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छह साल पहले नलबंदी, पेट बड़ा तो जांच में निकली गर्भवती
अमर उजाला ब्यूरो गोहाना।
Updated Mon, 27 Feb 2017 11:52 PM IST
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अस्पताल में परेशान बैठी पीड़ित महिला।
- फोटो : bureau
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गांव कथूरा की एक महिला ने सामान्य अस्पताल में गांव की एएनएम की सलाह पर नलबंदी करवाने के छह साल बीत जाने के बाद महिला फिर से चार माह की गर्भवती हो गई। तीन माह तक उसे पता तक नहीं चला कि वह गर्भवती है। जब पेट का आकार बढ़ा तो उसने जांच कराई। जांच कराने पर उसे पता चला कि वह गर्भवती है।
सोमवार को गोहाना के सरकारी अस्पताल में पहुंची महिला प्रीति ने बताया कि उसने करीब छह साल पहले नलबंदी का ऑपरेशन कराया था। अब अचानक उसके पेट का आकर बढ़ने लगा तो उसने जांच कराई, जिससे पता चला कि वह गर्भवती है। वह बनवासा पीएचसी में गई, जहां उसे कोई संतुष्ट जवाब नहीं मिला। अब वह दो दिन से सामान्य अस्पताल के चक्कर लगा रही है। कोई अधिकारी या कर्मचारी बताने के लिए तैयार नहीं की ऑपरेशन किसने किया था और अब इस समस्या का क्या समाधान होगा।
महिला का कहना है कि उसका एक लड़का और एक लड़की है। 12 दिसंबर 2011 में उसने सामान्य अस्पताल में नलबंदी करवा ली थी। अब चिकित्सकों ने उसकी समस्या का समाधान नहीं किया तो वह कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होगी।
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मामला काफी पुराना है। रिकॉर्ड देखने व महिला की जांच कराने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
-डॉ. दिनेश छिल्लर, एसएमओ
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सोमवार को गोहाना के सरकारी अस्पताल में पहुंची महिला प्रीति ने बताया कि उसने करीब छह साल पहले नलबंदी का ऑपरेशन कराया था। अब अचानक उसके पेट का आकर बढ़ने लगा तो उसने जांच कराई, जिससे पता चला कि वह गर्भवती है। वह बनवासा पीएचसी में गई, जहां उसे कोई संतुष्ट जवाब नहीं मिला। अब वह दो दिन से सामान्य अस्पताल के चक्कर लगा रही है। कोई अधिकारी या कर्मचारी बताने के लिए तैयार नहीं की ऑपरेशन किसने किया था और अब इस समस्या का क्या समाधान होगा।
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महिला का कहना है कि उसका एक लड़का और एक लड़की है। 12 दिसंबर 2011 में उसने सामान्य अस्पताल में नलबंदी करवा ली थी। अब चिकित्सकों ने उसकी समस्या का समाधान नहीं किया तो वह कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होगी।
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मामला काफी पुराना है। रिकॉर्ड देखने व महिला की जांच कराने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
-डॉ. दिनेश छिल्लर, एसएमओ