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मर्चेंट नेवी के अफसर की कोलंबो में मौत, चार दिन बाद भी नहीं आ सका शव
अमर उजाला ब्यूरो गोहाना।
Updated Thu, 08 Dec 2016 12:17 AM IST
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कैप्टन मलिक। (फाइल फोटो )
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मर्चेंट नेवी में तैनात जिले के गांव आंवली के कैप्टन रामकुंआर मलिक की दिमाग की नस फटने से श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में मौत हो गई। नेवी की ओर से चार दिन बाद भी शव गांव नहीं भेजा गया। परेशान परिजनों ने ट्विटर पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मदद मांगी, लेकिन मंत्री खुद बीमार हैं। इसके चलते बुधवार को परिजनों ने सांसद रमेश कौशिक से बात की। सांसद ने मर्चेंट नेवी में बात की, जहां से आश्वासन मिला है कि गुरुवार को कार्गोे जहाज से शव भारत भेज दिया जाएगा।
पूर्व जिला पार्षद और आंवली गांव निवासी उमेश मलिक ने बताया कि उनके ताऊ का बेटा 42 वर्षीय कैप्टन राजकुंवार मलिक मर्चेंट नेवी में तैनात थे। तीन दिसंबर को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में दिमाग की नस फटने से मौत हो गई थी, जिसकी कंपनी द्वारा अगले दिन सूचना दी गई। उसके बाद कंपनी ने शव भेजने के लिए ईमेल द्वारा कुछ पहचान पत्र आदि मंगवाए थे। वे कई बार कागजात भेज चुके हैं, लेकिन अभी तक शव नहीं पहुंच पाया है। इस बारे में वे सोनीपत के सांसद रमेश कौशिक व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज से ट्विटर पर आग्रह कर चुके हैं।
दो माह की छुट्टी काटकर गए थे 23 नवंबर को
कैप्टन राजकुंवार मलिक दो माह की छुट्टी पर आए थे और 23 नवंबर को वापिस ड्यूटी पर गए थे। वह घर से कोलंबो के लिए रवाना हुए थे। वहीं, से उनकी मौत की सूचना आई है। उनके परिजनों का कहना है कि कैप्टन मलिक को वे कुछ दिन के लिए रोकना चाहते थे, लेकिन उन्हें ड्यूटी को महत्व देते हुए कहा कि आराम के बाद काम करना जरूरी है।
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बेटा और बेटी को छोड़ गए
कैप्टन राजकुंवार मलिक के दो बच्चे एक बेटा और एक बेटी है। दोनों अभी पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी बेटी प्रियंका 11वीं कक्षा की छात्रा है और किलोई के शीतल स्पोर्ट्स स्कूल में पढ़ती है। वह कबड्डी की खिलाड़ी है तथा राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी है। बेटा राहुल 9वीं कक्षा का छात्र है। वह भी अपनी बहन के साथ इसी स्कूल में पढ़ता है। कैप्टन राजकुंवार की पत्नी गृहणी हैं। कैप्टन की एक बहन व भाई हैं। भाई खेतीबाड़ी का काम करता है तथा बहन की शादी हो चुकी है।
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पूर्व जिला पार्षद और आंवली गांव निवासी उमेश मलिक ने बताया कि उनके ताऊ का बेटा 42 वर्षीय कैप्टन राजकुंवार मलिक मर्चेंट नेवी में तैनात थे। तीन दिसंबर को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में दिमाग की नस फटने से मौत हो गई थी, जिसकी कंपनी द्वारा अगले दिन सूचना दी गई। उसके बाद कंपनी ने शव भेजने के लिए ईमेल द्वारा कुछ पहचान पत्र आदि मंगवाए थे। वे कई बार कागजात भेज चुके हैं, लेकिन अभी तक शव नहीं पहुंच पाया है। इस बारे में वे सोनीपत के सांसद रमेश कौशिक व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज से ट्विटर पर आग्रह कर चुके हैं।
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दो माह की छुट्टी काटकर गए थे 23 नवंबर को
कैप्टन राजकुंवार मलिक दो माह की छुट्टी पर आए थे और 23 नवंबर को वापिस ड्यूटी पर गए थे। वह घर से कोलंबो के लिए रवाना हुए थे। वहीं, से उनकी मौत की सूचना आई है। उनके परिजनों का कहना है कि कैप्टन मलिक को वे कुछ दिन के लिए रोकना चाहते थे, लेकिन उन्हें ड्यूटी को महत्व देते हुए कहा कि आराम के बाद काम करना जरूरी है।
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बेटा और बेटी को छोड़ गए
कैप्टन राजकुंवार मलिक के दो बच्चे एक बेटा और एक बेटी है। दोनों अभी पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी बेटी प्रियंका 11वीं कक्षा की छात्रा है और किलोई के शीतल स्पोर्ट्स स्कूल में पढ़ती है। वह कबड्डी की खिलाड़ी है तथा राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी है। बेटा राहुल 9वीं कक्षा का छात्र है। वह भी अपनी बहन के साथ इसी स्कूल में पढ़ता है। कैप्टन राजकुंवार की पत्नी गृहणी हैं। कैप्टन की एक बहन व भाई हैं। भाई खेतीबाड़ी का काम करता है तथा बहन की शादी हो चुकी है।