{"_id":"578d20134f1c1b4c68c4b4b1","slug":"sonipat-news-hindi-news-killing-relation","type":"story","status":"publish","title_hn":"खुशियों के रंग उतरे नहीं थे, कि उजड़ गया परिवार ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खुशियों के रंग उतरे नहीं थे, कि उजड़ गया परिवार
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Tue, 19 Jul 2016 12:01 AM IST
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मुकेश के घर में थापों के निशान।
- फोटो : bureau
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खेवड़ा के किसान मुकेश के घर में आज अन्य दिनों के मुकाबले कहीं अधिक चहल-पहल है। पूरे गांव में मुकेश को दीनू के नाम से पुकारा जाता था। गांव की गलियों में खेलकूद कर ही दीनू इतना बड़ा हुआ था। अच्छी खेती होती थी, जिसके चलते आर्थिक रूप से दीनू संपन्न था। हालांकि कमी सिर्फ एक थी पारिवारिक कलह। दीनू का अपनी पत्नी के साथ प्रतिदिन किसी न किसी बात को लेकर झगड़ा होता था, लेकिन रविवार को झगड़ा इतना बढ़ गया कि दीनू ने अपने दोनों बच्चों और पत्नी की हत्या कर दी। इसके बाद खुद भी फांसी के फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। हंसता खेलता परिवार एक ही रात में खत्म हो गया। गांव भर में यह बात जंगल की आग की तरह फैल गई। जब तक पुलिस पहुंची तब तक दीनू के घर पूरा गांव जुट चुका था। पुलिस और एफएसएल की टीम ने जांच की। जांच के दौरान कई तरह के एंगल से क्राइम सीन क्रिएट करने की कोशिश भी की गई। पुलिस तथा एफएसएल टीम ने अपनी-अपनी थ्योरी से इस मामले को देखा।
चार माह पहले हुई थी शादी, नहीं सूखे थाप के रंग
बता दें कि मुकेश की पहली पत्नी ज्योति की मौत लगभग डेढ़ साल पहले हुई थी। ज्योति कैंसर से पीड़ित थी और इसी बीमारी में उसने दम तोड़ दिया। एक साल के इंतजार के बाद बड़े-बुजुर्गों की सहमति से मुकेश की शादी ज्योति की छोटी बहन प्रीति से की गई। यूं तो शादी पर सादा समारोह रखा गया था, लेकिन रस्म और रिवाज पूरे किए गए थे। इन्हीं रस्मों में से एक घर की दीवारों पर हाथ से लगाए जाने वाले थापों का रंग अभी तक सूखा नहीं था, उससे पहले ही यह वारदात हो गई।
अच्छे स्कूल में पढ़ते थे बच्चे
मुकेश उर्फ दीनू के आर्थिक हालत अच्छे थे। इसीलिए उसने कभी बच्चों की पढ़ाई के साथ समझौता नहीं किया। मुकेश ने अपने दोनों बच्चों का अच्छे स्कूल में दाखिल करा रखा था। निहाल बड़ा था और दूसरी कक्षा में पढ़ता था, वहीं हिमांशी पहली कक्षा में पढ़ती थी। दोनों बच्चे खेवड़ा मेरठ रोड स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ते थे। इसी स्कूल की बस सोमवार सुबह बच्चों को लेने आई तो उसके बाद ही इस वारदात का पता लग सका था।
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परिवार में नहीं बचा कोई
बता दें कि मुकेश के पिता महताब सिंह चार भाई थे। वहीं महताब सिंह के दो बेटे थे। इसमें बड़ा मुकेश था। छोटे बेटे की कुछ साल पहले ही सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वह अविवाहित था। मुकेश का ससुराल यानी की ज्योति और प्रीति का मायका चिड़ी चांदी गांव में है। भाई की मौत के बाद मुकेश ने पत्नी खो दी और अब अपने दोनों बच्चों तथा दूसरी पत्नी प्रीति को भी मारकर मुकेश ने अपने पूरे परिवार को ही खत्म कर दिया।
वजह क्या किसी को कैसे पता चले
गांव के कुछ लोगों का कहना है कि मुकेश शराब का आदी था। इसी के चलते कई बार उसकी प्रीति के साथ कहासुनी होती थी। आयेदिन घर में झगड़े भी होते थे। शायद शराब के नशे में ही मुकेश ने इस वारदात को अंजाम दिया और जब थोड़ा होश आया तो आत्मग्लानी महसूस करते हुए खुद भी फांसी के फंदे से लटककर जान दे दी। हालांकि मुकेश के परिजनों का कहना है कि वह पहले शराब पीता था, अब शराब छोड़ चुका था।
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चार माह पहले हुई थी शादी, नहीं सूखे थाप के रंग
बता दें कि मुकेश की पहली पत्नी ज्योति की मौत लगभग डेढ़ साल पहले हुई थी। ज्योति कैंसर से पीड़ित थी और इसी बीमारी में उसने दम तोड़ दिया। एक साल के इंतजार के बाद बड़े-बुजुर्गों की सहमति से मुकेश की शादी ज्योति की छोटी बहन प्रीति से की गई। यूं तो शादी पर सादा समारोह रखा गया था, लेकिन रस्म और रिवाज पूरे किए गए थे। इन्हीं रस्मों में से एक घर की दीवारों पर हाथ से लगाए जाने वाले थापों का रंग अभी तक सूखा नहीं था, उससे पहले ही यह वारदात हो गई।
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अच्छे स्कूल में पढ़ते थे बच्चे
मुकेश उर्फ दीनू के आर्थिक हालत अच्छे थे। इसीलिए उसने कभी बच्चों की पढ़ाई के साथ समझौता नहीं किया। मुकेश ने अपने दोनों बच्चों का अच्छे स्कूल में दाखिल करा रखा था। निहाल बड़ा था और दूसरी कक्षा में पढ़ता था, वहीं हिमांशी पहली कक्षा में पढ़ती थी। दोनों बच्चे खेवड़ा मेरठ रोड स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ते थे। इसी स्कूल की बस सोमवार सुबह बच्चों को लेने आई तो उसके बाद ही इस वारदात का पता लग सका था।
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परिवार में नहीं बचा कोई
बता दें कि मुकेश के पिता महताब सिंह चार भाई थे। वहीं महताब सिंह के दो बेटे थे। इसमें बड़ा मुकेश था। छोटे बेटे की कुछ साल पहले ही सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वह अविवाहित था। मुकेश का ससुराल यानी की ज्योति और प्रीति का मायका चिड़ी चांदी गांव में है। भाई की मौत के बाद मुकेश ने पत्नी खो दी और अब अपने दोनों बच्चों तथा दूसरी पत्नी प्रीति को भी मारकर मुकेश ने अपने पूरे परिवार को ही खत्म कर दिया।
वजह क्या किसी को कैसे पता चले
गांव के कुछ लोगों का कहना है कि मुकेश शराब का आदी था। इसी के चलते कई बार उसकी प्रीति के साथ कहासुनी होती थी। आयेदिन घर में झगड़े भी होते थे। शायद शराब के नशे में ही मुकेश ने इस वारदात को अंजाम दिया और जब थोड़ा होश आया तो आत्मग्लानी महसूस करते हुए खुद भी फांसी के फंदे से लटककर जान दे दी। हालांकि मुकेश के परिजनों का कहना है कि वह पहले शराब पीता था, अब शराब छोड़ चुका था।