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किसानों और प्रबंधन के बीच नहीं बनी बात, गन्ना पेराई पर संकट
अमर उजाला ब्यूरो सोनीपत।
Updated Fri, 07 Apr 2017 12:07 AM IST
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शुगर मिल एमडी डॉ. सुभिता ढाका के साथ मीटिंग करते डायरेक्टर व किसान
- फोटो : bureau
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शुगर मिल प्रबंधन की लापरवाही से टरबाइन फटने के बाद से जहां मिल बंद हो गई है, वहीं किसानों के खेतों में खड़े छह लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का संकट गहरा गया है। वीरवार को हुई मीटिंग में गन्ना अंबाला के नारायणगढ़ में प्राइवेट मिल में लेकर जाने का प्रबंधन का प्रस्ताव किसानों ने ठुकरा दिया है। वहां गन्ना लेकर जाने पर 20-25 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा रुपये लेने से भी किसानों से साफ इंकार कर दिया है। किसानों ने साफ कह दिया है कि बांड के आधार पर वह केवल मिल तक गन्ना लेकर आएंगे। उससे आगे नारायणगढ़ तक उसे कैसे पहुंचाना है, यह मिल प्रबंधन खुद तय करेगा। इस तरह बात नहीं बनने पर किसान भाजपा मीडिया प्रभारी राजीव जैन के पास भी पहुंचे। उन्होंने मामले में सीएम से बात करके जल्द समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। वहीं, सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर ने किसानों का गन्ना खुद मिल तक डलवाने और टरबाइन फटने के मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने की बात कही है।
ट्रक एसोसिएशन ने 85 रुपये प्रति क्विंटल बताया खर्च
मिल प्रबंधन की लापरवाही के कारण टरबाइन फटने से शुगर मिल बंद पड़ा हुआ है और किसानों का गन्ना दूसरे मिल तक किस तरह पहुंचाया जाए, उसका समाधान निकाला जा रहा है। इसके लिए ही वीरवार को शुगर मिल एमडी डॉ. सुभिता ढाका के साथ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर राजकुमार दहिया, रणबीर सिंह, सरेश अंतिल, बलबीर दहिया, जगमिंदर दहिया, राज सिंह लाकड़ा समेत किसानों की मीटिंग हुई। वहां ट्रक एसोसिएशन के पदाधिकारी भी बुलाए गए थे, जिससे यह साफ हो सके कि नारायणगढ़ शुगर मिल तक गन्ना पहुंचाने के लिए वह कितना किराया लेते हैं। जहां ट्रक एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि वह मिल तक गन्ना पहुंचाने के लिए 85 रुपये प्रति क्विंटल लेंगे जो मिल प्रबंधन की ओर से किसानों को दिए जाने वाले 20-25 रुपये प्रति क्विंटल से 65-60 रुपये ज्यादा है। इस तरह किसानों ने नारायणगढ़ गन्ना लेकर जाने से साफ इंकार कर दिया। डायरेक्टर व किसानों ने कहा कि जिस समय मिल व किसानों के बीच बांड होता है तो उसमें साफ कहा जाता है कि किसानों को गन्ना केवल मिल तक पहुंचाना होगा। जब शुगर मिल प्रबंधन उस बांड के अनुसार किसानों से सभी वसूली करता है और उसी के आधार पर गन्ना लेता है तो किसान भी बांड के आधार पर केवल मिल तक गन्ना लेकर आएंगे। उससे आगे दूसरे मिल तक गन्ना कैसे पहुंचाया जाएगा, यह मिल प्रबंधन खुद तय करे।
राजीव जैन से मिले किसान, जल्द समाधान का आश्वासन
इस तरह काफी देर तक खींचतान चलने के बाद भी बात नहीं बन सकी और डायरेक्टर व किसान वहां से भाजपा जिला मीडिया प्रभारी राजीव जैन के पास उनके आवास पर पहुुंचे। पूरी समस्या सुनने के बाद राजीव जैन ने उनको आश्वासन दिया कि इसमें सीएम से बातचीत करके जल्द ही समाधान निकाल लिया जाएगा। इस तरह किसान वीरवार को दिनभर भटकते रहे, लेकिन उनके 6 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का समाधान नहीं निकल सका।
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मार्केटिंग बोर्ड की चेयरमैन का समाधान का दावा हवाई
मार्केटिंग बोर्ड की चेयरमैन कृष्णा गहलावत ने प्रेस नोट जारी करके यह दावा कर दिया कि किसानों की समस्या का समाधान करा दिया गया है और वह 20-25 रुपये प्रति क्विंटल लेने के लिए तैयार हो गए हैं। जबकि उन्होंने यह भी पता नहीं किया कि मिल प्रबंधन व किसानों के बीच मीटिंग में गन्ने को नारायणगढ़ शुगर मिल में डालने के लिए 20-25 रुपये ज्यादा दिए जाने के प्रस्ताव पर मंजूरी बनी है या नहीं। इस तरह की बयानबाजी का मिल में मौजूद डायरेक्टरों व किसानों को पता चला तो उन्होंने भी इसका विरोध शुरू कर दिया। कहा कि नेता उनकी समस्या का समाधान करने की जगह केवल हवाई दावे कर रहे हैं।
खुद डलवाएंगे गन्ना, जांच कराकर कार्रवाई करेंगे
मिल डायरेक्टरों ने गन्ना अंबाला ले जाने की समस्या बताई है। इस कारण ही कोऑपरेटिव की सभी मिलों से बात की गई है, जिससे वह बचे हुए गन्ने की थोड़ी-थोड़ी अपने यहां पेराई कर सके। गन्ना अंबाला भी लेकर जाना पड़ेगा तो उसे हम खुद वहां डलवाएंगे। उसके लिए किसानों को परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। वहीं, मिल में 14 लाख रुपये का गवर्नर आने के बाद भी उसे नहीं लगाए जाने पर जांच के लिए कमेटी का गठन किया जाएगा। जिसकी लापरवाही सामने आएगी, उस पर कार्रवाई जरूर की जाएगी।
-मनीष ग्रोवर, सहकारिता मंत्री
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ट्रक एसोसिएशन ने 85 रुपये प्रति क्विंटल बताया खर्च
मिल प्रबंधन की लापरवाही के कारण टरबाइन फटने से शुगर मिल बंद पड़ा हुआ है और किसानों का गन्ना दूसरे मिल तक किस तरह पहुंचाया जाए, उसका समाधान निकाला जा रहा है। इसके लिए ही वीरवार को शुगर मिल एमडी डॉ. सुभिता ढाका के साथ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर राजकुमार दहिया, रणबीर सिंह, सरेश अंतिल, बलबीर दहिया, जगमिंदर दहिया, राज सिंह लाकड़ा समेत किसानों की मीटिंग हुई। वहां ट्रक एसोसिएशन के पदाधिकारी भी बुलाए गए थे, जिससे यह साफ हो सके कि नारायणगढ़ शुगर मिल तक गन्ना पहुंचाने के लिए वह कितना किराया लेते हैं। जहां ट्रक एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि वह मिल तक गन्ना पहुंचाने के लिए 85 रुपये प्रति क्विंटल लेंगे जो मिल प्रबंधन की ओर से किसानों को दिए जाने वाले 20-25 रुपये प्रति क्विंटल से 65-60 रुपये ज्यादा है। इस तरह किसानों ने नारायणगढ़ गन्ना लेकर जाने से साफ इंकार कर दिया। डायरेक्टर व किसानों ने कहा कि जिस समय मिल व किसानों के बीच बांड होता है तो उसमें साफ कहा जाता है कि किसानों को गन्ना केवल मिल तक पहुंचाना होगा। जब शुगर मिल प्रबंधन उस बांड के अनुसार किसानों से सभी वसूली करता है और उसी के आधार पर गन्ना लेता है तो किसान भी बांड के आधार पर केवल मिल तक गन्ना लेकर आएंगे। उससे आगे दूसरे मिल तक गन्ना कैसे पहुंचाया जाएगा, यह मिल प्रबंधन खुद तय करे।
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राजीव जैन से मिले किसान, जल्द समाधान का आश्वासन
इस तरह काफी देर तक खींचतान चलने के बाद भी बात नहीं बन सकी और डायरेक्टर व किसान वहां से भाजपा जिला मीडिया प्रभारी राजीव जैन के पास उनके आवास पर पहुुंचे। पूरी समस्या सुनने के बाद राजीव जैन ने उनको आश्वासन दिया कि इसमें सीएम से बातचीत करके जल्द ही समाधान निकाल लिया जाएगा। इस तरह किसान वीरवार को दिनभर भटकते रहे, लेकिन उनके 6 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का समाधान नहीं निकल सका।
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मार्केटिंग बोर्ड की चेयरमैन का समाधान का दावा हवाई
मार्केटिंग बोर्ड की चेयरमैन कृष्णा गहलावत ने प्रेस नोट जारी करके यह दावा कर दिया कि किसानों की समस्या का समाधान करा दिया गया है और वह 20-25 रुपये प्रति क्विंटल लेने के लिए तैयार हो गए हैं। जबकि उन्होंने यह भी पता नहीं किया कि मिल प्रबंधन व किसानों के बीच मीटिंग में गन्ने को नारायणगढ़ शुगर मिल में डालने के लिए 20-25 रुपये ज्यादा दिए जाने के प्रस्ताव पर मंजूरी बनी है या नहीं। इस तरह की बयानबाजी का मिल में मौजूद डायरेक्टरों व किसानों को पता चला तो उन्होंने भी इसका विरोध शुरू कर दिया। कहा कि नेता उनकी समस्या का समाधान करने की जगह केवल हवाई दावे कर रहे हैं।
खुद डलवाएंगे गन्ना, जांच कराकर कार्रवाई करेंगे
मिल डायरेक्टरों ने गन्ना अंबाला ले जाने की समस्या बताई है। इस कारण ही कोऑपरेटिव की सभी मिलों से बात की गई है, जिससे वह बचे हुए गन्ने की थोड़ी-थोड़ी अपने यहां पेराई कर सके। गन्ना अंबाला भी लेकर जाना पड़ेगा तो उसे हम खुद वहां डलवाएंगे। उसके लिए किसानों को परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। वहीं, मिल में 14 लाख रुपये का गवर्नर आने के बाद भी उसे नहीं लगाए जाने पर जांच के लिए कमेटी का गठन किया जाएगा। जिसकी लापरवाही सामने आएगी, उस पर कार्रवाई जरूर की जाएगी।
-मनीष ग्रोवर, सहकारिता मंत्री