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मूल्यांकन शिविर में नहीं पहुंचे चिकित्सक, ओपीडी में जाकर दिव्यांग विद्यार्थियों को करानी पड़ी जांच
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ओपीडी में नेत्र रोग विशेषज्ञ के कमरे के बाहर फर्श पर बैठीं छात्राएं। संवाद
- फोटो : Sonipat
सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में समग्र शिक्षा अभियान व राष्ट्रीय स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिकित्सा मूल्यांकन शिविर की शुरुआत हुुई। इसमें खरखौदा खंड से करीब 80 विद्यार्थी जांच कराने पहुंचे, लेकिन शिविर में कोई भी चिकित्सक नहीं पहुंचा, जिसके लिए शिक्षकों की मदद से दिव्यांग विद्यार्थियों को जांच के लिए ले जाया गया। समग्र शिक्षा अभियान के जिला परियोजना संयोजक नवीन गुलिया ने अस्पताल में अव्यवस्था देखकर नाराजगी जताई और मामले की जानकारी एडीसी शांतनू शर्मा को भेजी। बच्चों को ओपीडी परिसर में बैठने के लिए कुर्सियां तक नहीं मिलीं और उन्हें अभिभावकों के साथ फर्श पर बैठकर इंतजार करना पड़ा। दिव्यांग बच्चों को ओपीडी में लेकर जाने के लिए शिक्षक व्हील चेयर के लिए भटकते रहे।
सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में तीन मार्च तक चिकित्सा मूल्यांकन शिविर लगाया जाएगा। इसमें पहली से 12वीं कक्षा तक के 526 दिव्यांग विद्यार्थियों की चिकित्सा जांच होनी है। अस्पताल में शिविर के पहले दिन वीरवार को खरखौदा खंड के विभिन्न स्कूलों से 131 विद्यार्थियों को बुलाया गया था, लेकिन उनमें से करीब 80 विद्यार्थी जांच कराने पहुंचे। शिविर की शुरुआत 9 बजे होनी थी, लेकिन शिक्षा विभाग की तरफ से अधूरी तैयारी के चलते बच्चों की जांच सुबह 11 बजे शुरू हो सकी। शिविर में निरीक्षण करने पहुंचे जिला परियोजना संयोजक नवीन गुलिया को कुर्सियां खाली मिलीं। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों के बारे में पूछताछ की तो उन्हें बताया गया कि बच्चे ओपीडी के सामने बैठे हैं। जब वह ओपीडी परिसर में पहुंचे तो देखा कि विद्यार्थी बेंच के बजाय फर्श पर बैठे थे।
18 फरवरी को एडीसी ने ली थी बैठक
जिला परियोजना संयोजक नवीन गुलिया ने बताया कि शिविर के आयोजन को लेकर 18 फरवरी को एडीसी शांतनू शर्मा ने स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग के अधिकारियों संग बैठक की थी। उस दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों ने चिकित्सा मूल्यांकन शिविर में सभी चिकित्सकों की ड्यूटी लगाने का वादा किया था। वीरवार को लगे शिविर में चिकित्सक नहीं पहुंचे। नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों ने ओपीडी में दिव्यांग बच्चों को बुलाकर स्वास्थ्य की जांच की।
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विभाग ने बुलाए दो मनोरोग विशेषज्ञ, पहुंचा एक
जिला अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ तक नहीं है। मनोरोग विशेषज्ञ स्वास्थ्य विभाग की ओर से रोहतक से बुलाने पर पहुंचे थे। शिविर में एक ही मनोरोग विशेषज्ञ पहुंच सका। मनोरोग विशेषज्ञ को एक बच्चे की जांच करने के लिए कम से कम आधा घंटा लगाना पड़ता है। ऐसे में बच्चों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए रोहतक से एक और चिकित्सक बुलाने की मांग की है। सिविल सर्जन का कहना है कि शुक्रवार से शिविर में दो मनोरोग विशेषज्ञ सेवाएं देंगे।
एक नेत्र रोग विशेषज्ञ पर 150 से मरीजों की ओपीडी
नेत्र रोग विभाग में इस समय एक ही चिकित्सक डॉ. सुशील मानिकटालिया हैं। डॉ. लतिका दलाल खत्री मातृत्व अवकाश पर हैं। दूसरे डॉ. विकास चहल की ड्यूटी दूसरी जगह लगा दी गई और तीसरे डॉ. गिन्नी लांबा के पास उप चिकित्सा अधीक्षक का पद है, ऐसे में वे ओपीडी में मरीजों का इलाज नहीं कर पाते। इससे ओपीडी और ऑपरेशन का दबाव अकेली डॉ. सुशील पर है। विभाग की ओर से शिविर में भी उनकी ड्यूटी लगा दी है, जिससे बच्चों को अपनी नेत्र जांच कराने के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। जिला परियोजना संयोजक नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचे तो उन्होंने बताया कि उनके पास 150 मरीजों की ओपीडी होती है। पांच मरीजों के बाद दो विद्यार्थियों की नेत्र जांच कर सकेंगी। चिकित्सक की कमी होने के कारण परेशानी हुई।
तीन मार्च तक लगाया जाएगा शिविर
जिला अस्पताल में तीन मार्च तक शिविर लगाया जाएगा। पहले दिन वीरवार को खरखौदा खंड से 131 दिव्यांग विद्यार्थियों को बुलाया गया था, लेकिन 80 विद्यार्थी ही पहुंच सकें। 25 फरवरी को गोहाना खंड के 90 व कथूरा खंड के 83 दिव्यांग विद्यार्थियों को बुलाया गया है। 28 फरवरी को गन्नौर खंड के 138 विद्यार्थियों को शिविर में बुलाया जाएगा। इसके बाद 2 मार्च को मुंडलाना खंड के 98 व राई खंड के 96 विद्यार्थी बुलाए जाएंगे। तीन मार्च को सोनीपत खंड के 190 विद्यार्थियों की जांच की जाएगी। इसको लेकर शिक्षा विभाग की ओर से सभी स्कूल संचालकों को निर्धारित तिथि पर सुबह 9 बजे दिव्यांग बच्चों को ले जाने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
जांच के बाद दिए जाते हैं चिकित्सीय प्रमाणपत्र
शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए हर वर्ष चिकित्सा मूल्यांकन शिविर लगाया जाता है। चिकित्सकों द्वारा परीक्षण करने के बाद उनकी दिव्यांगता से जुड़े चिकित्सीय प्रमाणपत्र दिए जाते हैं। इसके बाद श्रवण बाधितों को कान में लगाने की मशीन, अन्य दिव्यांग विद्यार्थियों को व्हील चेयर, बैसाखी समेत अन्य सहायक उपकरण दिए जाएंगे। साथ ही दिव्यांग विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति में सुविधा, रेलवे पास बनवाने में सुविधा मिलती है।
-
वर्जन
शिविर में सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से बारहवीं तक पढ़ने वाले दिव्यांग छात्रों की स्वास्थ्य जांच कर प्रमाणपत्र व अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। शिविर के दौरान लगे टेंट में कोई चिकित्सक नहीं मिला। अस्पताल में फर्श पर बैठकर बच्चों को जांच करानी पड़ी। इसको लेकर एडीसी व सिविल सर्जन को अवगत करा दिया गया है।
- नवीन गुलिया, जिला परियोजना संयोजक, समग्र शिक्षा अभियान
वर्जन
ओपीडी में जाकर मुआयना किया गया। शिविर के दौरान बच्चों को आईं दिक्कतों को दूर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। दिव्यांग बच्चों के लिए अलग से व्हीलचेयर उपलब्ध करा दी जाएगी। नेत्र जांच करने की मशीन ओपीडी में स्थापित है, जिसके चलते बाहर जाकर जांच नहीं की जा सकती। ऐसे में ओपीडी के अंदर ही दिव्यांग बच्चों की जांच की जाएगी।
- डॉ. दिनेश छिल्लर, उप सिविल सर्जन कम नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम
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सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में तीन मार्च तक चिकित्सा मूल्यांकन शिविर लगाया जाएगा। इसमें पहली से 12वीं कक्षा तक के 526 दिव्यांग विद्यार्थियों की चिकित्सा जांच होनी है। अस्पताल में शिविर के पहले दिन वीरवार को खरखौदा खंड के विभिन्न स्कूलों से 131 विद्यार्थियों को बुलाया गया था, लेकिन उनमें से करीब 80 विद्यार्थी जांच कराने पहुंचे। शिविर की शुरुआत 9 बजे होनी थी, लेकिन शिक्षा विभाग की तरफ से अधूरी तैयारी के चलते बच्चों की जांच सुबह 11 बजे शुरू हो सकी। शिविर में निरीक्षण करने पहुंचे जिला परियोजना संयोजक नवीन गुलिया को कुर्सियां खाली मिलीं। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों के बारे में पूछताछ की तो उन्हें बताया गया कि बच्चे ओपीडी के सामने बैठे हैं। जब वह ओपीडी परिसर में पहुंचे तो देखा कि विद्यार्थी बेंच के बजाय फर्श पर बैठे थे।
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18 फरवरी को एडीसी ने ली थी बैठक
जिला परियोजना संयोजक नवीन गुलिया ने बताया कि शिविर के आयोजन को लेकर 18 फरवरी को एडीसी शांतनू शर्मा ने स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग के अधिकारियों संग बैठक की थी। उस दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों ने चिकित्सा मूल्यांकन शिविर में सभी चिकित्सकों की ड्यूटी लगाने का वादा किया था। वीरवार को लगे शिविर में चिकित्सक नहीं पहुंचे। नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों ने ओपीडी में दिव्यांग बच्चों को बुलाकर स्वास्थ्य की जांच की।
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विभाग ने बुलाए दो मनोरोग विशेषज्ञ, पहुंचा एक
जिला अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ तक नहीं है। मनोरोग विशेषज्ञ स्वास्थ्य विभाग की ओर से रोहतक से बुलाने पर पहुंचे थे। शिविर में एक ही मनोरोग विशेषज्ञ पहुंच सका। मनोरोग विशेषज्ञ को एक बच्चे की जांच करने के लिए कम से कम आधा घंटा लगाना पड़ता है। ऐसे में बच्चों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए रोहतक से एक और चिकित्सक बुलाने की मांग की है। सिविल सर्जन का कहना है कि शुक्रवार से शिविर में दो मनोरोग विशेषज्ञ सेवाएं देंगे।
एक नेत्र रोग विशेषज्ञ पर 150 से मरीजों की ओपीडी
नेत्र रोग विभाग में इस समय एक ही चिकित्सक डॉ. सुशील मानिकटालिया हैं। डॉ. लतिका दलाल खत्री मातृत्व अवकाश पर हैं। दूसरे डॉ. विकास चहल की ड्यूटी दूसरी जगह लगा दी गई और तीसरे डॉ. गिन्नी लांबा के पास उप चिकित्सा अधीक्षक का पद है, ऐसे में वे ओपीडी में मरीजों का इलाज नहीं कर पाते। इससे ओपीडी और ऑपरेशन का दबाव अकेली डॉ. सुशील पर है। विभाग की ओर से शिविर में भी उनकी ड्यूटी लगा दी है, जिससे बच्चों को अपनी नेत्र जांच कराने के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। जिला परियोजना संयोजक नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचे तो उन्होंने बताया कि उनके पास 150 मरीजों की ओपीडी होती है। पांच मरीजों के बाद दो विद्यार्थियों की नेत्र जांच कर सकेंगी। चिकित्सक की कमी होने के कारण परेशानी हुई।
तीन मार्च तक लगाया जाएगा शिविर
जिला अस्पताल में तीन मार्च तक शिविर लगाया जाएगा। पहले दिन वीरवार को खरखौदा खंड से 131 दिव्यांग विद्यार्थियों को बुलाया गया था, लेकिन 80 विद्यार्थी ही पहुंच सकें। 25 फरवरी को गोहाना खंड के 90 व कथूरा खंड के 83 दिव्यांग विद्यार्थियों को बुलाया गया है। 28 फरवरी को गन्नौर खंड के 138 विद्यार्थियों को शिविर में बुलाया जाएगा। इसके बाद 2 मार्च को मुंडलाना खंड के 98 व राई खंड के 96 विद्यार्थी बुलाए जाएंगे। तीन मार्च को सोनीपत खंड के 190 विद्यार्थियों की जांच की जाएगी। इसको लेकर शिक्षा विभाग की ओर से सभी स्कूल संचालकों को निर्धारित तिथि पर सुबह 9 बजे दिव्यांग बच्चों को ले जाने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
जांच के बाद दिए जाते हैं चिकित्सीय प्रमाणपत्र
शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए हर वर्ष चिकित्सा मूल्यांकन शिविर लगाया जाता है। चिकित्सकों द्वारा परीक्षण करने के बाद उनकी दिव्यांगता से जुड़े चिकित्सीय प्रमाणपत्र दिए जाते हैं। इसके बाद श्रवण बाधितों को कान में लगाने की मशीन, अन्य दिव्यांग विद्यार्थियों को व्हील चेयर, बैसाखी समेत अन्य सहायक उपकरण दिए जाएंगे। साथ ही दिव्यांग विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति में सुविधा, रेलवे पास बनवाने में सुविधा मिलती है।
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शिविर में सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से बारहवीं तक पढ़ने वाले दिव्यांग छात्रों की स्वास्थ्य जांच कर प्रमाणपत्र व अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। शिविर के दौरान लगे टेंट में कोई चिकित्सक नहीं मिला। अस्पताल में फर्श पर बैठकर बच्चों को जांच करानी पड़ी। इसको लेकर एडीसी व सिविल सर्जन को अवगत करा दिया गया है।
- नवीन गुलिया, जिला परियोजना संयोजक, समग्र शिक्षा अभियान
वर्जन
ओपीडी में जाकर मुआयना किया गया। शिविर के दौरान बच्चों को आईं दिक्कतों को दूर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। दिव्यांग बच्चों के लिए अलग से व्हीलचेयर उपलब्ध करा दी जाएगी। नेत्र जांच करने की मशीन ओपीडी में स्थापित है, जिसके चलते बाहर जाकर जांच नहीं की जा सकती। ऐसे में ओपीडी के अंदर ही दिव्यांग बच्चों की जांच की जाएगी।
- डॉ. दिनेश छिल्लर, उप सिविल सर्जन कम नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम