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सरकार से लिखित प्रस्ताव चाहते हैं किसान, तभी शुरू हो सकेगी बातचीत
Mon, 01 Feb 2021 04:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अंकित चौहान, सोनीपत
अंकित चौहान, सोनीपत
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 01 Feb 2021 04:53 AM IST
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सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन करते किसान
- फोटो : पीटीआई
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सरकार व किसान बातचीत के लिए एक-दूसरे की पहल का इंतजार कर रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने आखिरी बैठक का प्रस्ताव अभी खत्म नहीं होने की बात कही तो किसान नेता उससे संतुष्ट नजर आए कि पहली बार पीएम ने किसानों के बारे में कुछ सकारात्मक रुख दिखाया है। किसान चाहते हैं कि सरकार से लिखित प्रस्ताव आता है, तभी बातचीत शुरू हो सकेगी और किसान अपनी तरफ से पहल नहीं करेंगे।
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इस तरह अब किसानों को सरकार के लिखित प्रस्ताव का इंतजार है, जिससे बातचीत का बंद पड़ा रास्ता दोबारा से खुल सके और उससे कोई समाधान निकल सके। इसके साथ ही किसान नेताओं ने यह भी चेताया है कि सरकार अगर समझ रही है कि वह आंदोलन को तोड़कर खत्म करा देगी तो यह उसकी बड़ी भूल है और ऐसा कभी नहीं होगा।
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किसानों व सरकार के बीच आखिरी बार 22 जनवरी को बातचीत हुई है, उसमें भी किसान केवल जवाब देने गए थे कि उनको सरकार का प्रस्ताव मंजूर नहीं है। उसके बाद से आंदोलन में लगातार उतार-चढ़ाव चल रहा है और अब दोबारा से आंदोलन मजबूत हो गया है। जिससे किसान व सरकार दोनों ही चाहते है कि एक बार फिर बातचीत का सिलसिला शुरू हो।
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इस बीच ही पीएम नरेंद्र मोदी के सरकार का प्रस्ताव अभी खत्म नहीं होने की बात कही तो इसे किसानों व सरकार के बीच चल रहा गतिरोध खत्म करने में काफी अहम माना जा रहा है। किसान नेताओं की तल्खी भी कुछ कम हुई है। किसान इसे काफी बेहतर मानते है, लेकिन वह यह भी चाहते हैं कि सरकार की तरफ से उनको लिखित प्रस्ताव भेजा जाए। उसके बाद ही वह बातचीत के लिए जाएंगे।
किसानों को आंदोलन करते हुए दो महीने से ज्यादा का समय हो चुका है। अब पीएम नरेंद्र मोदी ने इस पर कोई बात कही है तो यह अच्छी बात है कि उन्होंने अन्नदाता की बात को सुना है। किसानों के लिए तभी अच्छा होगा, जब उनकी मांग को पीएम पूरा कराएंगे। इसका हल तभी होगा, जब केवल कहने की जगह सरकार इस पर बातचीत करके आगे बढ़े।
- सतनाम सिंह, महासचिव, भाकियू दोआबा
पीएम ने पहली बार इस तरह किसानों के बारे में बात करके एक पहल की है। अब सरकार को बड़ा दिल करके किसानों की मांग को पूरा करना चाहिए। सरकार को आगे आना चाहिए और किसानों के साथ बातचीत करके जल्द से जल्द कृषि कानूनों को रद्द करने का फैसला लेना चाहिए।
- बूटा सिंह, शादीपुर, प्रधान भारतीय किसान मंच एकता