड़ते रहे। उन्हें श्रीनगर के आर्मी हॉस्पिटल में दाखिल कराया और परिजनों को सूचित किया।
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यह कहानी है कारगिल के योद्धा चांद राम धनखड़ की। चांद राम ने बताया कि उनकी पोस्टिंग श्रीनगर थी। वह अपनी बटालियन के कमांडर थे और उन्हें सूचना मिली कि कारगिल में मास्क वेली के 4875 पॉइंट पर दुश्मनों ने कब्जा कर लिया। दुश्मनों ने 20 किलोमीटर अंदर तक कब्जा कर लिया था। इसके बाद वह अपनी बटालियन के साथ निकल पड़े।
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बड़े-बड़े पहाड़ उनकी राह रोक रहे थे और दुश्मन उन पर ऊपर से पत्थर गिराकर ऊपर आने से रोक रहे थे। वह छिपते हुए 4875 पॉइंट पर पहुंचे ओर दुश्मनों को एलओसी के उस पार भगा कर आए। उन्हें एलओसी के उस पार जाने की अनुमति नही थी। इस दौरान उन्होंने करीब 15 से 20 दुश्मनों को मार गिराया था।
उन्होंने बताया कि 4875 पॉइंट पर उनके पहुंचने से पहले उनकी पेट्रोलिंग टीम में 10 जवान शहीद हो चुके थे। उन्होंने बताया कि एलओसी पर उनकी बटालियन की दुश्मनों के साथ हाथापाई हुई। इस दौरान 7 जुलाई को एक दुश्मन ने स्नाइपर गन से गोली दाग दी। पहली गोली उसके साथी अनुज को लगी। दूसरी गोली उनके हेलमेट को पार कर उनके सिर में लगी।
वह घायल हुए और उसके बाद भी लड़ते रहे। साथियों ने उन्हें आर्मी हॉस्पिटल में दाखिल कराया लेकिन उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। इसके बाद परिजनों में मातम छा गया था। किस्मत ने उनका साथ दिया और उनकी जान बची। इसके बाद उन्होंने 45 दिन बाद अपनी ड्यूटी जॉइन की ओर उन्हें सेना ने अवाॅर्ड देकर सम्मानित किया।
चांद राम ने बताया ने बताया कि उन्हें जब होश आया और पता चला कि उन्होंने दुश्मनों पर विजय पा ली है तो खुशी हुई लेकिन मन में फिर भी मलाल छाया रहा कि वह घायल हो गए और दुश्मनों से पूरी जंग नहीं लड़ पाए।
योद्धा चांद राम बताते हैं कि जब वह दुश्मनों को भगाकर 4875 पॉइंट पर पहुंचे तो उनकी टीम ने कई दुश्मनों को मार गिराया था। जब वह ऊपर पहाड़ पर पहुंचे तो दुश्मनों के शव पड़े थे। उन्होंने दुश्मनों के शव चेक किए तो दुश्मनों ने शव के नीचे बम लगा रखे थे। इस दौरान बम फटे ओर उनकी टीम के 37 जवान शहीद हुए और 137 जवान घायल हो गए। फिर भी वह बिना डरे दुश्मनों के सामने डटे रहे और उन्हें एलओसी पार भेज कर रहे।


पिता को देख बेटा भी गया आर्मी में

चांद राम ने बताया कि उनका एक बेटा दिनेश है। दिनेश ने भी उनके कारनामे सुनकर 2003 में सेना जॉइन की ओर वह अब श्रीनगर के कुपवाड़ा में नियुक्त है।

पांच भाइयों से चौथे नंबर के चांद राम

चांद राम ने बताया कि उनके पिता लाल चंद किसान थे और वह 6 भाई-बहन हैं। उनके बड़े भाई सतपाल ओर भीम सिंह पहले से ही आर्मी में थे और उनके चाचा महा सिंह भी सेना में थे। उनके तीसरे नंबर के भाई खेती बाड़ी का काम करते हैं और सबसे छोटा भाई दिल्ली पुलिस में है।
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