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घड़वाल गांव का स्टेडियम बना पशुबाड़ा, अब 42 लाख रुपये से बनेगा हाल

Mon, 15 May 2017 12:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो गोहाना।
अमर उजाला ब्यूरो गोहाना। Updated Mon, 15 May 2017 12:44 AM IST
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गांव के स्टेडियम में घूम रहे पशु व पड़ा मल। - फोटो : bureau
15 लाख की राशि शुरू हुआ घड़वाल गांव का खेल स्टेडियम अब पशुबाड़ा बनकर रह गया है। जहां बच्चों को खेल का अभ्यास करना चाहिए, वहां दिन भर पशु आराम करते हैं। वहीं, कई ग्रामीणों ने स्टेडियम में पशुओं के मल के ढेर लगा लिए हैं। इससे विश्व स्तर के खिलाड़ी तैयार करने की योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। गांव के लोगों का आरोप है कि सरकार ने स्टेडियम बनाने की घोषणा तो कर दी, लेकिन उनमें न सुविधाएं दीं और न कोच उपलब्ध कराए। ऐसे में नए खिलाड़ी कैसे तैयार हो सकते हैं। वहीं, सरपंच का कहना है कि स्टेडियम में मल्टीपर्पज हाल बनाने के लिए 42 लाख रुपये की ग्रांट जारी की गई है। जल्द ही स्टेडियम की हालत में सुधार आएगा।
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तत्कालीन कांग्रेस सरकार की ओर से 2011 में घड़वाल गांव में खेल स्टेडियम का निर्माण शुरू किया था। उस समय बरोदा के विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा के प्रयासों से स्टेडियम के लिए सरकार की ओर से 15 लाख रुपये की ग्रांट जारी की गई थी। इसमें से 12 लाख रुपये की राशि खर्च करके चार एकड़ जमीन पर बनने वाले खेल स्टेडियम की दीवार व मेन गेट लगाया गया था। उसके बाद किसी ने इसी सुध नहीं ली तथा धीरे-धीरे स्टेडियम की दीवार गिरने लगी व गांव के लोगों ने स्टेडियम को पशुबाड़ा बना दिया।
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सरकार की अनदेखी के कारण हालत हुई बदतर
गांव के लोगों का कहना है कि सरकार की अनदेखी के कारण स्टेडियम के हालत बदतर हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार द्वारा न तो यहां हाल का निर्माण कराया गया और न ही कोच भरती किए गए, ताकि ग्रामीण बच्चों में खेलों के प्रति रुचि पैदा हो सके। गांव के लोगों ने स्टेडियम को खाली देखकर यहां गोबर डालना शुरू कर दिया तथा अपने पशुओं को यहां लाकर छोड़ देते हैं।
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लाखों रुपये लगने के बाद भी स्टेडियम में नहीं है कोई व्यवस्था
ग्रामीण रवि सिवाच ने कहा कि स्टेडियम में जब भी खेलने के लिए आते हैं तो भैंसे खड़ी मिलती हैं। साथ ही महिलाएं खाद बनाने को स्टेडियम के अंदर ही पशुओं का मल इकट्ठा कर रही हैं। अब स्टेडियम में न तो खेलने की जगह है और न ही कोई व्यवस्था। खिलाड़ियों को खेलने के लिए या तो स्कूल जाना पड़ता या फिर गांव से दूर दराज के क्षेत्रों में जाना पड़ता है। इस कारण गांव में खिलाड़ियों की नई पौध तैयार नहीं हो रही है।
युवा खिलाड़ी हो रहे परेशान
ग्रामी टेकराम शर्मा ने कहा कि गांव में जब स्टेडियम का काम शुरू हुआ था तब सोच रहे थे कि बच्चों की कई सालों से खेलने के परेशानी दूर हो जाएगी। क्या पता था समस्या ज्यों की त्यों ही बनी रहेगी। स्टेडियम पर पिछली सरकार ने लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी स्टेडियम का पूरा कार्य नहीं हो सका, जिससे खिलाड़ियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

गांव में स्टेेडियम में मल्टीपर्पज हाल बनाने के लिए 42 लाख रुपये की ग्रांट जारी की है। इस राशि से जल्दी ही गांव में स्टेडियम की हालत सुुधारी जाएगी तथा पशुओं को स्टेडियम से बाहर निकाला जाएगा। जिन लोगों ने पशुओं का मल डाल रखा है, उन्हें पहले ही मौखिक रूप से निर्देश दिए जा चुके हैैं।
-नवीन कुमार, सरपंच घड़वाल।
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