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तीन गुना तक दूषित हवा में सांस ले रहे हैं हम
अमर उजाला ब्यूरो अंकित चौहान।
Updated Thu, 02 Mar 2017 12:17 AM IST
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वायु प्रदूषण की तस्वीर
- फोटो : bureau
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जिले के लोग तीन गुना ज्यादा दूषित हवा में सांस ले रहे हैं। जिस हवा में धूल के कण 100 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब होने चाहिए, वह 390 तक पहुंच जाते हैं। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से जब से जिले में वायु प्रदूषण की जांच करनी शुरू की गई है, उसमें सबसे ज्यादा पहली ही बार अप्रैल 2016 में 390 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब का प्रदूषण मिला है। वहीं, सबसे ज्यादा स्थिति पिछले महीने फरवरी 17 में सुधरी है और हवा में केवल 187 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब का प्रदूषण मिला है। हालांकि प्रदूषण विभाग के अधिकारियों का दावा है कि गर्मी में गेहूं कटाई के समय हवा में सबसे ज्यादा प्रदूषण होता है तो सर्दी के महीनों में हवा स्थिर रहने के कारण प्रदूषण ज्यादा रहता है।
अभी तक कोई भी माह सामान्य नहीं
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से सभी जिलों में वायु प्रदूषण की जांच की जाती है। उसके लिए जिले की सात अलग-अलग जगहों से सैंपल लिया जाता है और उसकी लैब में जांच की जाती है। उसमें देखा जाता है कि वायु प्रदूषण कितना बढ़ रहा है या कितना कम हो रहा है। इसमें भी पीएम 2.5 (परटिक्यूलेट मैटर) व पीएम 10 की उपलब्धता देखी जाती है और उनसे ही जिले का अनुमानित प्रदूषण तय किया जाता है। विभाग की ओर से अप्रैल 2016 से इसकी शुरुआत की गई, जिसमें चौंकाने वाली चीजें सामने आईं और वायु का प्रदूषण तीन गुणा तक ज्यादा मिला। हालांकि यह प्रदूषण कम व ज्यादा होता रहता है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई महीना नहीं आया है, जिसमें लोग साफ हवा में सांस ले सके।
इस तरह पता चलता है वायु प्रदूषण
प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से सैंपल लेकर यह जांच की जाती है कि उसमें पीएम 2.5 व पीएम 10 कितना है। पीएम 2.5 सामान्य तौर पर 60 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब होना चाहिए जो 195.2 तक पहुंच जाता है। इस तरह ही पीएम 10 सामान्य तौर पर 100 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब होना चाहिए जो 390.6 तक पहुंच जाता है और अधिकतर समय 300 के पार ही रहता है।
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इन कारणों से बढ़ता है प्रदूषण
वायु प्रदूषण गेहूं कटाई के समय सबसे ज्यादा रहता है, क्योंकि गेहूं थ्रेसिंग के समय हवा में धूल के कण मिल जाते हैं और उससे वायु प्रदूषण ज्यादा बढ़ता है। इसके अलावा रास्तों से उड़ने वाली धूल के कण भी हवा में मिलकर वायु प्रदूषण बढ़ जाता है। वाहनों के अलावा फैक्ट्रियों से धुआं निकलने के कारण भी वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। कार्बन के कण हवा में मिलकर उसे दूषित कर रहे है।
महीना पीएम 2.5 पीएम 10
अप्रैल 16 195.2 390.6
मई 16 185.04 383.53
जून 16 168.32 321.87
जुलाई 16 120.78 248.12
अगस्त 16 105.63 198.25
सितंबर 16 116.32 230.18
अक्तूबर 16 124.18 272.36
नवंबर 16 167.25 315.18
जनवरी 17 161.10 298.48
फरवरी 17 94.87 187.23
सामान्य स्थिति में पीएम 2.5 होना चाहिए 60 और 100 होना चाहिए पीएम 10 का स्तर।
दिसंबर में जांच नहीं हो सकी थी।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद हवा में प्रदूषण जांचने के लिए सैंपल लिए जाते हैं जो कभी कम हो जाता है तो कभी ज्यादा हो जाता है। जिस तरह से धूल उड़ती है और वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, उससे ही वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। गर्मी में खेती कार्य होने के अलावा सर्दी में कण स्थिर रहने से भी प्रदूषण ज्यादा हो जाता है।
-निर्मल कश्यप, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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अभी तक कोई भी माह सामान्य नहीं
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से सभी जिलों में वायु प्रदूषण की जांच की जाती है। उसके लिए जिले की सात अलग-अलग जगहों से सैंपल लिया जाता है और उसकी लैब में जांच की जाती है। उसमें देखा जाता है कि वायु प्रदूषण कितना बढ़ रहा है या कितना कम हो रहा है। इसमें भी पीएम 2.5 (परटिक्यूलेट मैटर) व पीएम 10 की उपलब्धता देखी जाती है और उनसे ही जिले का अनुमानित प्रदूषण तय किया जाता है। विभाग की ओर से अप्रैल 2016 से इसकी शुरुआत की गई, जिसमें चौंकाने वाली चीजें सामने आईं और वायु का प्रदूषण तीन गुणा तक ज्यादा मिला। हालांकि यह प्रदूषण कम व ज्यादा होता रहता है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई महीना नहीं आया है, जिसमें लोग साफ हवा में सांस ले सके।
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इस तरह पता चलता है वायु प्रदूषण
प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से सैंपल लेकर यह जांच की जाती है कि उसमें पीएम 2.5 व पीएम 10 कितना है। पीएम 2.5 सामान्य तौर पर 60 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब होना चाहिए जो 195.2 तक पहुंच जाता है। इस तरह ही पीएम 10 सामान्य तौर पर 100 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब होना चाहिए जो 390.6 तक पहुंच जाता है और अधिकतर समय 300 के पार ही रहता है।
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इन कारणों से बढ़ता है प्रदूषण
वायु प्रदूषण गेहूं कटाई के समय सबसे ज्यादा रहता है, क्योंकि गेहूं थ्रेसिंग के समय हवा में धूल के कण मिल जाते हैं और उससे वायु प्रदूषण ज्यादा बढ़ता है। इसके अलावा रास्तों से उड़ने वाली धूल के कण भी हवा में मिलकर वायु प्रदूषण बढ़ जाता है। वाहनों के अलावा फैक्ट्रियों से धुआं निकलने के कारण भी वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। कार्बन के कण हवा में मिलकर उसे दूषित कर रहे है।
महीना पीएम 2.5 पीएम 10
अप्रैल 16 195.2 390.6
मई 16 185.04 383.53
जून 16 168.32 321.87
जुलाई 16 120.78 248.12
अगस्त 16 105.63 198.25
सितंबर 16 116.32 230.18
अक्तूबर 16 124.18 272.36
नवंबर 16 167.25 315.18
जनवरी 17 161.10 298.48
फरवरी 17 94.87 187.23
सामान्य स्थिति में पीएम 2.5 होना चाहिए 60 और 100 होना चाहिए पीएम 10 का स्तर।
दिसंबर में जांच नहीं हो सकी थी।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद हवा में प्रदूषण जांचने के लिए सैंपल लिए जाते हैं जो कभी कम हो जाता है तो कभी ज्यादा हो जाता है। जिस तरह से धूल उड़ती है और वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, उससे ही वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। गर्मी में खेती कार्य होने के अलावा सर्दी में कण स्थिर रहने से भी प्रदूषण ज्यादा हो जाता है।
-निर्मल कश्यप, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी