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हाउस मीटिंग में घंटेभर हंगामे के बाद पास हुआ मनरेगा का बजट प्रस्ताव

Wed, 18 Jan 2017 12:03 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत Updated Wed, 18 Jan 2017 12:03 AM IST
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sonipat, House passed in the meeting an hour after uproar manrega budget proposal
विकास कार्य नहीं होने पर एडीसी के सामने नाराजगी जताते पार्षद - फोटो : sonipat
अधिकारियों ने जिले में विकास के एजेंडों पर चर्चा करने की जगह केवल मनरेगा के 842 लाख 83 हजार रुपये का बजट पास कराने के लिए जिला परिषद बोर्ड की मीटिंग बुला ली, जिस पर पार्षद भड़क गए और अधिकारियों पर विकास नहीं कराने का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। इस दौरान मनरेगा का बजट भी पास करने से इंकार कर दिया गया, जिससे अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए और पार्षदों को हर वार्ड में विकास कराने का आश्वासन दिया गया। करीब घंटेभर हंगामे के बाद ही मनरेगा के बजट पर मुहर लगाई गई और पार्षदों ने अपने-अपने वार्ड की समस्याएं रखीं। वहीं एडीसी व डीडीपीओ के अलावा किसी भी अधिकारी के मीटिंग में नहीं पहुंचने पर भी पार्षदों ने ऐतराज जताया और अगली मीटिंग में उनके नहीं आने पर निंदा प्रस्ताव करने के अलावा कार्रवाई की मांग की गई।
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मीटिंग के लिए चार दिन जारी किया था पत्र
जिला परिषद कार्यालय में मंगलवार को पार्षदों की मीटिंग बुलाई गई, जिसके लिए चार दिन पहले ही सभी को पत्र भेजा गया। मीटिंग में चेयरपर्सन मीना नरवाल के अलावा वाइस चेयरमैन बिजेंद्र मलिक, पार्षद नवीन शर्मा, अशोक आहुलाना, अमरजीत महमूदपुर, अरविंद, तेजभान बड़ौली, आरती बरोना, रेखा, बीर पहलवान, नंद किशोर चौहान, अनिल फरमाणा आदि पहुंचे। एडीसी शिवप्रसाद शर्मा व देवराज दांगी ने मीटिंग की कार्रवाई शुरू कराई। वर्ष 2017-18 के लिए मनरेगा में 842.83 लाख का बजट पास कराने का केवल एक एजेंडा रखा गया। इस पर पार्षद भड़क गए और उन्होंने केवल मनरेगा का बजट पास कराने के लिए मीटिंग बुलाने की बात कहते हुए जिले में विकास नहीं कराए जाने का आरोप लगाया।
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पार्षद बोले, मनरेगा के बजट का क्या फायदा
पार्षदों ने कहा कि मनरेगा के बजट का क्या फायदा है, जब उसमें घपला किया जाता है और उसके तहत काम करने के लिए मजदूर भी नहीं मिलते हैं। वहीं, विकास का कोई प्रस्ताव वे अधिकारियों के पास लेकर जाते हैं तो वह उनकी बात तक नहीं सुनते। पिछली मीटिंग में पास कराए गए एक भी प्रस्ताव पर काम नहीं कराने का आरोप लगाया गया। इस तरह मनरेगा का बजट प्रस्ताव पास करने से इंकार करने पर अधिकारियों ने सभी पार्षदों को समझाया और मनरेगा का पूरा फर्जीवाड़ा खत्म करके केवल 12 हजार काम करने वाले मजदूर इस समय होने की बात कही। उसके बाद भी पार्षदों ने कुछ भी सुनने से इंकार कर दिया और कहा कि डी प्लान के तहत भी एक भी काम उनके कहने से नहीं कराया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे में वह किस काम के लिए पार्षद बने हैं क्योंकि वह न किसी का काम करा सकते हैं और न किसी की आवाज उठा सकते हैं। इस तरह काफी देर तक खींचतान चलती रही, जिस पर एडीसी ने सभी को बजट प्रस्ताव पास करने के बाद अपने वार्ड की समस्या रखने के लिए कहा। उसके बाद ही प्रस्ताव पास किया गया। 
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अधिकारियों के नदारद रहने पर भी जताई नाराजगी
जिला परिषद की मीटिंग में केवल एडीसी व डीडीपीओ ही पहुंचे, जबकि अन्य किसी भी विभाग का अधिकारी नहीं पहुंचा। इस पर भी पार्षद भड़क गए और आरोप लगाया कि अधिकारी जिस तरह का रवैया अपना रहे हैं, उससे लग रहा है कि वह जिला परिषद को कुछ नहीं मानते हैं। इस कारण ही अगली मीटिंग में अधिकारी नहीं आते है तो उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया जाएगा और उन पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।

न पेंशन बन रही, न मिल रही
पार्षदों ने एडीसी शिवप्रसाद शर्मा के सामने पेंशन की समस्या रखी, जिसमें कहा गया कि पेंशन बनवाने में लोगों को बड़ी परेशानी आती है। इस पर एडीसी ने सीएमओ से बात करके उप मंडल स्तर पर मेडिकल कैंप लगवाने की बात कही, जिससे वहां पेंशन के लिए आसानी से मेडिकल हो सके। इसके अलावा डाकखानों से चार महीने की पेंशन नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारी को फोन करके समस्या के निस्तारण के लिए कहा गया।
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