{"_id":"69fc77693de75bf3990f22fa","slug":"the-decision-of-the-lower-court-was-set-aside-and-the-verdict-was-given-in-favour-of-the-electricity-corporation-sonipat-news-c-197-1-snp1007-153583-2026-05-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonipat News: निचली अदालत के फैसले को रद्द कर बिजली निगम के हक में सुनाया फैसला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonipat News: निचली अदालत के फैसले को रद्द कर बिजली निगम के हक में सुनाया फैसला
Thu, 07 May 2026 04:58 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 07 May 2026 04:58 PM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। बिजली चोरी के मामले में सेशन जज जगजीत सिंह की कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए बिजली विभाग के हक में फैसला सुनाया है। साथ ही हरिराम को इस अपील का खर्च वहन करने का आदेश दिया है। उक्त मामले में 2 जनवरी 2025 को गन्नौर के सिविल जज सागर शर्मा की कोर्ट ने वादी हरिराम के मुकदमे को आंशिक रूप से स्वीकार किया था।
गांव चिरसमी निवासी हरी राम ने कहा कि वह नियमित बिजली बिल भरते हैं। उन्होंने 2018 में 3 किलोवाट का सोलर पैनल लगवाया था। 26 अप्रैल 2022 को उन्हें नोटिस मिला जिसमें 52,452 का जुर्माना और 8,000 कंपाउंडिंग फीस मांगी गई थी।
बिजली विभाग ने तर्क दिया था कि 29 मई 2018 को निरीक्षण के दौरान मिला था कि हरिराम सीधे केबल में कट लगाकर बिजली चोरी कर रहे थे। मीटर को बाईपास कर दिया गया था। विभाग ने कहा कि यह बिजली चोरी का मामला है। इसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।
विज्ञापन
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि बिजली अधिनियम 2003 के तहत बिजली चोरी से संबंधित मामलों में सिविल कोर्ट का क्षेत्राधिकार नहीं है। निचली अदालत ने क्षेत्राधिकार को समझने में गलती की थी। चूंकि यह बिजली चोरी का मामला था इसलिए सिविल कोर्ट इस पर सुनवाई नहीं कर सकता था।
अदालत ने बिजली विभाग की अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया। साथ ही हरिराम के मुकदमे को खारिज कर दिया है।
विज्ञापन
सोनीपत। बिजली चोरी के मामले में सेशन जज जगजीत सिंह की कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए बिजली विभाग के हक में फैसला सुनाया है। साथ ही हरिराम को इस अपील का खर्च वहन करने का आदेश दिया है। उक्त मामले में 2 जनवरी 2025 को गन्नौर के सिविल जज सागर शर्मा की कोर्ट ने वादी हरिराम के मुकदमे को आंशिक रूप से स्वीकार किया था।
गांव चिरसमी निवासी हरी राम ने कहा कि वह नियमित बिजली बिल भरते हैं। उन्होंने 2018 में 3 किलोवाट का सोलर पैनल लगवाया था। 26 अप्रैल 2022 को उन्हें नोटिस मिला जिसमें 52,452 का जुर्माना और 8,000 कंपाउंडिंग फीस मांगी गई थी।
विज्ञापन
बिजली विभाग ने तर्क दिया था कि 29 मई 2018 को निरीक्षण के दौरान मिला था कि हरिराम सीधे केबल में कट लगाकर बिजली चोरी कर रहे थे। मीटर को बाईपास कर दिया गया था। विभाग ने कहा कि यह बिजली चोरी का मामला है। इसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।
विज्ञापन
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि बिजली अधिनियम 2003 के तहत बिजली चोरी से संबंधित मामलों में सिविल कोर्ट का क्षेत्राधिकार नहीं है। निचली अदालत ने क्षेत्राधिकार को समझने में गलती की थी। चूंकि यह बिजली चोरी का मामला था इसलिए सिविल कोर्ट इस पर सुनवाई नहीं कर सकता था।
अदालत ने बिजली विभाग की अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया। साथ ही हरिराम के मुकदमे को खारिज कर दिया है।