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यमुना में छोड़ा 1.89 क्यूसेक पानी, जलस्तर बढ़ने से 15 गांवों की चिंता बढ़ी
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यमुना में जलस्तर बढने से डूबने लगे पुल के पिलर
- फोटो : Sonipat
सोनीपत। पहाड़ों पर लगातार बारिश होने के कारण यमुना में जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया है। जहां एक दिन पहले ही करीब 1.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, वहीं अब हथिनीकुंड बैराज से 1.89 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यमुना में जलस्तर बढ़ने से 15 गांवों के लोगों की चिंता भी बढ़ने लगी है।
दो साल पहले भी यमुना के उफान पर आने से बाढ़ के हालात पैदा हो गए थे और 2000 एकड़ से ज्यादा फसल बर्बाद हो गई थी। हालांकि यमुना का जलस्तर अभी ऐसी स्थिति तक नहीं पहुंचा है, जिससे किसी तरह का कोई नुकसान हो सके। लेकिन जिस तरह से अचानक जलस्तर बढ़ा है, वह कई गांवों के खेतों में घुसकर फसल खराब कर सकता है। यमुना के किनारों पर जिन जगहों पर ठोकरें टूटी हुई है, वहां बनवाई भी नहीं गई है। यमुना में दो दिन पहले हथनीकुंड बैराज से लगभग 1.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। यह पानी कुछ घंटों के अंतराल में कई बार में छोड़ा गया था जो यहां शनिवार को पहुंचा है। यह पानी सोनीपत पहुंचने से यमुना का जलस्तर काफी बढ़ गया है। लेकिन यह पानी कुछ घंटों के अंतराल में कई बार छोड़ा गया था तो इसलिए खेतों में घुसने का कोई डर नहीं है।
वहीं अब दोबारा से शनिवार को हथिनीकुंड बैराज से 1.89 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जहां पहले ही डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़ने से यमुना में फैल गया था, वहीं अब दोबारा पानी छोड़े जाने से यमुना किनारे के लगभग 15 गांवों के लोगों की चिंता बढ़ने लगी है। जिनमें गढ़ी असदपुर, मनौली, बड़ौली, बेगा, पीरगढ़ी, गढ़ी बिलंदा, ग्यासपुर, पबनेरा, चंदौली, टिकौला, गढ़ मिर्कपुर, जाजल आदि शामिल हैं। भैरा बांकीपुर में केवल ठोकर लगाकर काम पूरा बता दिया गया है। जबकि गढ़ मिर्कपुर, जाजल समेत अन्य कई जगहों पर यमुना के किनारों पर अभी तक ठोकरें नहीं लगी है। जिससे यमुना का जलस्तर पहले की तरह बढ़ता है तो इस बार भी फसल बर्बाद होने से नहीं रोकी जा सकती।
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वर्जन
यमुना में जलस्तर पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों को ध्यान रखने के लिए कहा गया है। हालांकि अभी तक जितना पानी छोड़ा गया है, उससे किसी तरह का खतरा नहीं है। अगर ज्यादा पानी छोड़ा जाता है तो उसके बाद भी बचाव के लिए प्रशासन ने पूरी व्यवस्था की हुई है। यमुना में कई जगह ठोकर लगवाई गई थी तो फसलों को बचाने के लिए भी पूरी तैयारी है।
- शशि वसुंधरा, एसडीएम सोनीपत
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दो साल पहले भी यमुना के उफान पर आने से बाढ़ के हालात पैदा हो गए थे और 2000 एकड़ से ज्यादा फसल बर्बाद हो गई थी। हालांकि यमुना का जलस्तर अभी ऐसी स्थिति तक नहीं पहुंचा है, जिससे किसी तरह का कोई नुकसान हो सके। लेकिन जिस तरह से अचानक जलस्तर बढ़ा है, वह कई गांवों के खेतों में घुसकर फसल खराब कर सकता है। यमुना के किनारों पर जिन जगहों पर ठोकरें टूटी हुई है, वहां बनवाई भी नहीं गई है। यमुना में दो दिन पहले हथनीकुंड बैराज से लगभग 1.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। यह पानी कुछ घंटों के अंतराल में कई बार में छोड़ा गया था जो यहां शनिवार को पहुंचा है। यह पानी सोनीपत पहुंचने से यमुना का जलस्तर काफी बढ़ गया है। लेकिन यह पानी कुछ घंटों के अंतराल में कई बार छोड़ा गया था तो इसलिए खेतों में घुसने का कोई डर नहीं है।
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वहीं अब दोबारा से शनिवार को हथिनीकुंड बैराज से 1.89 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जहां पहले ही डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़ने से यमुना में फैल गया था, वहीं अब दोबारा पानी छोड़े जाने से यमुना किनारे के लगभग 15 गांवों के लोगों की चिंता बढ़ने लगी है। जिनमें गढ़ी असदपुर, मनौली, बड़ौली, बेगा, पीरगढ़ी, गढ़ी बिलंदा, ग्यासपुर, पबनेरा, चंदौली, टिकौला, गढ़ मिर्कपुर, जाजल आदि शामिल हैं। भैरा बांकीपुर में केवल ठोकर लगाकर काम पूरा बता दिया गया है। जबकि गढ़ मिर्कपुर, जाजल समेत अन्य कई जगहों पर यमुना के किनारों पर अभी तक ठोकरें नहीं लगी है। जिससे यमुना का जलस्तर पहले की तरह बढ़ता है तो इस बार भी फसल बर्बाद होने से नहीं रोकी जा सकती।
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यमुना में जलस्तर पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों को ध्यान रखने के लिए कहा गया है। हालांकि अभी तक जितना पानी छोड़ा गया है, उससे किसी तरह का खतरा नहीं है। अगर ज्यादा पानी छोड़ा जाता है तो उसके बाद भी बचाव के लिए प्रशासन ने पूरी व्यवस्था की हुई है। यमुना में कई जगह ठोकर लगवाई गई थी तो फसलों को बचाने के लिए भी पूरी तैयारी है।
- शशि वसुंधरा, एसडीएम सोनीपत