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Sonipat News: दमघोंटू होने लगी हवा... दिनभर छाया रहा स्मॉग, शाम को ज्यादा गहराया

Mon, 18 Nov 2024 03:40 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Mon, 18 Nov 2024 03:40 AM IST
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The air started becoming suffocating... Smog prevailed throughout the day, intensified in the evening
सोनीपत। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल सोनीपत में प्रदूषण बेहद खराब स्थिति में बना हुआ है। सुबह-शाम के साथ ही रविवार रात को भी स्मॉग छाने से लोगों की परेशानी बढ़ गई। कोहरा और उसमें शामिल धूल, धुएं के कणों के कारण सांस लेने में परेशानी होने लगी है। साथ ही गले में खराश महसूस होने लगी है। कई इलाकों में स्मॉग के कारण हवा दमघोंटू बनी रही।
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मौसम में सर्दी बढ़ने के साथ ही प्रदूषण का स्तर भी बढ़ने लगा है। सुबह-शाम तो स्मॉग छा जाता है। रविवार रात को इससे ज्यादा दिक्कत हुई। दिन में हवा चलने से मौसम थोड़ा साफ हो गया था, लेकिन शाम होते ही यह समस्या फिर बढ़ने लगी। जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ रहा है। यह बेहद खराब स्तर पर जा चुका है। रविवार सुबह एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 360 रहा, शाम चार बजे थोड़ा घटकर 339 दर्ज किया गया। रात आठ बजे एक्यूआई 367 पर पहुंच गया। सर्दी बढ़ने के साथ ही प्रदूषण के स्तर में और इजाफा होने का आशंका है।
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पीएम-10 का स्तर 451 पहुंचा

जिले में रविवार को पीएम-10 का स्तर 451 व पीएम 2.5 का स्तर 453 तक पहुंच गया है। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। इसमें लोगों को परेशानी होने लगती है।
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बुजुर्गों को घर रहने की दी जा रही सलाह

बढ़ता प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। इसमें बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। स्मॉग के साथ अनेक प्रकार के प्रदूषित तत्व मिले होते हैं। यह शरीर में जाकर सांस से संबंधित रोग के कारण बनते हैं। चिकित्सक स्मॉग में बाहर न निकलने की हिदायत देने लगे हैं। वह सुबह-शाम घूमने वालों को सावधानी बरतने की कह रहे हैं। साथ ही लोगों को बेहतर क्वालिटी का मास्क लगाने के लिए हिदायत दे रहे हैं।



प्रदूषण की वजह से अस्पताल में रोजाना पहुंच रहे सांस के 150 मरीज

जिले में प्रदूषण का स्तर ज्यादा बढऩे के कारण जिला अस्पताल में सांस के मरीज बढ़े हैं। सांस के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से सबसे अधिक बुजुर्ग इसका शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल में रोज 130-150 मरीज रोजाना इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। पहले 70 से 80 सांस के मरीज पहुंचते थे।



सांस की नली आ जाती है सूजन

छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. जेएस पूनिया के अनुसार बढ़ते प्रदूषण के कारण सांस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्थमा में सांस नली या इससे जुड़े हिस्सों में सूजन आ जाती है। इसके चलते फेफड़ों में हवा जाने में रुकावट पैदा होती है। इससे सांस लेने में परेशानी होने लगती है। प्रदूषण से बुजुर्गों में अस्थमा का अटैक आने की आशंका बढ़ जाती है। अटैक आने पर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हो जाती है।


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-प्रदूषण फैलाने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। वहीं पराली जलाने वालों पर कृषि विभाग कार्रवाई कर रहा है। टीम भी लगातार प्रदूषण फैलाने वालों पर शिकंजा कस रही है।

-प्रदीप सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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