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Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   sonipat, Auckland High Court imposed a fine of $ 6768, also denied visas

आकलैंड हाईकोर्ट ने 6768 डॉलर का लगाया जुर्माना, वीजा देने से भी इंकार

Tue, 03 Jan 2017 12:10 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत Updated Tue, 03 Jan 2017 12:10 AM IST
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न्यूजीलैंड के इमिग्रेशन विभाग की लापरवाही की सजा सोनीपत के रिटायर्ड प्रोफेसर व उनकी रिटायर्ड शिक्षिका पत्नी को भुगतनी पड़ रही है। इन पर आकलैंड हाईकोर्ट से 6768 डॉलर का जुर्माना लगा दिया गया और उनको बेटे के पास जाने के लिए वीजा देने तक से इंकार कर दिया गया, जबकि वीजा देने में न्यूजीलैंड के इमिग्रेशन विभाग की ओर से लापरवाही की गई। इस मामले में रिटायर्ड प्रोफेसर के बेटे ने न्यूजीलैंड के सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल दी है, ताकि उसके माता-पिता को न्याय मिल सके। वहीं, दंपति ने विदेश मंत्रालय से मामले में हस्तक्षेप करके मदद की गुहार लगाई है।
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सोनीपत के सेक्टर 14 में रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. रामचंद्र दहिया व उनकी रिटायर्ड शिक्षिका पत्नी सावित्री देवी रहती हैं। उनका छोटा बेटा अनुपम न्यूजीलैंड में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है, जो 2002 से वहां रह रहा है, जबकि बड़ा बेटा प्रवीण ऑस्ट्रेलिया में नौकरी करता है। डॉ. रामचंद्र व उनकी पत्नी सावित्री 2010 में रेजीडेंट वीजा पर न्यूजीलैंड अपने बेटे के पास गए और वहां 185 दिनों तक रहकर वापस लौट आए। उसके बाद 2012 में 185 दिन तक वहां रहे। इसके बाद 2012 में इनकी ओर से न्यूजीलैंड के इमिग्रेशन विभाग में परमानेंट रेजीडेंट वीजा के लिए आवेदन किया गया। आरोप है कि उनको सबसीक्यूंट रेजीडेंट वीजा दे दिया गया, जिसमें वह न्यूजीलैंड नहीं जा सके।
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उनकी ओर से 2015 में फिर से न्यूजीलैंड जाने के लिए वहां के माइग्रेशन विभाग में नई दिल्ली में वीजा के लिए आवेदन किया गया, लेकिन उनकी ओर से यह कहकर इंकार कर दिया गया कि उनको 2012 में सबसीक्यूंट वीजा दिया गया था। इस पर वह न्यूजीलैंड नहीं गए और इस कारण उनको वीजा नहीं दिया जा सकता है। इस पर डॉ. रामचंद्र की ओर से कहा गया कि उन्होंने परमानेंट रेजीडेंट वीजा के लिए अप्लाई किया था। वहीं, उनको ऐसा कोई कंडीशन लेटर नहीं दिया गया, जिससे न्यूजीलैंड जरूर जाने की बात सामने आए। उनका वीजा आवेदन कैंसिल होने पर उनकी ओर से न्यूजीलैंड के इमिग्रेशन कमेटी के सामने अपील की गई, जहां उनकी अपील कैंसिल कर दी गई तो न्यूजीलैंड के ऑकलैंड की हाईकोर्ट में याचिका डाली गई।
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डॉ. रामचंद्र ने बताया कि हाईकोर्ट ने उनकी याचिका कैंसिल करते है, उल्टा उन पर ही 6768 डॉलर का जुर्माना लगा दिया, जबकि वह जुर्माना उस स्थिति में लगाया जाना था, जब वह ऐसे अनुबंध पर हस्ताक्षर करते जिसमें उनके हारने पर जुर्माना लगाया जा सकता हो। ऐसे किसी अनुबंध पर हस्ताक्षर नहीं किए, लेकिन फिर भी ऐसा किया गया।
न्यूजीलैंड के इमिग्रेशन विभाग की लापरवाही की सजा सोनीपत के रिटायर्ड प्रोफेसर व उनकी रिटायर्ड शिक्षिका पत्नी को भुगतनी पड़ रही है।
रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. रामचंद्र की ओर से न्याय के लिए न्यूजीलैंड की कोर्ट ऑफ अपील में याचिका डाली गई तो वहां से भी जुर्माना लगाने के आदेश कर दिए गए, जबकि आदेश में यह नहीं बताया गया कि कितना जुर्माना लगाया जाएगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा है और वहां से उनको न्याय की उम्मीद है। वहीं, डॉ. रामचंद्र ने भारत के विदेश मंत्रालय से मदद की गुहार लगाई है, जिससे उनको न्याय मिल सके।
पोता होने पर भी नहीं जा सके न्यूजीलैंड
डॉ. रामचंद्र ने बताया कि उनकी पुत्रवधू ने एक साल पहले न्यूजीलैंड में बेटे को जन्म दिया था। वह उससे मिलने की बहुत चाहत रखते हैं, लेकिन उनके लिए वीजा का अड़ंगा खड़ा हो गया और यह सबकुछ इमिग्रेशन न्यूजीलैंड की अधिकारियों के कारण हुआ है।

मानव अधिकार संरक्षण संघ उठाएगा मामला
मानव अधिकार सरंक्षण संघ के अध्यक्ष जयवीर गहलावत ने कहा कि इस परिवार के साथ भेदभाव ही नहीं, बल्कि इनका मानसिक शोषण भी हुआ है। रामचंद्र दहिया चाहते हैं कि उनका आगे का जीवन अपने परिवार के साथ गुजारें। संघ को इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज भेजे गए हैं, जिनमें इस परिवार के साथ हुए भेदभाव की पुख्ता सुबूत हैं। जयवीर गहलावत ने कहा कि उनके अधिकारों का हनन नहीं होने देंगे। संघ सरकार से इस मामले में दखल देने की अपील करेगा, ताकि परिवार को न्याय मिल सके।
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