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शिक्षित पंचायतें स्वच्छ प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Thu, 16 Jun 2016 12:25 AM IST
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ओपी जिंदल ग्लोबल विवि में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव राकेश गुप्ता
- फोटो : bureau
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मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव राकेश गुप्ता ने कहा कि प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में शिक्षा की अनिवार्यता को लागू करके स्वच्छ प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि अगर किसी पंचायत प्रतिनिधि को बीडीपीओ कार्यालय में जाने के बाद किसी कागज को पढ़ने का ही पता नहीं हो तो वह विकास में अपनी भागीदारी कैसे दे सकता है। वह कहीं भी अपने दायें हाथ का अंगूठा रख देता था और इसका फायदा कार्यालयों में मौजूद कुछ कर्मचारी आसानी से उठा लेते थे। इस बार सरकार ने शिक्षा के नियम को लागू किया और अदालत ने भी इस पर अपनी मोहर लगाई। अब स्थिति यह है कि प्रदेश में पंचायत प्रतिनिधियों की औसत आयु 34 वर्ष है। वे बुधवार को जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में विजन इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो सप्ताह के पब्लिक पालिसी बूट कैंप में नौकरशाह की जिंदगी विषय पर संबोधित कर रहे थे।
शिविर में देशभर के 20 राज्यों के आईआईएम, आईआईटी, विवि व कालेजों से पहुंचे 150 से ज्यादा युवा थे। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में शिक्षा की नीति लागू करने की वजह से उच्च शिक्षित युवा अब गांवों में पंचायत की बागडोर थामे हुए हैं। उन्होंने कहा कि फतेहाबाद जिला में तो जिला परिषद की सदस्य चुनी गई एक युवती हावर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार का दूसरा कदम ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान की सफलता है। सरकार ने एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी की तरह कार्य किया और एक हजार लड़कों के पीछे 900 तक रहने वाला लड़कियों की संख्या आंकड़ा 900 से ऊपर पहुंच गया। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों कतर में एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने खुद हरियाणा में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति की सराहना की। उन्होंने बताया कि आज हरियाणा में आधार सीडिंग 98.6 प्रतिशत है। जब सरकारी स्कूलों में आईटी के साथ काम किया गया तो कई लाख दाखिले फर्जी मिले। इन्हीं दाखिलों के नाम पर मिड डे मिल के नाम पर धोखाधड़ी होती थी और स्कूलों में स्टाफ और संसाधनों की कमी दिखाई जाती थी।
सोनीपत के स्कूल में नकल होते देखी तो बोर्ड सचिव बनकर बनाए नियम
1997 बैच के आईएएस अधिकारी राकेश गुप्ता ने बताया कि सिविल सर्विस ज्वाइन करने के बाद उन्होंने बतौर प्रशिक्षु सोनीपत में ज्वाइन किया। यहां तत्कालीन उपायुक्त ने जब उन्हें एक स्कूल में परीक्षा के दौरान निरीक्षण के लिए भेजा तो वहां देखा कि 250 विद्यार्थी परीक्षा दे रहे थे और उन्हें नकल करवाने के लिए दो हजार लोगों का हजूम उमड़ा हुआ था। इसके बाद जब बोर्ड सचिव बना तो उस समय इस दिशा में काम किया।
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मिशन डायरेक्टर बना तो लागू किया एमआईएस सिस्टम
बतौर आईएएस अधिकारी अपने अनुभव सांझा करते हुए उन्होंने कहा कि कई जिलों में बतौर उपायुक्त कार्य करने के बाद मैने अपनी इच्छा रूरल हेल्थ मिशन में मिशन डायरेक्टर बनने की जाहिर की। यहां सबसे लंबे समय तीन वर्ष काम किया और यहां एमआईएस सिस्टम लागू किया। जच्चा-बच्चा सुरक्षा सहित कई कार्य किए गए। रैफरल एंबुलेंस सिस्टम व बर्थ रजिस्ट्रेशन पर काम किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के काम करने में बड़े चैलेंज थे और आपको जमीनी स्तर पर काम करने के लिए कर्मचारियों को संतुष्ट करने की आवश्यकता है।
उपायुक्त के तौर पर जिम्मेदारियों के साथ चुनौतियां भी कम नहीं
नौकरशाह की जिंदगी विषय पर बोलते हुए गुप्ता ने कहा कि अपनी नौकरी के दौरान उन्होंने बतौर एसडीएम पहली नियुक्ति रोहतक के महम में ली। इसके बाद रोहतक, करनाल और गुड़गांव में बतौर जिला उपायुक्त काम किया। उन्होंने कहा कि एसडीएम व उपायुक्त की नौकरी के दौरान कई महत्वपूर्ण काम किए। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा में आपके पास जिम्मेदारियों के साथ-साथ चुनौतियां भी कम नहीं हैं। इस अवसर पर विजन इंडिया फाउंडेशन के को फाउंडर साहिल अग्रवाल, शोभित माथुर और अमन गुप्ता भी मौजूद थे।
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शिविर में देशभर के 20 राज्यों के आईआईएम, आईआईटी, विवि व कालेजों से पहुंचे 150 से ज्यादा युवा थे। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में शिक्षा की नीति लागू करने की वजह से उच्च शिक्षित युवा अब गांवों में पंचायत की बागडोर थामे हुए हैं। उन्होंने कहा कि फतेहाबाद जिला में तो जिला परिषद की सदस्य चुनी गई एक युवती हावर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार का दूसरा कदम ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान की सफलता है। सरकार ने एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी की तरह कार्य किया और एक हजार लड़कों के पीछे 900 तक रहने वाला लड़कियों की संख्या आंकड़ा 900 से ऊपर पहुंच गया। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों कतर में एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने खुद हरियाणा में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति की सराहना की। उन्होंने बताया कि आज हरियाणा में आधार सीडिंग 98.6 प्रतिशत है। जब सरकारी स्कूलों में आईटी के साथ काम किया गया तो कई लाख दाखिले फर्जी मिले। इन्हीं दाखिलों के नाम पर मिड डे मिल के नाम पर धोखाधड़ी होती थी और स्कूलों में स्टाफ और संसाधनों की कमी दिखाई जाती थी।
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सोनीपत के स्कूल में नकल होते देखी तो बोर्ड सचिव बनकर बनाए नियम
1997 बैच के आईएएस अधिकारी राकेश गुप्ता ने बताया कि सिविल सर्विस ज्वाइन करने के बाद उन्होंने बतौर प्रशिक्षु सोनीपत में ज्वाइन किया। यहां तत्कालीन उपायुक्त ने जब उन्हें एक स्कूल में परीक्षा के दौरान निरीक्षण के लिए भेजा तो वहां देखा कि 250 विद्यार्थी परीक्षा दे रहे थे और उन्हें नकल करवाने के लिए दो हजार लोगों का हजूम उमड़ा हुआ था। इसके बाद जब बोर्ड सचिव बना तो उस समय इस दिशा में काम किया।
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मिशन डायरेक्टर बना तो लागू किया एमआईएस सिस्टम
बतौर आईएएस अधिकारी अपने अनुभव सांझा करते हुए उन्होंने कहा कि कई जिलों में बतौर उपायुक्त कार्य करने के बाद मैने अपनी इच्छा रूरल हेल्थ मिशन में मिशन डायरेक्टर बनने की जाहिर की। यहां सबसे लंबे समय तीन वर्ष काम किया और यहां एमआईएस सिस्टम लागू किया। जच्चा-बच्चा सुरक्षा सहित कई कार्य किए गए। रैफरल एंबुलेंस सिस्टम व बर्थ रजिस्ट्रेशन पर काम किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के काम करने में बड़े चैलेंज थे और आपको जमीनी स्तर पर काम करने के लिए कर्मचारियों को संतुष्ट करने की आवश्यकता है।
उपायुक्त के तौर पर जिम्मेदारियों के साथ चुनौतियां भी कम नहीं
नौकरशाह की जिंदगी विषय पर बोलते हुए गुप्ता ने कहा कि अपनी नौकरी के दौरान उन्होंने बतौर एसडीएम पहली नियुक्ति रोहतक के महम में ली। इसके बाद रोहतक, करनाल और गुड़गांव में बतौर जिला उपायुक्त काम किया। उन्होंने कहा कि एसडीएम व उपायुक्त की नौकरी के दौरान कई महत्वपूर्ण काम किए। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा में आपके पास जिम्मेदारियों के साथ-साथ चुनौतियां भी कम नहीं हैं। इस अवसर पर विजन इंडिया फाउंडेशन के को फाउंडर साहिल अग्रवाल, शोभित माथुर और अमन गुप्ता भी मौजूद थे।